
टीपू सुल्तान की विवादित विरासत आज भी भारत और उसकी समकालीन राजनीति को उलझाती रहती है। भारतीय सैन्य इतिहास का यह रहस्यमय पात्र आधुनिक इतिहासकारों के लिए अब भी एक बड़ी पहेली है। वह अलग-अलग लोगों के लिए अलग अर्थ रखता है। टीपू का सत्ता में आना संयोगवश हुआ। उसके पिता हैदर अली मैसूर के महाराजा की कृपा से आगे बढ़े थे। लेकिन चतुर और अवसरवादी हैदर ने अपने ही संरक्षक को अपदस्थ कर 1761 में वोडेयार वंश से मैसूर का सिंहासन छीन लिया। टीपू को सत्ता सहज रूप से मिल गई थी, इसी सफलता के अहंकार और युद्धोन्माद में टीपू ने मालाबार, मंगलौर, त्रावणकोर और कूर्ग पर घातक आक्रमण किए। टीपू एक साहसी सैनिक और कुशल प्रशासक था। लेकिन धार्मिक मामलों में उसकी अदूरदर्शिता ने वह संतुलन तोड़ दिया, जिसे हैदर हिंदू बहुसंख्यकों के साथ बनाए रखना चाहता था।
Imprint: Penguin Swadesh
Published: May/2026
ISBN: 9780143479918 (Paperback)
Length : 772 Pages
MRP : ₹999.00