
इस काव्य संग्रह में राष्ट्रीयता, समाज सुधार, युग बोध के साथ-साथ भारतीय संस्कृति एवं नारी का चित्रण हुआ है। गुप्तजी ने नारी को गौरवपूर्ण स्थान दिया है। उन्होंने अपने इस काव्य संग्रह में सीता, यशोधरा, उर्मिला, कौशल्या, द्रौपदी आदि के माध्यम से नारी के उज्ज्वल और संघर्षशील वैवाहिक रूप को निरूपित किया है। उनकी दृष्टि में नारी पुरुषों के समान ही समस्त कार्य कर सकती है, कंधे से कंधा मिलाकर चल सकती है।
Imprint: Hind Pocket Books
Published: Dec/2022
ISBN: 9780143456087 (Paperback)
Length : 432 Pages
MRP : ₹399.00