Wafadari Imaandari Zimmedari, translated as ‘loyalty, integrity and responsibility’, is more loaded than this rendition.
What are these qualities?
Are these attributes in-built in a leader?
Or are they inculcated and polished over the years?
And, who is a genuine leader?
Centred on the concept of ‘Leadership’, be it on the battlefield or in a corporate boardroom, this book opens a window to the qualities that make an ordinary person extraordinary, capable of handling and overcoming adversity in all its forms. With anecdotes extracted from real events in the army, in environments of war and terrorism, this book’s primary focus is on informed and prudent responses to all circumstances. It showcases how individuals caught in grave situations, be it in the army or a professional space in their daily life, can combine the learnings from their intensive training with presence of mind and ingenuity of thought to conquer obstacles, emerging as true leaders in the process.
Inspirational, anecdotal and unputdownable, Wafadari Imaandari Zimmedari is an essential read for anyone navigating life’s challenges, striving to succeed in their work, or seeking to overcome difficulties in their daily lives.
चंचल चमकने वाली बिजली पृथ्वी-तल से थोड़े ही निकला करती है, अर्थात उत्तम वस्तु की उत्पत्ति उच्च स्थान से ही होती है।’— कालिदास
यह कहा था कालिदास ने, जो उन्हीं पर लागू होता है। सचमुच वह ऐसे ही स्थान से आए और बिजली की तरह सारे संसार में चमके। कालिदास की विश्व के महान कवियों में गिनती होती है। उनकी रचनाओं से दुनिया-भर के करोड़ों पाठक परिचित हैं, जिनका अनुवाद अनेक भाषाओं में हुआ। उन्हीं के जीवन और रचनाओं पर आधारित उपन्यास है यह।
कहते हैं, वे चरवाहा थे और इतने भोले थे कि जिस शाखा पर बैठे, उसी को काटने लगे, तो उन्हें महामूर्ख कह दिया गया। पत्नी को इसके बारे में पता चला, तो उन्हें बुरी तरह प्रताड़ित किया और घर से भी निकाल दिया। हताश-निराश कालिदास आख़िर करते, तो क्या? लेकिन जब उन्हें कालीदेवी का वरदान मिला और वे सचमुच विद्वान बन गए, तो सारा संसार चकित रह गया।
कुछ लड़कियाँ भी तो लाल मिर्च जैसी होती हैं! उसे भी लाल मिर्च जैसी लड़कियाँ पसंद थीं।
उसने अपने जीवन के कई अमूल्य वर्ष लाल मिर्च जैसी लड़की की खोज में बिता दिया—पर उसे वह न मिली। और जब वह उसे मिली तो ऐसा अनुभव हुआ मानो उसकी आँखों में किसी ने लाल मिर्च पीसकर झोंक दी हो। यह है लाल मिर्च की कहानी।
मोरारजी देसाई भारत के स्वाधीनता सेनानी, राजनेता और देश के चौथे प्रधानमंत्री थे। वे प्रथम प्रधानमंत्री थे, जो डुमरमा और लक्ष्मीपुर के निवासी थे। वही एकमात्र व्यक्ति हैं, जिन्हें भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न एवं पाकिस्तान के सर्वोच्च सम्मान निशान-ए-पाकिस्तान से सम्मानित किया गया था।
वे 81 वर्ष की आयु में प्रधानमंत्री बने थे। इसके पूर्व कई बार उन्होंने प्रधानमंत्री बनने की कोशिश की परंतु असफल रहे। लेकिन ऐसा नहीं हैं कि मोरारजी प्रधानमंत्री बनने के योग्य नहीं थे। वस्तुत: वे दुर्भाग्यशाली रहे कि वरिष्ठतम नेता होने के बावजूद उन्हें पंडित नेहरू और लालबहादुर शास्त्री के निधन के बाद भी प्रधानमंत्री नहीं बनाया गया। मोरारजी देसाई मार्च 1977 में देश के प्रधानमंत्री बने लेकिन प्रधानमंत्री के रूप में इनका कार्यकाल पूर्ण नहीं हो पाया। चौधरी चरण सिंह से मतभेदों के चलते उन्हें प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा। इस पुस्तक में उनकी प्रामाणिक जीवनी दी गई है।
लता गुजराती के आठ प्रसिद्ध लेखकों का सम्मिलित रूप से लिखा एक उपन्यास है। ये सभी लेखक जाने-माने और अपनी-अपनी शैली के माहिर हैं। लता में दो पुरुषों के स्नेह-सूत्रों में बंधी एक नारी की कहानी है—बहुत करुण, बहुत मार्मिक!
इस कथा को आठ कोणों से आठ लेखकों ने, आठ मनस्थितियों से लिखा है। यह अद्भुत प्रयोग निश्चय ही पाठकों को बहुत पसंद आएगा। मूल रूप से यह उपन्यास गुजराती में लिखा गया था। हिंदी में इसके अनुवादक हैं श्री परदेसी। अनुवादक ने इसे इस प्रकार अनुवादित किया है कि यह उपन्यास भाषा की दृष्टि से हिंदी में लिखा गया ही प्रतीत होता है।
विश्व के महान कथा-शिल्पी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी मुक्तिधन ‘गौ’ से जुड़ी हुई है। लाला दाऊदयाल ने एक ज़रूरतमंद मुसलमान से एक गाय खरीदी, लेकिन विधि का विधान ही ऐसा निकला कि उस मुसलमान सज्जन को बार-बार रुपयों की ज़रूरत पड़ी तो, उसने सूद पर लाला दाऊदयाल से ही हर बार पैसे लिए, लेकिन कभी चुका न पाया, लेकिन अंत में दाऊदयाल ने उस मुस्लिम सज्जन का कर्ज यह कहकर माफ कर दिया कि ‘मैं ही तुम्हारा कर्जदार हूँ, क्योंकि तुम्हारी गाय मेरे पास है और गाय ने कर्ज के धन से अधिक दूध दिया है और बछड़े नफ़े में अलग।’ यह कथा मज़बूरी का फ़ायदा न उठाने की प्रेरणा देती है।
इसी के साथ इसमें प्रेमचंद की अन्य श्रेष्ठ कहानियाँ भी दी गई हैं, जो प्रेरक भी हैं और रोचक भी।
कथा सम्राट के गौरव से विभूषित संसार के अग्रणी कथाकारों में प्रतिष्ठित प्रेमचंद की कहानियों का यह खंड संपूर्ण रूप से मूल पाठ है।
इतिहास इतिहास के पृष्ठों पर लिखा जाने से बहुत देर पहले कुछ लोगों की देह पर लिखा जाता है। ऐसा मानना है दलीप कौर टिवाणा जी का। इसलिए उन्होंने अपनी यह आत्मकथा उन्हीं लोगों को समर्पित की है जो अपनी देह पर इतिहास का लिखा जाना झेलते हैं। इस पुस्तक में लेखिका ने अपने जीवन की तमाम अनछुई बातों का बेबाकी से चित्रण किया है। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज एवं साहित्य को समर्पित कर दिया, जिसके लिए उन्हें जीवन संघर्ष की राह पर अनेक कष्ट भोगने पड़े, जिन सबका चित्रण इस पुस्तक में दिया गया है।
हिंदी पाठकों की सुपरिचित लेखिका मालती जोशी मध्यवर्गीय परिवार से हैं। अपने घर-आंगन से, पास-पड़ोस से कथाबीज उठाकर वे कल्पना का रंग देती हैं। इसीलिए उनकी रचनाएँ परिवार के इर्द-गिर्द घूमती हैं। उनकी रचनाओं को पढ़कर हरेक घटना अपने आसपास ही घटी हुई प्रतीत होती है।
पटाक्षेप चिंताओं और जीवन की सचाइयों से संबंधित सशक्त साहित्यिक कृति तो है ही, साथ ही अत्यंत रोचक भी है। यह रचना समाज की सच्चाई को एक दर्पण की तरह दिखाने में पूरी तरह सक्षम है।
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता अर्थात जिस कुल में स्त्रियों का आदर है वहाँ देवता प्रसन्न रहते हैं। इस प्रकार शास्त्रों में नारी की महिमा बताई गई है। भारतीय समाज में नारी का एक विशिष्ट व गौरवपूर्ण स्थान है। लेकिन आजकल के समाज में ऐसा नहीं है। आजकल कहीं वीरान स्थल पर नारी मिल जाए तो किसी रक्षक को भी भक्षक बनने में देर नहीं लगती। लेकिन चरित्र और मर्यादा के बल पर नारी निसंदेह नारायणी का रूप भी धारण करके भक्षक को रक्षक बनाने में सक्षम हो सकती है।
तीन-तीन नारी-विरोधी पुरुषों को अलग-अलग ढंग से वश में करके सही मार्ग पर लाने वाली एक युवती के साहसपूर्ण कृत्यों की सरस कहानी, जिसे प्रस्तुत किया है लोकप्रिय उपन्यासकार धर्मवीर कपूर ने।
इस पुस्तक में ज्योतिष विज्ञान और ब्रह्मांड की रचना के परस्पर संबंधों का बहुत ही ख़ूबसूरती से उद्घाटन किया गया है। इसमें अत्यंत गहन रूप में देश-काल में व्याप्त चेतना के प्रवाह का वर्णन किया गया है। इससे स्पष्ट होता है लेखक को विषय की कितनी गहरी समझ है– डॉ. मुरली मनोहर जोशी, संसद सदस्य और पूर्व केंद्रीय मंत्री
प्लैनेटरी मैडिटेशन में बहुत ही सरल ढंग से समझाया गया है कि ग्रहों की स्थितियाँ किस तरह से हमारे जीवन को स्वरूप प्रदान करती हैं और हमें ज्ञान, शांति और विवेक से समृद्ध करती हैं। इसमें नक्षत्र-मैडिटेशन की एक ऐसी ध्यान-विधि को उद्घाटित किया गया है, जिसकी पहले कल्पना भी नहीं की गई थी। इससे स्पष्ट होता है कि जिस नक्षत्र में व्यक्ति का जन्म होता है, उसके देवता से जुड़कर ही वह सत्, चित् और आनंद की अवस्था को प्राप्त कर सकता है।