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Bahurupiya Banaras / बहुरूपिया बनारस

Bahurupiya Banaras / बहुरूपिया बनारस

Sabhyata-Sanskriti Aur Moksh Ki Nagri Kashi / सभ्यता-संस्कृति और मोक्ष की नगरी काशी

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Paperback / Hardback

बनारस को जानना हो तो उसके घाटों और मंदिरों से आगे जाना होगा—उन गलियों, आवाज़ों, किरदारों और किस्सों तक, जहाँ यह शहर हर दिन अपने नए रूप में सामने आता है। बहुरूपिया बनारस इसी अनदेखे बनारस की एक मोहक, आत्मीय और खोजपरक यात्रा है। यह पुस्तक बनारस को केवल मोक्ष की नगरी के रूप में नहीं, बल्कि विचार, तर्क, ज्ञान, कला, संगीत, साहित्य, रंगमंच, शिल्प, हास्य और जीवन के अनगिनत रंगों से बनी एक जीवंत संस्कृति के रूप में देखती है। यह पुस्तक कबीर चौरा की सुरमयी गलियों, ठुमरी गाने वाली चायवाली, देशभक्त तवायफ़ों, बिरहा और बुढ़वा मंगल से लेकर हास्य कवियों, ठलुवा क्लब, भांड मंडली और नगरी नाटक मंडली तक पहुँचती है। यह उन शिल्पियों और साधारण लोगों की कहानियाँ भी सामने लाती है, जिनके श्रम और समर्पण ने शहर की पहचान गढ़ी। बहुरूपिया बनारस दरअसल एक शहर की यात्रा नहीं, उसके मन और स्मृति में उतरने की कोशिश है—जहाँ हर गली एक कथा है, हर चेहरा एक चरित्र और हर विरोधाभास बनारस की पहचान।

Imprint: Penguin Swadesh

Published: Nov/2026

ISBN: 9789377306335 (Paperback)

Length : 248 Pages

MRP : ₹399.00

Bahurupiya Banaras / बहुरूपिया बनारस

Sabhyata-Sanskriti Aur Moksh Ki Nagri Kashi / सभ्यता-संस्कृति और मोक्ष की नगरी काशी


बनारस को जानना हो तो उसके घाटों और मंदिरों से आगे जाना होगा—उन गलियों, आवाज़ों, किरदारों और किस्सों तक, जहाँ यह शहर हर दिन अपने नए रूप में सामने आता है। बहुरूपिया बनारस इसी अनदेखे बनारस की एक मोहक, आत्मीय और खोजपरक यात्रा है। यह पुस्तक बनारस को केवल मोक्ष की नगरी के रूप में नहीं, बल्कि विचार, तर्क, ज्ञान, कला, संगीत, साहित्य, रंगमंच, शिल्प, हास्य और जीवन के अनगिनत रंगों से बनी एक जीवंत संस्कृति के रूप में देखती है। यह पुस्तक कबीर चौरा की सुरमयी गलियों, ठुमरी गाने वाली चायवाली, देशभक्त तवायफ़ों, बिरहा और बुढ़वा मंगल से लेकर हास्य कवियों, ठलुवा क्लब, भांड मंडली और नगरी नाटक मंडली तक पहुँचती है। यह उन शिल्पियों और साधारण लोगों की कहानियाँ भी सामने लाती है, जिनके श्रम और समर्पण ने शहर की पहचान गढ़ी। बहुरूपिया बनारस दरअसल एक शहर की यात्रा नहीं, उसके मन और स्मृति में उतरने की कोशिश है—जहाँ हर गली एक कथा है, हर चेहरा एक चरित्र और हर विरोधाभास बनारस की पहचान।

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