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इस पुस्तक में महात्मा बुद्ध और उसके धम्म को लेकर ओशो द्वारा दिए गए प्रवचनों का संकलन है।
द्रष्टा हो जाना बुद्ध हो जाना है। बुद्धत्व कुछ और नहीं माँगता, इतना ही कि तुम जागो, और उसे देखो जो सबको देखने वाला है। विषय पर मत अटके रहो। दृश्य पर मत अटके रहो। द्रष्टा में ठहर जाओ। अकंप हो जाए तुम्हारे द्रष्टा का भाव, साक्षी का भाव, बुद्धत्व उपलब्ध हो गया। और ऐसा बुद्धत्व सभी जन्म के साथ लेकर आए हैं। इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ, बुद्धत्व जन्मसिद्ध अधिकार है। इस पुस्तक में महात्मा बुद्ध के सारे ज्ञान का सारांश दिया गया है।
Imprint: Hind Pocket Books
Published: Dec/2022
ISBN: 9780143459576
Length : 334 Pages
MRP : ₹350.00
Imprint: Penguin Audio
Published:
ISBN:
Imprint: Hind Pocket Books
Published: Dec/2022
ISBN:
Length : 334 Pages
MRP : ₹350.00
इस पुस्तक में महात्मा बुद्ध और उसके धम्म को लेकर ओशो द्वारा दिए गए प्रवचनों का संकलन है।
द्रष्टा हो जाना बुद्ध हो जाना है। बुद्धत्व कुछ और नहीं माँगता, इतना ही कि तुम जागो, और उसे देखो जो सबको देखने वाला है। विषय पर मत अटके रहो। दृश्य पर मत अटके रहो। द्रष्टा में ठहर जाओ। अकंप हो जाए तुम्हारे द्रष्टा का भाव, साक्षी का भाव, बुद्धत्व उपलब्ध हो गया। और ऐसा बुद्धत्व सभी जन्म के साथ लेकर आए हैं। इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ, बुद्धत्व जन्मसिद्ध अधिकार है। इस पुस्तक में महात्मा बुद्ध के सारे ज्ञान का सारांश दिया गया है।
ओशो, जिन्हें क्रमशः भगवान श्री रजनीश, ओशो रजनीश, या केवल रजनीश के नाम से जाना जाता है, एक भारतीय , विचारक, धर्मगुरु और रजनीश आंदोलन के प्रणेता-नेता थे। अपने संपूर्ण जीवनकाल में आचार्य रजनीश को एक विवादास्पद रहस्यदर्शी, गुरु और आध्यात्मिक शिक्षक के रूप में देखा गया। वे धार्मिक रूढ़िवादिता के बहुत कठोर आलोचक थे, जिसकी वजह से वह बहुत ही जल्दी विवादित हो गए और ताउम्र विवादित ही रहे। 1960 के दशक में उन्होंने पूरे भारत में एक सार्वजनिक वक्ता के रूप में यात्रा की और वे पूंजीवाद और धार्मिक रूढ़िवाद के प्रखर आलोचक रहे। उन्होंने मानव कामुकता के प्रति एक ज्यादा खुले रवैया की वकालत की, जिसके कारण वे भारत तथा पश्चिमी देशों में भी आलोचना के पात्र रहे, हालाँकि बाद में उनका यह दृष्टिकोण अधिक स्वीकार्य हो गया।