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Tilak Hindi / तिलक

Tilak Hindi / तिलक

Samrajya Ka Sabse Bada Shatru / साम्राज्य का सबसे बड़ा शत्रु

Vaibhav Purandare / वैभव पुरंदरे
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Paperback / Hardback

महात्मा गांधी के आने से पहले अगर किसी ने भारत की आज़ादी की लौ जलाई, तो वे थे बाल गंगाधर तिलक। तिलक को ‘लोकमान्य’ कहा जाता था, जिसका मतलब है ‘लोगों में सबसे ज़्यादा इज़्ज़तदार’। उन्होंने आज़ादी की लड़ाई को सिर्फ पढ़े-लिखे लोगों की बात से निकालकर आम लोगों का आंदोलन बना दिया। उनकी ज़बरदस्त बातें, उनका लगातार काम और उनके बेबाक विचार अंग्रेज़ों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गए। वैभव पुरंदरे ने अपनी इस किताब में तिलक की पूरी कहानी बताई है। उन्होंने दिखाया है कि कैसे तिलक ने कोंकण के एक छोटे से गाँव से पूरे भारत में अपनी पहचान बनाई। यह कहानी सिर्फ एक नेता के बारे में नहीं है, बल्कि उस हिम्मत और जज़्बे के बारे में है जो आज भी भारत की आत्मा में है। बाल गंगाधर तिलक की कहानी सिर्फ विरोध की नहीं, बल्कि मुश्किलों में भी डटे रहने और पक्के इरादों की मिसाल है। उनके विचार और काम आज भी हमें राह दिखाते हैं।

Imprint: Penguin Swadesh

Published: Mar/2026

ISBN: 9780143473367

Length : 480 Pages

MRP : ₹599.00

Tilak Hindi / तिलक

Samrajya Ka Sabse Bada Shatru / साम्राज्य का सबसे बड़ा शत्रु

Vaibhav Purandare / वैभव पुरंदरे

महात्मा गांधी के आने से पहले अगर किसी ने भारत की आज़ादी की लौ जलाई, तो वे थे बाल गंगाधर तिलक। तिलक को ‘लोकमान्य’ कहा जाता था, जिसका मतलब है ‘लोगों में सबसे ज़्यादा इज़्ज़तदार’। उन्होंने आज़ादी की लड़ाई को सिर्फ पढ़े-लिखे लोगों की बात से निकालकर आम लोगों का आंदोलन बना दिया। उनकी ज़बरदस्त बातें, उनका लगातार काम और उनके बेबाक विचार अंग्रेज़ों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गए। वैभव पुरंदरे ने अपनी इस किताब में तिलक की पूरी कहानी बताई है। उन्होंने दिखाया है कि कैसे तिलक ने कोंकण के एक छोटे से गाँव से पूरे भारत में अपनी पहचान बनाई। यह कहानी सिर्फ एक नेता के बारे में नहीं है, बल्कि उस हिम्मत और जज़्बे के बारे में है जो आज भी भारत की आत्मा में है। बाल गंगाधर तिलक की कहानी सिर्फ विरोध की नहीं, बल्कि मुश्किलों में भी डटे रहने और पक्के इरादों की मिसाल है। उनके विचार और काम आज भी हमें राह दिखाते हैं।

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