ख़ुद से झूठ तो मत बोलो एक प्रेरणादायक किताब है, जो आत्म-साक्षात्कार और आत्म-विकास पर केंद्रित है। यह किताब हमें यह समझने में मदद करती है कि हम अक्सर अपने जीवन में ख़ुद से झूठ बोलते हैं—जैसे कि हम ख़ुश हैं, हम मज़बूत हैं या हमें किसी बदलाव की ज़रूरत नहीं है। लेखक हमें यह सिखाते हैं कि अपने अंदर की सच्चाई को स्वीकार करना ही असली शक्ति है।
इस किताब में बताया गया है कि कैसे हम सामाजिक अपेक्षाओं, डर और असुरक्षा के चलते एक नकली जीवन जीने लगते हैं। लेखक ईमानदारी, आत्म-जागरूकता और बदलाव के महत्त्व पर ज़ोर देते हैं। वे सरल उदाहरणों और व्यावहारिक सलाह के ज़रिए पाठकों को ख़ुद के प्रति सच्चे रहने की प्रेरणा देते हैं।
ख़ुद से झूठ तो मत बोलो एक ऐसा मार्गदर्शक है, जो आपको अंदर से मज़बूत बनाता है और आत्म-विश्वास से भरा जीवन जीने की दिशा में ले जाता है। यह किताब पढ़कर पाठक ख़ुद को एक नए नज़रिए से देखना शुरू करते हैं।
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Pakistan Ka Safar/पाकिस्तान का सफ़र
महान अभिनेता बलराज साहनी का एकमात्र यात्रा वृत्तांत है — पाकिस्तान का सफ़र।
इस यात्रा वृत्तांत में साहनी ने पाकिस्तान की अपनी रोमांचक यात्रा के बारे में लिखा है।
साहनी जब सारी दुनिया में प्रसिद्ध हो चुके थे, तो उन्हें तब अपना वह घर बहुत याद आने लगा, जिसके आंगन में उनका बचपन बीता था, लेकिन अब वह घर पाकिस्तान में था और साहनी हिंदुस्तानी नागरिक थे। अब वह पाकिस्तानी घर उनका नहीं था, न ही उस घर में उनके कोई संबंधी रहते थे, अब तो वह घर किन्हीं अनजान लोगों का था, उसके मालिक कोई और थे, इसलिए साहनी को उस घर में जाने में संकोच हो रहा था। लेकिन सिकंदर ने साहनी को समझाया कि वह बेकार-से तकल्लुफ़ात का शिकार हो रहा है और नि:संकोच अपने पुराने घर को देखने के लिए उसे पाकिस्तान अवश्य जाना चाहिए।
अपने पुराने घर और बचपन के दोस्तों की गलियों को निहारते हुए साहनी ने जब उस दरवाज़े पर दस्तक दी, जिसके आंगन में उनका बचपन बीता था, तो घर के मालिक ने उन्हें गले से लगा लिया और एक मालिक की तरह उनका स्वागत किया।
Patita Ki Sadhna/पतिता की साधना
सुनती हूँ, तुमने ब्याह न करने की प्रतिज्ञा कर रखी है।’ नंदा के इस वाक्य पर हरि ने अपनी आँखें नीची करके कहा, ‘असल में बात कुछ और ही है।’
नंदा बोली, ‘वही तो मैं जानना चाहती हूँ।’
इस पर हरि ने उसकी ओर दृष्टिक्षेप किया, उससे दोनों के नयन लालसा के आलिंगन में चंचल हो उठे और और हरि ने उसे बाहों में भर लिया।
मनोवैज्ञानिक विश्लेषण के कुशल हिंदी उपन्यासकार भगवतीप्रसाद वाजपेयी ने इस उपन्यास में एक बाल विधवा के दारुण जीवन का ऐसा मार्मिक चित्र अंकित किया है कि पाठक के सामने उस समय के पूरे भारतीय समाज का चित्र उभर आता है।
Phool Khilte Hain/फूल खिलते हैं
पाँच हज़ार रुपए मिल सकते हैं! और घर में एक रुपया आटा लाने को भी नहीं है।’ सविता ने कहा।
‘लेकिन सविता, ईमान इस तरह नहीं बिकता। यही तो हमारे ईमान की परीक्षा की घड़ी है। ऐसी ही घड़ीयों में तो ज़रूरत है चट्टान की तरह मज़बूत खड़े रहने की।’
एक ईममानदार और अहंवादी गरीब लेखक और उसकी सहनशील पत्नी की रूला देने वाली दर्दभरी कहानी है यह।
Prasiddh Vyaktiyon Ke Prem Patra/प्रसिद्ध व्यक्तियों के प्रेम-पत्र
प्रियतम तुम जिओगी और जीती रहेगी, मेरा क्या है, मैं तो जीवन में तुम्हारी परछाई बनकर सदैव इस दुनिया में रहूँगा, भले ही मेरा नश्वर शरीर क्यों न उठ जाए, तब भी मेरे होने का अहसास तुम्हें हमेशा रहेगा।’
संसार में ऐसे बहुत से प्रसिद्ध व्यक्ति हुए, जिन्हें प्रेम हो गया और उस प्रेम की छाया में प्रेमी-प्रेमिका ने परस्पर भाव भीने, रसभीगे और बेहद अंतरंग पत्र लिखे हैं। ये पत्र उनके रिश्तों, उनके विचारों, उनकी संवेदनाओं और उनके जीवन की छोटी-बड़ी घटनाओं के दस्तावेज़ बने गए हैं। इस संग्रह में ऐसे ही अनेक प्रसिद्ध एवं चर्चित लोगों के पत्र दिए गए हैं।
Rag Bhairav/राग भैरव
पिता और पुत्री के बीच कितने भी वैचारिक मतभेद हों, लेकिन रक्त संबंध एवं पूर्व जन्म का ऋणानुबंध होने के कारण वे हमेशा एक-दूसरे से निकट ही रहते हैं. . .अपने तो अपने ही होते हैं का अमर संदेश देने वाला नि:संदेह यह एक कालजयी उपन्यास है’— रांगेय राघव
भैरव बाबू बोले, ‘अरे मैंने देखा कि उस आदमी को छुरा मार दिया! ख़ून से सना छुरा लेकर लड़का उस गली की तरफ भाग गया।’
‘ज़रूरत क्या है आपको इन सब बातों में उलझने की? बूढ़े आदमी हैं आप। यदि पुलिस आकर हमें परेशान करेगी तब क्या होगा?’
विमल मित्र का यह रोचक एवं प्रेरक उपन्यास है, इसमें नई और पुरानी पीढ़ी के टकराव को जीवंत ढंग से उकेरा गया है।
Rajni/रजनी
सुंदरता चेहरे पर लगी दो आँखों से नहीं परखी जाती, वरन सुंदरता तो आत्मा की गहराई से अनुभव की जाती है— यह तथ्य इस उपन्यास को पढ़कर भलीभाँति समझ में आता है’ — टैगोर
बंकिमचन्द्र चटर्जी की पुस्तकें आज भी बड़े चाव से पढ़ी जाती हैं, यही कारण है कि उनके अनुवाद दुनिया की अनेक भाषाओं में हुए हैं।
रजनी बंकिमचन्द्र चटर्जी का एक अत्यंत लोकप्रिय उपन्यास है, इसमें बंकिम ने एक अंधी रमणी की दर्शन करने की व्याकुलता को जैसी सरस साकारता प्रदान की है, वह अन्यत्र दुर्लभ है। इसकी कथा मानव-हृदय की करुणा से इस प्रकार ओत-प्रोत है कि मन मसोस उठता है. . . इसके अनुवादक और संक्षेपकार हैं श्रीरामनाथ ‘सुमन’।
Roz Sawere/रोज़ सवेरे
नरेन्द्र कोहली एक सिद्धहस्त कथाकार थे। उनकी कलम के सरोकार तत्कालीन समाज में जी रहे लोगों की पड़ताल करना था। लोगों के जीवन को समझने और कथात्मक विश्लेषण से तमाम परिस्थितियाँ सामने आती हैं। नरेन्द्र कोहली अपनी कहानियों में समाज में फैली असंगतियों और दारुण व्यथा का सजीव चित्रण करते हैं। ज़रूरत पड़ने पर वे आवश्यक व्यंग्य का सहारा लेने से भी नहीं चूकते और कथा-बिंबों से अपनी सृजनात्मक क्षमा का परिचय भी देते हैं।
नरेन्द्र कोहली जैसे सशक्त उपन्यासकार की श्रेष्ठ कहानियों का यह संकलन सभी पाठकों और शोधकर्ताओं और अध्येताओं के लिए उपयोगी है।
Shekh Shadi: Gulistan / शेख शादी : गुलिस्तां
विश्व विख्यात कवि और चिंतक शेख सादी के उपदेश प्राय: मस्ती और हास्य विनोद के रंग में डूबे हुए होते हैं, परंतु ये इतने तीखे और गहरे होते हैं कि गुदगुदाहट के बावजूद दिल और दिमाग को झनझनाकर रख देते हैं। इस पुस्तक में शेख सादी की अमर कृति गुलिस्तां का सरल हिंदी अनुवाद दिया गया है, साथ ही उनका प्रेरक जीवन परिचय भी इसमें है।
वास्तव में यह पुस्तक अनमोल उपदेशों का ऐसा खजाना है कि इंसान अपनी अच्छाइयों और बुराइयों को ख़ुद जाँच परख सके और अपनी ज़िंदगी के लिए सही रास्तों को चुन सके।
Sthapatyaved/स्थापत्यवेद
स्थापत्यवेद भवन नियोजन तथा निर्माण की विज्ञान-सम्मत कला है। पिछले तीस वर्षों से ज्योतिष और वास्तुशास्त्र के अध्ययन एवं परीक्षण को समर्पित सुधीर पिम्पले आज एक विख्यात नाम है। ज्योतिष और वास्तुशास्त्र एक-दूसरे के पूरक हैं। व्यक्ति के भाग्य का विश्लेषण तमाम तथ्यों के मद्देनजर किया जाना ज़रूरी है, ताकि सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त हो सके। इसी दृष्टिकोण से यह पुस्तक विषय को व्यावहारिक ढंग से वर्तमान प्रचलित आधार पर विश्लेषित करती है। वास्तुशास्त्र का प्राचीन महान ग्रंथ समरांगण सूत्रधार इस प्रस्तुति का मुख्य आधार है, पर स्थापत्यवेद में सुधीर पिम्पले के अनुभवों, प्रयोगों और अध्ययनों का निचोड़ भी है।
