
मराठी के इसी नाम से प्रकाशित बेस्टसेलर एवं अत्यंत चर्चित नाटक का यह हिंदी अनुवाद है। यह नाटक दो चरित्रों के संघर्ष का नाटक है। एक हैं—एंग्लो इंडियन जेलर मिस्टर ग्लाड, जिनके नाम से ही कैदियों और जेल-कर्मचारियों की रूहें काँपती हैं, जिनके कदमों की आहट पाकर पेड़ों पर बैठे परिंदे भी सहमकर चहचहाना बंद कर देते हैं, लेकिन वे ख़ुद अंतर्द्वंद्व का शिकार हैं। दूसरी ओर है वीरभूषण पटनायक एक नक्सलवादी—जिसे फाँसी की सज़ा देकर जेल भेजा जाता है। इन दोनों का आमना-सामना होते ही दो व्यक्तियों का टकराव शुरू हो जाता है। अंत तक टकराव चलता रहता है और प्रेक्षक निर्णय नहीं कर पाता कि आख़िर जीत किसकी हुई।
यह नाटक प्रकाशन के पूर्व ही कई जगह मंचित हो चुका है। गुजराती में इसका मंचन हो रहा है और इसी नाटक पर इसी नाम से एक हिंदी फिल्म भी बन चुकी है।
Imprint: Penguin Swadesh
Published: Jul/2025
ISBN: 9780143477204 (Paperback)
Length : 122 Pages
MRP : ₹250.00