
प्रिय कृष्ण में कृष्ण से वैसे बात की गई है जैसे कोई अपने सच्चे दोस्त से करता है — खुले दिल से, बिना छुपाए, बिना दिखावे के। हर पत्र सीधा और सच्चा है, जिसमें मन की बातें बिना किसी रोक-टोक के लिखी गई हैं, और उन्हें पढ़कर एक शांति सी महसूस होती है।
तुम उन्हें पाने की अपनी यात्रा में जहाँ भी हो, इन पन्नों में तुम्हें कुछ अपना सा ज़रूर मिलेगा। ये पत्र सरल हैं, बातचीत जैसे हैं और दिल के बहुत करीब हैं। ये याद दिलाते हैं कि भक्ति में सब कुछ सही होना ज़रूरी नहीं, बस साथ बने रहना ज़रूरी है।
Imprint: Penguin Tattva
Published: Oct/2026
ISBN: 9789377305413 (Paperback)
Length : 224 Pages
MRP : ₹250.00