साहित्य दृष्टि से ‘गांधी-वध और मैं’ जीवनी,आत्मकथा तथा संस्मरण विधाओं का संगम है। गांधी वध करनेवाले नाथूराम गोडसे के भाई गोपाल गोडसे ने इसे लिखा है। इतिहास की दृष्टि से यह पुस्तक कांग्रेस, गांधी और भारत-विभाजन का ऐतिहासिक विवरण प्रस्तुत करती है। इतिहास की सच्चाई को प्रकट करती है। भारत में प्रचारित झूठे तथा मनगढंत तथ्यों को उजागर करती है।
गांधी जी की हत्या से जुड़ी तमाम रोमांचक बातें इस पुस्तक में दी गई हैं, जिन्हें पढ़कर गांधीजी से घृणा भी की जा सकती है और इसे इस रूप में भी देखा जा सकता है कि. . . प्रार्थना के लिए जाते समय गोडसे की तीन गोलियों ने गांधीजी को नहीं रोका. . . बल्कि गांधीजी ने ही उन तीन गोलियों को रोका, ताकि वे और न फैलें, किसी और पर न पड़ें और घृणा का उसी क्षण अंत हो जाए!
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Indira/इंदिरा
इंदिरा बंकिमचन्द्र का एक अत्यंत लोकप्रिय उपन्यास है। इसमें सुहाग से बिछुड़ी एक नवयौवना की व्यथा भरी कथा है। नारी के जिस पक्ष का चित्रण यहाँ हुआ है, वह अद्वितीय है। इसके अनुवादक श्रीरामनाथ सुमन ने इसे इस शैली में अनुवाद किया है कि पाठक को यह उपन्यास मूलत: हिंदी भाषा में लिखा गया ही प्रतीत होता है।
पाठक का मनोरंजन करने के अलावा, यह उपन्यास पाठक को उस समय के दौरान बंगाल समाज के सामाजिक मानदंडों और परंपराओं के बारे में अद्भुत जानकारी भी देती है, जब किताब लिखी गई थी; प्यार और रिश्तों के बारे में और जिस तरह से समाज उन्हें आकार देता है, यह सब इस उपन्यास में उकेरा गया है।
Isa /ईसा
ईसा, यीशू मसीह या जीजस क्राइस्ट इस्लाम के अजीम तरीन पैगंबरों में से एक हैं और ईसाई धर्म के प्रवर्तक माने जाते हैं। ईसाई लोग उन्हें परमपिता का पुत्र और ईसाई त्रिमूर्ति का तृतीय सदस्य मानते हैं। इसमें बाइबिल के नए नियम भी दिए गए हैं। प्रस्तुत पुस्तक में ईसा की जीवनी के साथ-साथ उनके शुभ संदेशों को भी उत्कृष्ट ढंग से प्रस्तुत किया गया है, ताकि पाठक मानवता के इस मसीहा की जीवन गाथा और संदेश से रू-ब-रू हो सकें। इस पुस्तक की लेखिका लंबे समय तक शिक्षण कार्य से जुड़ी हुई हैं। धर्म और दर्शन पर इनकी अच्छी पकड़ है। यह पुस्तक प्रामाणिक स्रोतों के आधार पर लिखी गई है, इसलिए हर किसी के लिए पठनीय है।
Kab Tak Pukarun/कब तक पुकारूँ
कब तक पुकारूँ रांगेय राघव द्वारा लिखा गया एक अद्भुत पठनीय उपन्यास है। जिसमें राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सीमा से जुड़ा ‘बैर’ एक ग्रामीण क्षेत्र की कहानी कहता है। वहाँ नटों की भी बस्ती है। तत्कालीन जरायम पेशा करनटों की संस्कृति पर आधारित यह एक सफल आँचलिक उपन्यास है।
इस उपन्यास का नायक सुखराम करनट अवैध संबंध पैदा हुआ एक ऐसा व्यक्ति है जिसके लिए सिद्धांतों पर चलना टेढ़ी खीर है। इस उपन्यास की पात्राएँ अवैध संबंधों से पीड़ित लड़कियाँ इतनी मासूम हैं कि नैतिकता क्या है, इसका ज्ञान उन्हें नहीं है। थोड़े से पैसों की खातिर वे कहीं भी चलने को तैयार हो जाती हैं।
Kamal Kumar Ki Yadgri Kahaniyan/कमल कुमार की यादगारी कहानियाँ
कमल कुमार ने अपनी कहानियों में चतुर्दिक बिखरे क्रूर यथार्थ, विडंबनाओं और विसंगतियों के बीच उम्मीद की लौ को भी प्रदीप्त रखा है। आज की अपसंस्कृति और अवमूल्यन के अंधेरे में मानवीय मूल्यों के प्रति विश्वास और संबद्धता की सार्थक अभिव्यक्ति की है। प्रेम, आत्मीयता, अपनत्व और मानवीय बोध को ये कहानियाँ उजागर करती हैं। ये कहानियाँ पात्रों के बहुआयामी और जटिल पक्षों को उभारती हुई उनके गहरे द्वंद्वों, तनावों, संवेदनाओं और जटिल अंतर्संबंधों को जीवंतता के साथ उद्घाटिता करती हैं। कमल के पास बहुत की समर्थ भाषा है। संकेतों, प्रतीकों, और बिंबों में कहने की कलात्मक शैली इस भाषा का विशेष आकर्षण है।
Karbala/कर्बला
कर्बला एक ऐतिहासिक-धार्मिक नाटक है जो 1924 में लिखा गया था। भारत के तेज होते स्वतंत्रता संग्राम में मुंशी प्रेमचंद भारतीय समाज में हिंदू और मुस्लिम वैमनस्य से बेहद चिंतित थे। धर्मिक सामंजस्य स्थापित करने के लिए उन्होंने कर्बला नाटक की रचना की।
इस नाटक और घटना की मूल संवेदना यह है कि मुस्लिम धर्म में भी त्याग, समर्पण और शहादत की भावना को बताना था। इस्लाम धर्म के संस्थापक हजरत मुहम्मद के नवासे हुसैन की शहादत का सजीव व रोमांचक विवरण लिए हुए यह एक ऐतिहासिक नाटक है। इस मार्मिक नाटक में यह दिखाया गया है कि उस काल के मुस्लिम शासकों ने किस प्रकार मानवता प्रेमी, असहायों व निर्बलों की सहायता करने वाले हुसैन को परेशान किया और अमानवीय यातनाएं दे देकर उसका कत्ल कर दिया।
Kashinath/काशीनाथ
काशीनाथ शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय की एक रोचन रचना है। यह एक गरीब लड़के और एक धनी ज़मींदार की लड़की के विवाह के बाद होने वाले टकराव की कहानी है। शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय ने अपने बचपन में ही लिखना शुरू कर दिया था और कोरेल और काशीनाथ जैसी दो कहानियाँ उन्होंने उसी समय लिखी थीं। परंतु काशीनाथ को पढ़ते हुए ऐसा आभास होता है कि यह बचपन में नहीं वरन परिपक्व अवस्था में लिखी गई रचना है। इसमें गाँव के लोगों की ज़िंदगी, उनके संघर्ष और उनके सामने आने वाली मुश्किलों का वर्णन है और साथ ही तत्कालीन बंगाल के सामाजिक जीवन की एक झलक भी मिलती है।
Madhu/मधु
मधु, महान साहित्यकार गुरुदत्त की ऐसी रचना है, जिसे आपातकाल के दौरान प्रतिबंध का दंश झेलना पड़ा था। लेखक को इसके लिए भारी जुर्माना भी भरना पड़ा था और तिहाड़ जेल की सजा काटी वह अलग। लेकिन बाद में कोर्ट में लंबी लड़ाई के बाद इस रचना से प्रतिबंध हटाया गया और अब यह रचना पाठकों के बीच एक बार फिर आ गई है। इस पुस्तक में सामाजिक चेतना की ऐसी प्रेरक एवं संघर्षपूर्ण कहानी है जो हर किसी को चिंतन एवं मंथन करने के लिए विवश कर देती है।
Mahan Hastiyon Ke Hasya Vinod/महान हस्तियों के हास्य-विनोद
विश्व की सैकड़ों महान हस्तियों के शिष्ट हास्य, चुटीली हाजिर-जवाबी से भरपूर यह एक अनूठा संकलन है। यह एक ऐसी पुस्तक है, जो आपका मनोरंजन भी करेगी और सीख भी देगी।
गांधी, नेहरू, टैगोर, तिलक, गोखले, विनोबा भावे, सरदार पटेल, गालिब, सुकरात, टॉल्सटॉय, शेक्सपियर, बर्नार्ड शॉ, नेपोलियन, हिटलर, स्टालिन, अब्राहम लिंकन, चर्चिल, पिकासो, चार्ली चैपलिन, बर्द्रड रसल, मार्क ट्वेन, डार्विन, आइन्सटाइन जैसों के मुख से छलछलाती मीठी-तीखी चुटकियों के दर्शन आपको इस पुस्तक में देखने को मिलेंगे।
Nadi Teere/नदी तीरे
“. . . कभी-कभार पति प्राप्त होता है मुझे और सो भी निचुड़े हुए नीबू की तरह. . .”
“देखो लक्ष्मी!. . . जो जिसके योग्य होता है, उसे वही प्राप्त होता है। निचुड़ा हुआ नीबू कड़वा भी होता है। इसलिए कान खोलकर सुन लो कि अगर तुम अपने-आप मायके नहीं चली जातीं तो मैं तुम्हें धक्के मार-मारकर यहाँ से निकाल दूँगा।”
एक दृढ़ निश्चयी युवती के अनोखे संघर्ष की अद्भुत कहानी। प्रतिष्ठित उपन्यासकार गुरुदत्त का नवीनतम अत्यंत रोचक तथा मर्मभेदी उपन्यास। यह उपन्यास अत्यंत सरल भाषा में लिखा गया है।
