
जब देश में संपूर्ण क्रांति का बिगुल बजने ही वाला था, तो इन्दिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा कर देश-भर में पुलिस राज स्थापित कर दिया और सेंसर की कैंची ने अखबार-तो-अखबार लोगों की ज़बानें तक काट डाली थी। ऐसे में भी क्रांति हुई तो कैसे? भूमिगत होकर जो नेता तानाशाही से जूझे, जेल और पुलिस-यातना का जोखिम उठाकर भी जन-जन में क्रांतिचेतना को उभारते रहे, उन्हीं को मुख्य श्रेय है इस रक्तहीन क्रांति का। कैसे जूझे वे? कौन-कौन थे वे?
किस प्रकार क्रांति का कार्य-संचालन करते रहे? इस सबका अत्यन्त प्रामाणिक तथा रोचक वृत्तान्त प्रस्तुत किया है इस पुस्तक में दीनानाथ मिश्र ने, जो स्वयं उन दिनों भूमिगत होकर कार्य कर रहे थे। इस महत्त्वपूर्ण पुस्तक की भूमिका लिखी है लोकप्रिय नेता तथा पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने।
Imprint: Hind Pocket Books
Published: Feb/2023
ISBN: 9780143460855 (Paperback)
Length : 184 Pages
MRP : ₹299.00