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Pragati Ke Path Par/प्रगति के पथ पर

प्रगति के पथ पर गुरुदत्त का एक लोकप्रिय सामाजिक उपन्यास है, जिसमें सामाजिक बुराइयों पर कड़ा प्रहार करते हुए देश की एकता का संदेश दिया गया है। ग्रामीण भारत में सदियों से चली आ रही सामाजिक बुराइयों को केंद्र में रखते हुए इस उपन्यास का ताना बाना इस प्रकार बुना गया है कि पाठकों को लगता है कि देश को तोड़ने की नहीं जोड़ने की जरूरत है, इसलिए अंतर्जातीय विवाह को प्रोत्साहन देकर जाति प्रथा का समूल विनाश कर देना चाहिए।
समाज में राजनीतिक से लेकर आर्थिक तक के कई मुद्दों को पड़ताल करने वाला यह एक काल्पनिक उपन्यास है। लिंग, जाति, या वर्ग पूर्वाग्रह जैसी सामाजिक समस्याओं को पात्रों पर पड़ने वाले प्रभाव के ज़रिए इसमें इस प्रकार रेखांकित किया गया है पाठक एक बार पढ़ना शुरू करे तो वह इसे पूरा पढ़कर ही दम लेगा।

Prakritik Chikitsa/प्राकृतिक चिकित्सा

पूर्ण रूप से स्वस्थ रहने और रोगों को जड़ से नष्ट करने का एकमात्र उपाय है—प्राकृतिक चिकित्सा। इस पद्धति को आज हमारे देश में ही नहीं विदेशों में भी व्यापक मान्यता मिली है। लोगों में प्राकृतिक संसाधनों द्वारा स्वस्थ रहने केप्रति गहरी रुचि है।
प्रस्तुत पुस्तक के लेखक धर्मचन्द सरावगी ने अपने जीवन का अधिकांश समय प्राकृतिक चिकित्सा के अध्ययन और अनुसंधान में लगाया। उनके लंबे अनुभव का सार है—प्राकृतिक चिकित्सा। जिसके पास भी यह पुस्तक रहेगी और वह इसका अनुसरण करता रहेगा, उसे डॉक्टर की कभी आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

Prema/प्रेमा

• विश्व के महान कथा-शिल्पी प्रेमचंद का प्रारंभिक उपन्यास है—प्रेमा। विधवा जीवन की ज्वलंत समस्या को सशक्त ढंग से उठाने में सक्षम यह कथा विधवा विवाह की पक्षधर है।
• इसमें नायक सहसा ही समाज सुधार का बीड़ा उठाकर प्रेमा के साथ विवाह करने का वचन भंग कर देता है, जिससे विरोध की विचित्र स्थितियाँ उत्पन्न हो जाती हैं।
• यहाँ भी प्रेमचंद का तीखा विरोध उन शक्तियों के प्रति है, जो धर्म के नाम पर पाखंडों में डूबी हैं।
• इसी के साथ प्रेमा का पूर्व उर्दू-रूप ‘हमखुर्मा व हमसवाब’ भी दिया गया है। यहाँ इसे प्रस्तुत करने का वास्तविक कारण यह है कि प्रेमचंद साहित्य के अध्येता दोनों रूपों का अध्ययन कर प्रेमचंद की कथाधर्मिता को समझ-परख सकें।
• उपन्यास सम्राट के गौरव से विभूषित संसार के अग्रणी कथाकारों में प्रतिष्ठित प्रेमचंद की ये कृतियां सम्पूर्ण रूप में प्रामाणिक मूल पाठ हैं।

Pushpgandha/पुष्पगंधा

मन और देह-दोनों अलग-अलग कैसे बातें कर पाते हैं . . .’ क्या आपने सोचा है कभी? एक यह शोभना है, प्यासी अतृप्त और सपनीली।. . . और एक है यह उदयन, एक है उमाकान्त; एक है श्रीमोहन और एक है कामेश्वर राय। लेकिन नहीं, यह प्यासी शोभना तो एक तट चाहती थी—तट पर खड़ी पुष्प बिखराते-बिखराते स्वयं बिखर जाने वाली पुष्पगंधा तो वह नहीं थी. . .
एक ऐसे अद्भुत नारी-मन की अन्तरंग कथा है पुष्पगंधा, जिसकी सुगन्ध आपको मोह लेगी . . .सुप्रसिद्ध उपन्यासकार भगवतीप्रसाद वाजपेयी का यह एक सशक्त उपन्यास है!

Rajyabhishek/राज्याभिषेक

प्रभो! राक्षसकुल-निधि रावण आपसे यह भिक्षा माँगता है कि आप सात दिन तक वैरभाव त्यागकर सैन्य सहित विश्राम करें। राजा अपने पुत्र की यथाविधि क्रिया करना चाहता है। वीर विपक्षी वीर का सदा सत्कार करते हैं। हे, बली। आपके बाहुबल मे वीरयोनि स्वर्णलंका अब वीर शून्य हो गई है। विधाता आपके अनुकूल है और राक्षसकुल विपत्तिग्रस्त है, इसलिए आप रावण का मनोरथ पूर्ण करें।’
• महाबली रावण दीन-हीन सा हो उठा था पुत्र मेघनाद के मरने के बाद। वह राक्षसराज, जिसकी हुंकार से दिशाएँ थर्राती थीं रामभद्र के पास किसी याचक की तरह यह प्रार्थना भिजवाई थी ।
• आचार्य जी का यह प्रसिद्ध उपन्यास राम द्वारा लंका पर चढ़ाई से प्रारंभ होता है और सीता के भू प्रवेश तक चलता है। इसकी एक-एक पंक्ति, एक-एक दृश्य ऐसा जीवंत है कि पाठक को बरबस लगता है कि वह स्वयं उसी युग में जी रहा है।

The Jannayak Karpoori Thakur (Hindi)/ Karpuri Thakur/कर्पुरी ठाकुर

जननायक कर्पूरी ठाकुर पुस्तक बिहार के महान नेता कर्पूरी ठाकुर के जीवन और विचारधारा पर आधारित है। यह उनके संघर्ष, सादगी और समाज के प्रति उनकी निस्वार्थ सेवा को दर्शाती है। पुस्तक उनके समाजवादी दृष्टिकोण, शिक्षा, समानता और न्याय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को उजागर करती है, जो हर पाठक को प्रेरणा देती है।

Calm Your Emotions (Hindi)/Shant Man Safal Jeevan/शांत मन सफल जीवन

काम योर इमोशंस पुस्तक एक प्रभावशाली पुस्तक है, जो भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में मदद करती है। यह तनाव, चिंता और नकारात्मकता से निपटने के व्यावहारिक उपाय सिखाती है, जिससे आप मानसिक शांति प्राप्त कर सकें और अपने जीवन में संतुलन ला सकें।

Glimpses of World History (Hindi) /Vishwa Itihas Ki Ek Jhalak/विश्व इतिहास की एक झलक

विश्व इतिहास की एक झलक जवाहरलाल नेहरू द्वारा लिखी गई एक प्रसिद्ध किताब है। यह किताब 1934 में प्रथम बार प्रकाशित हुई थी और आज तक चर्चा का विषय बनी हुई है। इसमें 1930 से 1933 के बीच ब्रिटिश भारत की जेलों में लिखे गए 196 पत्रों का संग्रह है। ये पत्र नेहरू जी ने अपनी बेटी इंदिरा को लिखे थे। इन पत्रों का मकसद इंदिरा को विश्व इतिहास से परिचित कराना था।
इस किताब में नेहरू जी ने दुनिया के इतिहास की रोचक जानकारी दी है। साथ ही, साम्राज्यों के उत्थान-पतन की कहानी पर भी प्रकाश डाला गया है। इस किताब को पढ़कर पता चलता है कि नेहरू जी एक महान राष्ट्र-नेता के साथ-साथ उच्चकोटि के साहित्य-मर्मज्ञ और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के उद्भट विद्वान थे।

This American Woman

Throughout Zarna’s whole childhood in India, everyone called her ‘so American’ just for reading the newspaper, having deep thoughts, and talking back to anyone over the age of thirty. When Zarna’s dad tried to marry her off at age fourteen, Zarna fled—first to the streets of Mumbai and ultimately to the glittering paradise of Akron, Ohio, where she got to become American for real.

On Zarna’s very American quest to find herself and her calling, she threw herself wholeheartedly into roles like dog-bite lawyer, crazy perfectionist stay-at-home mom, Indian matchmaker, prizewinning screenwriter, and more. It wasn’t until a dare led her to a stand-up comedy open mic that Zarna finally found her spiritual home: getting paid cold hard cash for her big fat mouth.

And as Zarna discovered, after surviving the brutal streets of Mumbai, the cutthroat world of stand-up comedy is nothing.

This American Woman is an exuberant story of fighting for your right to determine your own destiny and triumphing beyond what you ever dreamed was possible. Zarna’s mantra becomes a call to action: It’s never too late. If Zarna can do it, you can, too.

The Ghadar Movement

The Ghadar Movement was conceived in 1913 in the United States of America by Lala Har Dayal, Kartar Singh Sarabha, Sohan Singh Bhakna, Harnam Singh Tundilat and others, all of them Indian immigrants in the US. Inspired by Tilak, Savarkar, Madam Cama, Shyamaji Krishnavarma and others, the Ghadar plan was to smuggle arms to India and incite Indians in the British-Indian Army to mutiny. Many Ghadarites, most of them from Punjab, came back to India from the US in order to participate in the struggle. In India, revolutionaries like Rash Behari Bose and Vishnu Ganesh Pingle joined them.

Owing to lapses in planning and the presence of informers in their midst, the plan ultimately failed and the British came down very heavily on the conspirators.

Some like Kartar Singh Sarabha (who inspired a young Bhagat Singh) were sentenced to death for their part in the struggle. Many others suffered long and cruel jail sentences in the Andamans.

Carefully researched and breezily narrated, Rana Preet Gill’s The Ghadar Movement is an accurate portrait of the struggle.

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