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Tulsidas/तुलसीदास

परहित बस जिन्ह के मन माहीं। तिन्ह कहुं जग दुर्लभ कछु नाहीं।। (जिनके मन में सदा दूसरों की भलाई का विचार रहता है, उन्हें संसार में कोई भी वस्तु दुर्लभ नहीं होती है।) ‘रामचरित’ के अमर गायक महाकवि तुलसीदास चार शताब्दियों से भारतीय जनमानस में श्रद्धा-पुरुष की तरह विराजते रहे और आगे भी युग-युगों तक गोस्वामी जी और उनकी रचनाएँ चिरस्मरणीय रहेंगी। यह पुस्तक हिन्दी के उन्हीं भक्त कवि गोस्वामी तुलसीदास के जीवन-परिचय, लोकप्रिय दोहों-चौपाइयों तथा अन्य काव्य-महिमा को अपने में समेटे हुए है। इस संकलन का संपादन प्रसिद्ध लेखक सुदर्शन चोपड़ा ने किया है तथा काव्य-खंड का चयन और टीका तुलसी-साहित्य के मर्मज्ञ पीएस भाकुनी ने की है। 

Aabha/आभा

लौह-लेखनी के धनी आचार्य चतुरसेन शास्त्री का यह उपन्यास असाधारण परिस्थितियों में फँसी आधुनिक नारी की करुण गाथा है। इस रोमांटिक उपन्यास में लेखक ने स्त्री-पुरुष संबंधों का बहुत ही मार्मिकता से उद्घाटन किया है।
वरदान और अभिशाप के बीच झूलती नारी अपना संतुलन खो बैठती है और ऐसे घटनाचक्र से होकर गुज़रती है, जिसके लिए वह बिलकुल तैयार न थी। आभा में उसके मोह भंग की कहानी पढ़ने को मिलेगी।
लेखक ने इस उपन्यास में चरित्रों को असाधारण परिस्थितियों में रखकर जैसा विश्लेषण किया है, उससे पाठक प्रभावित हुए बिना नहीं रहेंगे। साथ ही पढ़िए पति-पत्नी के बीच अनूठे संघर्ष की मर्मस्पर्शी कहानी ‘द्वंद्व।’ 

Aakhiri Aawaaz/आखिरी आवाज़

रांगेय राघव के सामाजिक उपन्यासों में यह उनका अंतिम उपन्यास है। इसमें स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद बदलते हुए ग्राम्य-जीवन का चित्रण है। देहाती जीवन की दलबंदी, मुकदमेबाज़ी, भ्रष्टाचार और राजनीति संबंधी अनेक घटनाएँ हैं, जिन्हें बड़े विस्तार और रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। कई आलोचकों ने इस उपन्यास को प्रेमचंद की परंपरा से भी जोड़ा है। हिरदेराम मुख्य प्रभावी पात्र है जो ग्रामीण जीवन का प्रतिनिधित्व करता है। गोविन्द दुश्चरित्र व्यक्ति है। नारी पात्रों में निहाल कौर निर्लज्ज, चरित्रहीन युवती है। चंपा, चमेली भी ऐसी ही हैं जो शारीरिक संबंध बनाने में बहुत तेज झलक भी मिलती है। कथोपकथन व्यंव्यंग्यात्मक शैली में है। लेकिन इस उपन्यास की लेखन परिपक्वता अपने आप में बेजोड़ है। 

Adbhut Brahmand/अद्भुत ब्रह्मांड

“क्या आप जानते हैं—
• कि जिस धरती पर हम शांतिपूर्वक और स्थिरता से रहते हैं, वह खुद जरा भी शांत और
स्थिर नहीं रहती और 1,00,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सूर्य का चक्कर लगाती
रहती है?
• कि मानव-निर्मित सबसे तेज गति के यान से भी बहुत तेज गति से यह पृथ्वी रूपी यान
365 दिनों में सूर्य का एक चक्कर लगाता है और हमें इसका ज़रा भी अहसास नहीं होता?
• कि इसी के साथ यह धरती 1,669.8 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से अपनी धुरी पर
भी घूमती रहती है और उसी से दिन और रात बनते हैं?
• कि सूर्य भी एक तारा है और हमारी आकाशगंगा में उस जैसे 200 अरब से ज़्यादा तारे और
10 खरब से ज़्यादा ग्रह हैं?
• कि हमारा सौरमंडल हमारी जिस आकाशगंगा का सदस्य है, वह खुद भी आकाशगंगाओं के
एक लोकल ग्रुप की सदस्य है और वह लोकल ग्रुप भी अपने से बड़े किसी समूह का सदस्य
है, और यह सिलसिला इसी तरह जारी है?
ऐसी ही अद्भुत जानकारी देती है यह पुस्तक।” 

Adhura Sapna/अधुरा सपना

“कोमल के प्यार की कली अपने प्रेमेरी के सुखद स्पर्श से सहसा फूल बनकर खिल उठी। कोमल ने देखा कि उसका चहेता अतीत को काली-अंधियारी घड़ियों को सच्चे दिल से भुलाकर, उसे वरना चाहता है। बस, उसके अंतर के अमिट अंधकार में खुशियों के सैकड़ों सूरज एक साथ चमक उठे। वह जीने की लालसा से भर गई और प्रिय के लिए अपने हृदय में प्रणय की सेज सजाने लगी!
एक ऐसी सुकुमारी की रोमांटिक कहानी, जो ठगी गई—कभी पुरुष के हाथों, कभी भाग्य के हाथों।
लेखक धर्मवीर कपूर का एक बहुचर्चित उपन्यास।” 

Albert Einstein/ऐल्बर्ट आइंस्टीन

आइंस्टाइन को थ्योरिटिकल फ़िज़िक्स का महान वैज्ञानिक, आधुनिक भौतिक विज्ञान का पितृपुरुष, एक विलक्षण गणितज्ञ, प्रतिभा और मेधा का पर्यायटा्टय तथा मिस्टर रिलेटिविटी कहकर सम्मानित किया जाता है। बाद में तो लोग उन्हें अंतरिक्ष का बाशिंदा और जीवश्म तक कहने लगे।
वे परम ज्ञानी और प्रखर वक्ता भी थे। जब भी वे बोले, तो गणित, विज्ञान, ब्रह्मांड, दर्शन, गॉड, राजनीति सभी पर बोले। उन्होंने विज्ञान के जितने भी सिद्धांत दिए, सभी को दूसरों से प्रमाणित करवा कर लोहा मनवाया। यहाँ तक कि E = mc2 की विनाशक शक्ति का भी सत्यापन कराया।
इसी सूत्र के कारण परमाणु बम बना, लेकिन विरोधाभास देखिए कि विश्व शांति के लिए ज़ोर-शोर से लगे रहे। बचपन का यह बुद्ध बालक नोबल पुरस्कार से नवाज़ा गया। वह गैलीलियो और न्यूटन जैसे वैज्ञानिकों के बराबर माने गए और सादगी में गांधी से दो कदम आगे। 

Anubhav/अनुभव

पति में प्रेमी का रूप देखने की तड़प लिए हुए एक युवती की मर्मस्पर्शी कहानी। एक ऊँची साहित्यिक कृति पर बनी एक शानदार तथा सफल फिल्म की सचित्र स्क्रिप्ट। यह पटकथा पाठक को ऐसा अहसास कराती है जैसे की वह सिनेमा हाल में बैठा फिल्म ही देख रहा है। इस पुस्तक में फिल्म के कुछ रियल फोटो भी दिए गए हैं। वास्तव में शोधार्थियों, फिल्मों शौकीनों और आम पाठकों के लिए यह पुस्तक एक दस्तावेज़ की तरह है। 

Dastavez/दस्तावेज़

‘ज़िंदगी के दुःख-सुख, अपने और मेरे,
दो नदियों की तरह मिल जाने दो! और फिर जैसे
पानी में लकीर नहीं पड़ती, तुम्हारे-मेरे अस्तित्व
में भी कोई लकीर न खींची जा सके।’
— अमृता प्रीतम
इस संकलन में अमृता प्रीतम के प्रेम पत्र संकलित किए गए हैं। ये प्रेमपंत्र केवल प्रेम की पींगे ही नहीं हैं, वरन इनमें समाज, काल और संस्कार भी रेखांकित किए गए हैं। युवा पीढ़ी के लिए प्रेरक भी और मार्गदर्शक भी हो सकती है यह पुस्तक। साहित्य जगत में इन पत्रों का बेहद उच्च स्थान है। 

Be Better Than Your BS: How Radical Acceptance Empowers Authenticity and Creates a Workplace Culture of Inclusion

A book on DEI in the workplace that speaks not only to executives but to employees at all levels of a company, by award-winning diversity consultant Risha Grant.

DEI consultant and corporate speaker, Risha Grant, shares her practice of learning how to welcome and embrace people’s full humanity, without BS, full stop. What’s BS? It’s bullshit for sure, but more specifically it’s the powerful and often invisible belief systems we’ve been steeped in since birth—the judgment and bias we carry with us that impact our own lives and the many others we encounter every day. Risha teaches us about the inner work and the outer work we need to do to dismantle our “biasphere,” and change how we see ourselves and how we interact with others. The more people are willing to acknowledge and address the biases inherent in their belief systems, the more those biases will dissipate and the better our work environments will become.

Readers will learn how to:

• Recognize when your BS manifests as “isms” and phobias that follow you to work
• Cure scarcity mentality, a damaging byproduct of fear
• Validate other people’s experiences
• Become a real ally
• Engage in micro efforts that can effect change on a macro level
• Create an environment that fosters a sense of belonging for everybody; that is, “get in where you fit in”
• Abolish groupthink and create space for diverse ideas
• Design explicit feedback channels
• Generate truly inclusive policies that people can trust
• Spot and stop bullying (it doesn’t always look the way you think it does)
• Understand that equality isn’t equity; the difference leads to everyone getting what they need

It All Makes Sense Now: Embrace Your ADHD Brain to Live a Creative and Colorful Life

From the personal and coaching experience of an ADHDer, actionable tools and techniques to understand your ADHD brain and unlock life’s possibilities.

Do you often feel that your emotions are intense and difficult to regulate? Does boredom get to you seemingly more than most? Do you struggle with your perception of time?

You’re not alone. As cultural and medical awareness around ADHD shifts, millions of adults who are diagnosed with ADHD are unclear on the many ways ADHD symptoms present and how it affects the experience of their everyday life.

Meredith Carder, an ADHD coach and ADHDer herself, shares real-life stories from her coaching practice and own lived experience along with actionable exercises and strategies to help you:

• Harness the power of self-compassion and self-awareness to embrace your unique brain
• Build your own toolkit of daily habits to prevent boredom and burnout
• Rate your level of focus and plan your energy accordingly
• Learn to appreciate your ADHD brain and empower yourself to live a life rich with interest

By learning more about the way your mind works, you too can rewrite your inner dialogue and fully realize the life you want to live.

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