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Raghavyadviyam / राघवयादवीयम्

Raghavyadviyam / राघवयादवीयम्

Venktadhwari
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Paperback / Hardback

क्या आप किसी ऐसे ग्रंथ के विषय में सोच सकते हैं जिसे आप सीधे पढ़े तो कुछ और अर्थ निकले और अगर उल्टा पढ़ें तो कोई और अर्थ? ग्रंथ को तो छोड़िए, ऐसा केवल एक श्लोक भी बनाना अत्यंत कठिन है। लेकिन क्या आपको पता है कि एक ऐसा ग्रन्थ है जिसमें एक नहीं बल्कि संपूर्ण श्लोक इस प्रकार लिखे गए हैं जिसे अगर आप सीधा पढ़ें तो रामकथा बनती है और उसी को अगर आप उल्टा पढ़ें तो कृष्णकथा।
इस ग्रंथ का नाम है राघवयादवीयम्, जो स्वयं राघव (श्रीराम) और यादव (श्रीकृष्ण) के योग से बना है। इसे “अनुलोम-विलोम काव्य” भी कहा जाता है।

Imprint: Penguin Swadesh

Published: Mar/2027

ISBN: 9789377308537 (Paperback)

Length : 96 Pages

MRP : ₹199.00

Raghavyadviyam / राघवयादवीयम्

Venktadhwari

क्या आप किसी ऐसे ग्रंथ के विषय में सोच सकते हैं जिसे आप सीधे पढ़े तो कुछ और अर्थ निकले और अगर उल्टा पढ़ें तो कोई और अर्थ? ग्रंथ को तो छोड़िए, ऐसा केवल एक श्लोक भी बनाना अत्यंत कठिन है। लेकिन क्या आपको पता है कि एक ऐसा ग्रन्थ है जिसमें एक नहीं बल्कि संपूर्ण श्लोक इस प्रकार लिखे गए हैं जिसे अगर आप सीधा पढ़ें तो रामकथा बनती है और उसी को अगर आप उल्टा पढ़ें तो कृष्णकथा।
इस ग्रंथ का नाम है राघवयादवीयम्, जो स्वयं राघव (श्रीराम) और यादव (श्रीकृष्ण) के योग से बना है। इसे “अनुलोम-विलोम काव्य” भी कहा जाता है।

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