
© 2020 Penguin India

“. . . अपने पति की शरण में लौट जाने की मेरी कितनी अभिलाषा थी, परन्तु मेरा यह पातक शरीर बाधक था। इसे लेकर मैं उनके पास नहीं लौट सकती थी। परन्तु वह भी देहबद्ध थे, अतः मैं देह त्यागकर भी उन्हें कैसे पाती, इसी से मर भी न सकी।”
आत्मग्लानि और प्रतिशोध से भरी-बिफरी एक असामान्य नारी की रुला देने वाली अनोखी कहानी।
अमर उपन्यासकार आचार्य चतुरसेन का अत्यन्त मार्मिक लघु उपन्यास, जिस पर इसी नाम से फिल्म का निर्माण भी हुआ है।
Imprint: Hind Pocket Book
Published: Jun/2023
ISBN: 9780143462040
Length : 80 Pages
MRP : ₹199.00
Imprint: Penguin Audio
Published:
ISBN:
Imprint: Hind Pocket Book
Published: Jun/2023
ISBN:
Length : 80 Pages
MRP : ₹199.00
“. . . अपने पति की शरण में लौट जाने की मेरी कितनी अभिलाषा थी, परन्तु मेरा यह पातक शरीर बाधक था। इसे लेकर मैं उनके पास नहीं लौट सकती थी। परन्तु वह भी देहबद्ध थे, अतः मैं देह त्यागकर भी उन्हें कैसे पाती, इसी से मर भी न सकी।”
आत्मग्लानि और प्रतिशोध से भरी-बिफरी एक असामान्य नारी की रुला देने वाली अनोखी कहानी।
अमर उपन्यासकार आचार्य चतुरसेन का अत्यन्त मार्मिक लघु उपन्यास, जिस पर इसी नाम से फिल्म का निर्माण भी हुआ है।
आचार्य चतुरसेन शास्त्री हिन्दी भाषा के एक महान उपन्यासकार थे। इनका अधिकतर लेखन ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित है। इनकी प्रमुख कृतियां गोली, सोमनाथ, वयं रक्षामः और वैशाली की नगरवधू इत्यादि हैं। आभा इनकी पहली रचना थी। इनके अतिरिक्त शास्त्रीजी ने प्रौढ़ शिक्षा, स्वास्थ्य, धर्म, इतिहास, संस्कृति और नैतिक शिक्षा पर कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखी हैं।