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Fugitive of Empire Hindi / Samrajya Ka Vidrohi / साम्राज्य का विद्रोही

Fugitive of Empire Hindi / Samrajya Ka Vidrohi / साम्राज्य का विद्रोही

Ras Behari Bose; Nirvasan Japan Aur Azadi Ki Ladai / रास बिहारी बोस : निर्वासन, जापन और अज़ादी की लड़ाई

Joeph MacQuade
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Paperback / Hardback

“1912 में दिल्ली में वायसराय लॉर्ड हार्डिंग पर हुए बम हमले ने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव को चुनौती देने वाले एक ऐसे क्रांतिकारी को सामने ला दिया, जिसका नाम आने वाले दशकों तक ब्रिटिश खुफिया तंत्र के लिए चिंता का कारण बना रहा, उसका नाम था—रासबिहारी बोस।
1915 के असफल विद्रोह के बाद ब्रिटिश पुलिस से बचते हुए जापान पहुँचे रास बिहारी बोस ने वहाँ से संघर्ष का नया अध्याय शुरू किया। उन्होंने एशिया में क्रांतिकारियों के नेटवर्क बनाए, भारत तक हथियार पहुँचाने के प्रयास किए, जापानी भाषा सीखी और भारतीय स्वतंत्रता के लिए एक व्यापक पैन-एशियाई आंदोलन से जोड़ने की कोशिश की। आगे चलकर वे इंडियन नेशनल आर्मी के निर्माण की जमीन तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
जोसेफ मैकक्वेड की यह पुस्तक रास बिहारी बोस को इतिहास के हाशिए से उठाकर एक वैश्विक क्रांतिकारी के रूप में देखने का प्रयास है जहाँ एक शख्सियत की कहानी के बिना भारत की स्वतंत्रता की कहानी अधूरी रह जाती है। यह कथा बीसवीं सदी के शुरुआती दशकों में स्वतंत्रता के लिए चल रही अंतरराष्ट्रीय लड़ाई का नया मानचित्र सामने रखती है।”

Imprint: Penguin Swadesh

Published: Nov/2026

ISBN: 9789377309114 (Paperback)

Length : 336 Pages

MRP : ₹699.00

Fugitive of Empire Hindi / Samrajya Ka Vidrohi / साम्राज्य का विद्रोही

Ras Behari Bose; Nirvasan Japan Aur Azadi Ki Ladai / रास बिहारी बोस : निर्वासन, जापन और अज़ादी की लड़ाई

Joeph MacQuade

“1912 में दिल्ली में वायसराय लॉर्ड हार्डिंग पर हुए बम हमले ने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव को चुनौती देने वाले एक ऐसे क्रांतिकारी को सामने ला दिया, जिसका नाम आने वाले दशकों तक ब्रिटिश खुफिया तंत्र के लिए चिंता का कारण बना रहा, उसका नाम था—रासबिहारी बोस।
1915 के असफल विद्रोह के बाद ब्रिटिश पुलिस से बचते हुए जापान पहुँचे रास बिहारी बोस ने वहाँ से संघर्ष का नया अध्याय शुरू किया। उन्होंने एशिया में क्रांतिकारियों के नेटवर्क बनाए, भारत तक हथियार पहुँचाने के प्रयास किए, जापानी भाषा सीखी और भारतीय स्वतंत्रता के लिए एक व्यापक पैन-एशियाई आंदोलन से जोड़ने की कोशिश की। आगे चलकर वे इंडियन नेशनल आर्मी के निर्माण की जमीन तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
जोसेफ मैकक्वेड की यह पुस्तक रास बिहारी बोस को इतिहास के हाशिए से उठाकर एक वैश्विक क्रांतिकारी के रूप में देखने का प्रयास है जहाँ एक शख्सियत की कहानी के बिना भारत की स्वतंत्रता की कहानी अधूरी रह जाती है। यह कथा बीसवीं सदी के शुरुआती दशकों में स्वतंत्रता के लिए चल रही अंतरराष्ट्रीय लड़ाई का नया मानचित्र सामने रखती है।”

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Joeph MacQuade

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