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Apradhi/अपराधी

अपराधी एक ऐसा उपन्यास है, जिसमें पराधीन काल में पुलिस द्वारा रस्सी का साँप बनाए जाने की गाथा उकेरी गई है। यह ठाकुरों के जमाने की कहानी है। इसमें ठाकुरों की ईर्ष्या, द्वेष का भी चित्रण है और पुलिस की मनमानी और सज्जन आदमी को भी अपराधी ठहराने के हथकंडों की दास्तान है। यह पुस्तक रोंगटे खड़े कर देने वाली ऐसी कहानी बयां करती है, जिसे पढ़कर हर कोई सिहर उठेगा। लेकिन एक बार पढ़ना शुरू करेगा तो पाठक इसे पढ़कर ही दम लेगा।

Begane Ghar Mein/बेगाने घर में

मंजुल भगत की इस कृति में तीन लघु उपन्यास संग्रहीत हैं—बेगाने घर में, लेडीज़ क्लब और टूटा हुआ इंद्रधनुष।
नई ज़मीन पर लिखे गए सशक्त उपन्यास बेगाने घर में को पढ़ते हुए अनुभव होगा कि एकाकीपन से उपजी पीड़ा धनहीनता की पीड़ा से कहीं अधिक कष्टकर है।
लेडीज़ क्लब सामयिक परिस्थितियों में उभरा एक सामाजिक व्यंग्य है। इसमें दोहरेपन को जीते लोग हैं और उनके खोखले आदर्श हैं। परिस्थितियों की विषमताओं से उत्पन्न कुंठा व संत्रास है।
टूटा हुआ इंद्रधनुष जीवन और उसके सत्यासत्यमूलक पहलुओं पर विचार करता है। इस उपन्यास में शरीर की वास्तविकता, जन्म और यौवन, क्षणिक अनुभूति की महत्ता प्रतिपादित की गई है।

Chhoti Si Baat/छोटी सी बात

‘छोटी-सी बात’ रांगेय राघव का अत्यंत लोकप्रिय एवं पठनीय उपन्यास है। कलेवर में भले ही यह लघु है परंतु अपने कथ्य में अत्यंत विराट है। कुल मिलाकर यह उपन्यास एक जीवंत दस्तावेज़ है।
पत्र शैली में लिखा गया यह उपन्यास नारी एवं पुरुष के संबंधों पर एक नए दृष्टिकोण से सोचने को विवश करता है। यह एक अत्यंत रोचक उपन्यास है। इस पर एक टेलीफिल्म का निर्माण भी हो चुका है।

Dasta Ke Naye Rup/दास्ता के नए रुप

‘दासता के नए रूप’ में उपन्यासकार ने स्वातंत्र्योपलब्धि के अनंतर देशवासियों की दास मनोवृत्ति और पतित आचरण का विश्लेषण किया है। इस दिशा में उनकी यह अत्यंत सफल अभिव्यक्ति कही जा सकती है। उनका कहना है कि सत्ताधीश लोग मनुष्य को दासता की शृंखलाओं में बाँधने का यत्न करते रहे हैं। राजनीतिक सत्ता अथवा आर्थिक व सामाजिक प्रभुत्व प्राप्त करके लोग अन्य मनुष्यों को अपनी सत्ता प्रभाव के अधीन रखने के लिए अनेकानेक प्रकारों का प्रयोग करते हैं। ये दासता उत्पन्न करने के उपाय हैं।

Dhoop Chhanw/धूप छांव

यह उपन्यास जीवन के उजले और अंधेरे पक्ष को आधार बनाकर लिखा गया है। जीवन में दिन हमेशा एक जैसे नहीं रहते, कभी ख़ुशी तो कभी गम भी झेलना पड़ता है। जीवन इसी का नाम है। कोई कितना भी धनी हो, वह भी दुखों और चिंता की चपेट में आता है और कोई कितना भी निर्धन हो, वह भी सुखी पलों में मुस्कराता है। जीवन की यही सच्चाई है और इसी सच्चाई का चित्रण इस उपन्यास में किया गया है। यह उपन्यास बेहद ही रोचक एवं मार्मिक है।

Dibiya Chandi Ki/डिबिया चाँदी की

उमा त्रिलोक की इन कहानियों को पढ़कर अहसास होता है कि ये तो अपने आसपास के पात्रों पर ही आधारित हैं। इन कहानियों की भाषा एवं शैली अत्यंत प्रभावशाली है और भाषा का मिठास भी अपनी ही वाणी जैसा नजर आता है। निस्संदेह ये कहानियाँ मनोरंजन के साथ-साथ पाठक को कल्पनालोक में भी ले जाती हैं और भावनाओं के भंवर में भी गोते लगवाती हैं। कुल मिलाकर ये कहानियाँ हरेक उम्र के पाठक के लिए पठनीय ही नहीं वरन संग्रह करने योग्य भी हैं।

Dilli Ke Dangal Mein/दिल्ली के दंगल में

निर्भय हाथरसी बहुत ही प्रतिभाशाली कवि थे। मंच पर वे बिना लिखे ही कविता पढ़ते थे। लेकिन वे मंचों पर अपनी बेलाग बेबाक तथा कटाक्षपूर्ण टिप्पणियों के लिए भी प्रसिद्ध थे। इस संग्रह में उनकी ऐसी कविताएँ हैं, जो उन्होंने मंचों पर सीधे पढ़ी और बाद में लिखी। निर्भय हाथरसी की हास्य कविता ‘मारे गए मलखान दिल्ली के दंगल में. . .सिंडीकेट मैदान दिल्ली के दंगल में।’ एक ऐसी कविता है, जिसका पाठ विदेशों तक में आज भी होता है। कविताओं का यह संकलन अपने आप में अद्भुत है, इसमें हास्य कविताएँ भी हैं, तो व्यंग्य भी हैं और साथ ही कटाक्ष भी इन कविताओं में देखा जा सकता है। राजनीति और देश की आबोहवा को भी ये कविताएँ रेखांकित करती हैं।

Gaban/गबन

संसार के अग्रणी कथाकारों में प्रतिष्‍ठित उपन्यास-सम्राट प्रेमंचद ने गबन में टूटते मूल्यों के अंधेरे में भटकते मध्यवर्ग का वास्तविक चित्रण किया है।
यह रमानाथ की कहानी है, जो सुंदर, सुख-सुविधा चाहने वाला, घमंडी और नैतिक रूप से कमज़ोर है। वह अपनी पत्नी जलपा को ख़ुश करने के लिए उसे गहने उपहार में देने की कोशिश करता है, जिसे वह अपनी कम तनख्वाह से नहीं खरीद सकता, कर्ज में डूब जाता है, जो अंततः उसे गबन करने पर मजबूर करता है।
गबन का मूल संदेश है कि इंसान को अपनी हैसियत के मुताबिक ही अपनी ज़रूरतों को पूरा करना चाहिए। उसका एक गलत कदम कई ज़िंदगियों को प्रभावित करता है। उपन्यास के नायक-नायिका रमानाथ, जलपा के साथ रतन, देवीदीन, जौहरा, वकील साहब आदि पात्रों का विश्लेषण भी किया गया।

Gandhari/गांधारी

गांधार एक छोटा-सा राज्य था, जिसके शासक थे महाराजा सुबल। उन्हीं की सुंदर पुत्री गांधारी सुदूर हस्तिनापुर के राजमहल में बहू बनकर आई और आते ही उस नवयौवना नवविवाहिता के सारे सपने उस समय चकनाचूर हो गए, जब उसने अपने सपनों के सम्राट चक्षुहीन धृतराष्ट्र को पराश्रित पाया। उसे भी जीवन-भर आँखों पर पट्टी बाँधनी पड़ी और अपने को ठगा-सा महसूस किया। इस उपन्यास में कहीं वह एक असहाय स्त्री लगती है, तो कहीं शक्ति संपन्न माँ, जो कूटजाल में व्यस्त पुत्र पर बौखला उठती हैं। हस्तिनापुर की दीवारें बड़ी मोटी और अभेद्य पत्थरों से बनी हुई थीं, किंतु इतनी भी अभेद्य नहीं थीं कि गांधारी जैसी नारी की मानवीय संवेदनाएँ उसमें समा जातीं; उन्हीं संवेदनाओं का आत्मकथात्मक शैली में जीवंत वर्णन है इस रचना में, जो आपको सीधा महाभारत के युग में ले जाकर खड़ा कर देगा।

Hadtal Kal Hogi/हड़ताल कल होगी

मॉरिशस के प्रतिभावान कथाकार अभिमन्यु अनत ने आधुनिक हिंदी कथा-साहित्य में अपना विशिष्ट स्थान बना लिया है। उनका यह उपन्यास उनके साहित्यिक व्यक्तित्व को नया आयाम प्रदान करता है।
उपन्यास का नायक अमित भावुक है, चिंतक है, मजदूरों का नेता है। अमीर-गरीब के बाहर-भीतर के फासले से वह तिलमिला उठता है। मजदूर डेढ़ सौ साल बाद भी मजदूर ही है—एक बहुत बड़ी गोलाई की यात्रा, जहाँ आदमी वहीं लौट आता है, जहाँ से यात्रा शुरू करता है।
अमित के जीवन की विडंबना यह है कि जिसे प्यार करता है, उसी के पिता से गहरी जंग छेड़ रखी है।
एक सशक्त उपन्यास जो बार-बार सोचने पर बाध्य करता है कि इस दुनिया में हमारी कोई हस्ती क्यों नहीं है?

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