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1965: Courage Unleashed

Did you know that the 1965 Indo–Pak War was initiated by Field Marshal Ayub Khan of Pakistan in an effort to wrest Jammu and Kashmir (J & K) from India? His failure to achieve his aim led eventually to his overthrow.

The Indo–Pak war of 1965 started as a localized conflict in J & K and exploded into a complex all-out war fought on a much bigger scale than the wars of 1947–48, 1962, 1971 and 1999. It extended from Ladakh in the north to Bikaner in Rajasthan and across the states of J & K, Punjab, Rajasthan and West Bengal. In extent, what was handled by the Western Command in 1965 is being handled today by three commands.

This account highlights the human dimension of war through the dramatic personal experiences of army and air force officers that astonish and overwhelm one’s imagination. It will convince the reader that real life is often stranger than fiction. The book also brings to light little-known facts that occurred across land, sea and air.

The Battle of Haji Pir

In August 1965, 30,000 Pakistani infiltrators crossed the Cease Fire Line (CFL) in Kashmir and began attacking civilians and army personnel. Codenamed ‘Operation Gibraltar’, this assault involved a mix of trained militia, mercenaries and Pakistani army personnel. Amidst the devastation, Indian forces retaliated and captured the strategic Haji Pir Pass.
The triumph however was short-lived as the pass was returned under the Tashkent Agreement, a bitter pill for the soldiers who had fought tirelessly for it. This book chronicles their courage and sacrifice, offering a poignant glimpse into the lives of those who won the Haji Pir Pass, a symbol of both victory and loss for India.

The Lost Symbol (Hindi)/The Lost Symbol/द लॉस्ट सिम्बॉल

अमेरिका के कैपिटॉल बिल्डिंग में हॉर्वर्ड के सिम्बॉलॉजिस्ट रॉबर्ट लैंग्डन सायंकालीन लैक्चर देने जाते हैं तभी अजीबोगरीब घटना घटती है। वहाँ एक पाँच चिह्नों वाली वस्तु मिलती है और लैंग्डन पाते हैं कि वह कोई प्राचीन आमंत्रण है जिसे पाकर अतीत के ज्ञान को हासिल किया जा सकता है। लेकिन इसी बीच जब उनके गुरु का अपहरण हो जाता है, तो उन्हें पता चलता है कि उन्हें छुड़ाने का एक मात्र रास्ता उस आमंत्रण को स्वीकार करना ही है।
क्या लैंग्डन अपने गुरु को छुड़ा पाते हैं?
क्या वह प्राचीन ज्ञान को हासिल कर पाते हैं?
यहीं द लॉस्ट सिम्बॉल की कहानी है। 

Do It Today (hindi) / Kaal Kare so Aaj Kar

इस पुस्तक के बारे में स्वयं लेखक ने लिखा है कि आज जो कर रहे हैं, वह यह तय करेगा, कि आप अगले एक साल, दो साल या दस सालों में कहाँ होंगे। प्रत्येक दिन हम वह काम करते रहते हैं, जिसे हम करना नहीं चाहते। मैं बिल जमा करने या वॉशरूम साफ करने जैसे कामों की बात नहीं कर रहा हूँ। मैं बात कर रहा हूँ कि आप अपने अधिकतर समय का कैसे उपयोग करते हैं। वह समय, जो आपके जीवन का ‘हासिल’ है। जीवन में उच्च लक्ष्य हासिल करने और आगे बढ़ने के लिए यह पुस्तक व्यक्तित्व विकास की एक महान पुस्तक है। 

Bharat Ki Lok Kathayen/भारत की लोक कथाएँ

लोककथाएँ मानव-समूह की उस साझी अभिव्यक्ति को कहते हैं जो कथाओं के विभिन्न रूपों में अभिव्यक्त होता है। सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि कुछ निश्चित कथानक रूढ़ियों और शैलियों में ढली लोककथाओं के अनेक संस्करण, उसके नित्य नई प्रवृत्तियों और चरितों से युक्त होकर विकसित होने के प्रमाण है।
ये लोककथाएँ सत्य घटनाओं पर आधारित हैं, जबकि कहानियाँ काल्पनिक होती हैं। इन लोक कथाओं का उद्देश्य यह है कि कैसे पौराणिक कथाओं के ज़रिए लोगों के बीच एकता, आपसी प्रेम, भाईचारे और सक्षम होने का ज्ञान दिया जाता है। इनकी पहचान यही है कि लोक कथा एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी यात्रा करती हैं। 

Knife (Hindi) / Chaakoo/चाकू

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध लेखक और बुकर पुरस्कार विजेता सलमान रश्दी की ओर से, उनके खिलाफ दिए गए फतवे के तीस साल बाद, उनकी जान लेने की एक निर्दयी कोशिश को लेकर एक मर्मभेदी, निजी ब्योरा। 12 अगस्त, 2022 की सुबह, सलमान रश्दी चॉटॉक्वा इंस्टीट्यूशन के मंच पर अपने व्याख्यान की तैयारी कर रहे थे, तभी काला लिबास और काला नकाब पहने एक शख्स चाकू लहराता हुआ उनकी तरफ दौड़ा। इसके बाद हिंसा की वीभत्स घटना ने पूरी साहित्यिक दुनिया को हिला कर रख दिया। अब, पहली बार, इस अविस्मरणीय विवरण में, रुश्दी उस दिन और उसके बाद की दर्दनाक घटनाओं के साथ-साथ स्वास्थ्य लाभ की अपनी यात्रा को याद कर रहे हैं। चाकू (नाइफ) में रश्दी अपनी शक्तियों के चरम पर हैं, इसमें वह अडिग ईमानदारी के साथ लिख रहे हैं। यह अकल्पनीय को समझने, जीवन, हानि, प्रेम, कला पर एक अंतरंग और जीवन की आस्था को पुष्ट करने वाली अंतर्गाथा और फिर से उठ खड़े होने की शक्ति खोजने की साहित्य की क्षमता का एक बेहद प्रेरक अनुस्मारक है। 

Gandhi (Hindi)/गांधी

‘गुहा, गांधी को उनके वास्तविक रुप में प्रस्तुत और उनके सुभी विरोधाभासों को प्रकट होने देते हैं’ — न्यूयॉर्क टाइम्सगांधी का जीवन बीसवीं सदी के महानतम व्यक्तित्वों में से एक है। उन्होंने दुनियाभार में करोड़ों लोगों को प्रेरित किया, असंख्य लोग उनसे नाराज़ भी हुए और उनके चिंतन और कार्यक्षेत्र में उन्हें चुनौती दी। उनका पूरा जीवन ब्रिटिश राज के साये में बीता, लेकिन उस साम्राज्य को झुकाने में गांधी का योगदान सर्वोपरि रहा। फासीवादी और कम्युनिस्ट तानाशाहों की हिंसा से भरी उस दुनिया में गांधी के पास सिवाय तर्कों और उदाहरणों के कुछ नहीं था। उन्होंने जातीय और लैंगिक भेदभाव से भी युद्ध किया और धार्मिक सद्भाव के लिए संघर्ष करते हुए अपनी जान तक दे दी।यह शानदार किताब गांधी के जीवन के उस कालखंड का वर्णन है जब वे गोलमेज़ सम्मेलन से लौटकर वापस भारत आए और एक बार फिर से स्वतंत्रता संग्राम की योजना में जुट गए। पुस्तक का यह खंड अस्पृश्यता के विरुद्ध उनकी लड़ाई, वर्धा आश्रम की स्थापना, सुभाष चंद्र बोस के साथ उनके मतभेद, भारत छोड़ो आंदोलन, देश की स्वतंत्रता और 1948 में उनकी हत्या तक के कालखंड को समेटता है। इस पुस्तक में जिन्ना और आम्बेडकर के साथ उनके संवादों से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन के ऐसे कई आख्यान शामिल हैं जो गांधी के व्यक्तित्व का परिचय हमसे उनके समकालीनों की दृष्टि से करवाते हैं। दुनिया के सामने अभी तक अप्रकाशित रहे स्रोतों और लेखन की शानदार किस्सागोई और राजनितिक समझ इस पुस्तक को राष्टृपिता पर अभी तक लिखी गई पुस्तकों में सर्वाधिक महत्त्वाकांक्षी बनाकर प्रस्तुत करती है। 

Leading From the Back (Hindi) / लीडिंग फॉर्म द बैक

‘लीडिंग फ़्रॉम द बैक वर्तमान संदर्भ में नेतृत्व के प्रति हमारी सोच और दृष्टिकोण में क्रांतिकारी बदलाव लाने का एक सशक्त माध्यम है . . . यह किताब सभी को अवश्य पढ़नी चाहिए’ —राम चरण, यूएसए के फॉर्च्यून 100 कंपनियों के सीईओ और बोर्ड के सलाहकार
क्या आप एक ऐसे नेतृत्व मॉडल की तलाश में हैं जिसे समझना आसान हो, अमल में लाना सरल और जो आपको अद्भुत परिणाम भी दे? यदि हाँ, तो लीडिंग फ़्रॉम द बैक आपके लिए ही है! इस पुस्तक में आपको एक ‘सुपरस्टार’ लीडर बनने की सभी आवश्यक सीखें मिलेंगी। इससे आप सीखेंगे कि अपनी टीम के सदस्यों से सम्मान कैसे पाएँ और असंभव को संभव करने में उनकी मदद कैसे करें। नेतृत्व के ढेरों सिद्धांतों और नियमों को पढ़ने के बजाय तीन चरणों का यही मॉडल पर्याप्त है जिसके पास अद्भुत सफलताओं का एक प्रामाणिक इतिहास रहा है।
यह रोचक दृष्टांत एक युवा मैनेजर, शिव कुंद्रा के करियर में आने वाली कठिनाइयों के बारे में है, जिसके कार्य करने की शैली, उसके नेतृत्व की क्षमता और सफलता पाने में बाधा डालती है। लेखक एक कहानी के माध्यम से, लीडिंग फ़्रॉम द बैक के आकर्षक सिद्धांत से अवगत कराते हैं।  

The Art of War (Hindi) / द आर्ट ऑफ़ वार

द आर्ट ऑफ वॉर एक अमर कृति है, जिसका पूर्वी एशिया की संस्कृति एवं इतिहास में विशेष स्थान है। युद्ध और सैन्य रणनीति के दर्शन और राजनीति पर आधारित यह प्राचीन चीनी ग्रंथ 2,500 साल पहले लिखा गया था, लेकिन यह आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना कि तब था।
सेल्समैनशिप हो या कारोबार, आप चाहे किसी भी क्षेत्र में हों, अगर आपके सामने कोई प्रतिस्पर्धी है, जिसे हराकर आप जीतना चाहते हैं, तो यह पुस्तक आपकी मदद कर सकती है। इस पुस्तक का मूल मंत्र है कि वह जीतेगा जो जानता है कि कब लड़ना है और कब नहीं लड़ना है।
आधुनिक युग के साथ-साथ इतिहास के पन्नों में भी इस पुस्तक का योगदान दर्ज है। फ्रांस के सम्राट नेपोलियन ने इस पुस्तक को पढ़ा था और युद्ध में इसका इस्तेमाल किया था। साम्यवादी चीनी नेता माओ जे दॉन्ग ने 1949 में चियांग काई-शेक पर अपनी विजय का श्रेय इस पुस्तक को दिया था। वियतनाम में जनरल गियाप ने इसी पुस्तक के सिद्धांतों पर चलकर फ्रांसीसी और अमेरिकी सेनाओं पर विजय हासिल की थी। वियतनाम में अमेरिका की हार के बाद ही इस पुस्तक पर अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का ध्यान गया।
चाहे आप एक सैन्य रणनीतिकार हों, एक व्यापारी हों, या बस एक जिज्ञासु पाठक हों, इस प्राचीन कृति में ऐसा कुछ मूल्यवान है, जिसे पाने के आप अधिकारी हैं।  

The Stoic Path To Wealth (Hindi) / द स्टॉइक पाथ टु वेल्थ

कहीं-न-कहीं हम सबके मन में समृद्ध होने की ख्वाहिश होती है। लेकिन उसको कैसे हासिल करें इसका सूत्र हम लोगों में से बहुत सारे लोगों के पास नहीं होता। हम लोगों में से बहुत से लोगों को इस बात की अच्छी समझ है कि शेयर बाज़ार से परिचय संपत्ति बनाने का अच्छा ज़रिया है। लेकिन मुश्किल यह है कि बाज़ार में उतार-चढ़ाव इतना अधिक होता है कि शेयर में निवेश करना आसान नहीं होता है। जब बाज़ार में गिरावट का दौर होता है तो हमको डर महसूस होता है। जब बाज़ार चढ़ रहा होता है तो हमारे अंदर लालच की भावना आ जाती है। लेखक ने इस पुस्तक में स्टॉइक दर्शन के सूत्रों के माध्यम से इस बात को समझाने का प्रयास किया है कि किस तरह भय और लालच की भावनाओं पर काबू रखते हुए हम समृद्धि के मार्ग पर सफलतापूर्वक आगे बढ़ सकते हैं। सीधे-सरल उदाहरणों के माध्यम से लिखी गई इस किताब की सहायता से कोई ऐसा व्यक्ति भी समृद्धि पथ पर आगे बढ़ सकता है जिसको बाज़ार, निवेश आदि की समझ बहुत नहीं हो।

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