
इस उपन्यास में 1914-15 के दौरान अंग्रेजों के खिलाफ उपजे क्रांतिकारी आंदोलन की झलकी दी गई है। बीरी और उसका भाई अपने देश को स्वतंत्र कराना चाहते हैं, लेकिन उनकी राह में सबसे बड़ी रूकावट उनका अपना पिता ही बन जाता है, जो अंग्रेजों का वफादार चमचा था। देश के लिए मर मिटने वालों की यह कहानी आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर पुन: प्रकाशित की गई है।
Imprint: Hind Pocket Books
Published: Aug/2022
ISBN: 9780143458876 (Paperback)
Length : 224 Pages
MRP : ₹225.00