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Kajar Ki Kothari/काजर की कोठरी

Kajar Ki Kothari/काजर की कोठरी

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महान लेखक बाबू देवकीनंदन खत्री का यह महत्त्वपूर्ण उपन्यास है। अकूत दौलत को देखकर भला किसका मन नहीं ललचा जाता और वह उसे पाने के लिए किसी भी हद तक गिर जाता है। ऐसी ही घटना पर आधारित यह उपन्यास मन को विचलित कर देता है।
एक बड़े जमींदार लालसिंह की अकूत दौलत को हड़पने की साजिश और साथ ही उसे निष्फल करने के प्रयासों की अत्यंत दिलचस्प दास्तान इस उपन्यास में उकेरी गई है।
लालसिंह ने अपनी तमाम दौलत को एक सशर्त वसीयतनामे के द्वारा अपनी इकलौती बेटी सरला के नाम कर दिया है। यही कारण है कि शादी के ऐन वक्त लालसिंह के दुष्ट भतीजे सरला को ही उठा ले जाते हैं और उसे कैद कर लेते हैं। 

Imprint: Hind Pocket Books

Published: Feb/2023

ISBN: 9780143460985

Length : 120 Pages

MRP : ₹250.00

Kajar Ki Kothari/काजर की कोठरी


महान लेखक बाबू देवकीनंदन खत्री का यह महत्त्वपूर्ण उपन्यास है। अकूत दौलत को देखकर भला किसका मन नहीं ललचा जाता और वह उसे पाने के लिए किसी भी हद तक गिर जाता है। ऐसी ही घटना पर आधारित यह उपन्यास मन को विचलित कर देता है।
एक बड़े जमींदार लालसिंह की अकूत दौलत को हड़पने की साजिश और साथ ही उसे निष्फल करने के प्रयासों की अत्यंत दिलचस्प दास्तान इस उपन्यास में उकेरी गई है।
लालसिंह ने अपनी तमाम दौलत को एक सशर्त वसीयतनामे के द्वारा अपनी इकलौती बेटी सरला के नाम कर दिया है। यही कारण है कि शादी के ऐन वक्त लालसिंह के दुष्ट भतीजे सरला को ही उठा ले जाते हैं और उसे कैद कर लेते हैं। 

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