मोरारजी देसाई भारत के स्वाधीनता सेनानी, राजनेता और देश के चौथे प्रधानमंत्री थे। वे प्रथम प्रधानमंत्री थे, जो डुमरमा और लक्ष्मीपुर के निवासी थे। वही एकमात्र व्यक्ति हैं, जिन्हें भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न एवं पाकिस्तान के सर्वोच्च सम्मान निशान-ए-पाकिस्तान से सम्मानित किया गया था।
वे 81 वर्ष की आयु में प्रधानमंत्री बने थे। इसके पूर्व कई बार उन्होंने प्रधानमंत्री बनने की कोशिश की परंतु असफल रहे। लेकिन ऐसा नहीं हैं कि मोरारजी प्रधानमंत्री बनने के योग्य नहीं थे। वस्तुत: वे दुर्भाग्यशाली रहे कि वरिष्ठतम नेता होने के बावजूद उन्हें पंडित नेहरू और लालबहादुर शास्त्री के निधन के बाद भी प्रधानमंत्री नहीं बनाया गया। मोरारजी देसाई मार्च 1977 में देश के प्रधानमंत्री बने लेकिन प्रधानमंत्री के रूप में इनका कार्यकाल पूर्ण नहीं हो पाया। चौधरी चरण सिंह से मतभेदों के चलते उन्हें प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा। इस पुस्तक में उनकी प्रामाणिक जीवनी दी गई है।
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Lata/लता
लता गुजराती के आठ प्रसिद्ध लेखकों का सम्मिलित रूप से लिखा एक उपन्यास है। ये सभी लेखक जाने-माने और अपनी-अपनी शैली के माहिर हैं। लता में दो पुरुषों के स्नेह-सूत्रों में बंधी एक नारी की कहानी है—बहुत करुण, बहुत मार्मिक!
इस कथा को आठ कोणों से आठ लेखकों ने, आठ मनस्थितियों से लिखा है। यह अद्भुत प्रयोग निश्चय ही पाठकों को बहुत पसंद आएगा। मूल रूप से यह उपन्यास गुजराती में लिखा गया था। हिंदी में इसके अनुवादक हैं श्री परदेसी। अनुवादक ने इसे इस प्रकार अनुवादित किया है कि यह उपन्यास भाषा की दृष्टि से हिंदी में लिखा गया ही प्रतीत होता है।
Muktidhan Tatha Anya Kahaniyan/मुक्तिधन तथा अन्य कहानियाँ
विश्व के महान कथा-शिल्पी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी मुक्तिधन ‘गौ’ से जुड़ी हुई है। लाला दाऊदयाल ने एक ज़रूरतमंद मुसलमान से एक गाय खरीदी, लेकिन विधि का विधान ही ऐसा निकला कि उस मुसलमान सज्जन को बार-बार रुपयों की ज़रूरत पड़ी तो, उसने सूद पर लाला दाऊदयाल से ही हर बार पैसे लिए, लेकिन कभी चुका न पाया, लेकिन अंत में दाऊदयाल ने उस मुस्लिम सज्जन का कर्ज यह कहकर माफ कर दिया कि ‘मैं ही तुम्हारा कर्जदार हूँ, क्योंकि तुम्हारी गाय मेरे पास है और गाय ने कर्ज के धन से अधिक दूध दिया है और बछड़े नफ़े में अलग।’ यह कथा मज़बूरी का फ़ायदा न उठाने की प्रेरणा देती है।
इसी के साथ इसमें प्रेमचंद की अन्य श्रेष्ठ कहानियाँ भी दी गई हैं, जो प्रेरक भी हैं और रोचक भी।
कथा सम्राट के गौरव से विभूषित संसार के अग्रणी कथाकारों में प्रतिष्ठित प्रेमचंद की कहानियों का यह खंड संपूर्ण रूप से मूल पाठ है।
Nange Pairon Ka Safar/नंगे पैरों का सफ़र
इतिहास इतिहास के पृष्ठों पर लिखा जाने से बहुत देर पहले कुछ लोगों की देह पर लिखा जाता है। ऐसा मानना है दलीप कौर टिवाणा जी का। इसलिए उन्होंने अपनी यह आत्मकथा उन्हीं लोगों को समर्पित की है जो अपनी देह पर इतिहास का लिखा जाना झेलते हैं। इस पुस्तक में लेखिका ने अपने जीवन की तमाम अनछुई बातों का बेबाकी से चित्रण किया है। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज एवं साहित्य को समर्पित कर दिया, जिसके लिए उन्हें जीवन संघर्ष की राह पर अनेक कष्ट भोगने पड़े, जिन सबका चित्रण इस पुस्तक में दिया गया है।
Patakshep/पटाक्षेप
हिंदी पाठकों की सुपरिचित लेखिका मालती जोशी मध्यवर्गीय परिवार से हैं। अपने घर-आंगन से, पास-पड़ोस से कथाबीज उठाकर वे कल्पना का रंग देती हैं। इसीलिए उनकी रचनाएँ परिवार के इर्द-गिर्द घूमती हैं। उनकी रचनाओं को पढ़कर हरेक घटना अपने आसपास ही घटी हुई प्रतीत होती है।
पटाक्षेप चिंताओं और जीवन की सचाइयों से संबंधित सशक्त साहित्यिक कृति तो है ही, साथ ही अत्यंत रोचक भी है। यह रचना समाज की सच्चाई को एक दर्पण की तरह दिखाने में पूरी तरह सक्षम है।
Pighalte Patthar/पिघलते पत्थर
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता अर्थात जिस कुल में स्त्रियों का आदर है वहाँ देवता प्रसन्न रहते हैं। इस प्रकार शास्त्रों में नारी की महिमा बताई गई है। भारतीय समाज में नारी का एक विशिष्ट व गौरवपूर्ण स्थान है। लेकिन आजकल के समाज में ऐसा नहीं है। आजकल कहीं वीरान स्थल पर नारी मिल जाए तो किसी रक्षक को भी भक्षक बनने में देर नहीं लगती। लेकिन चरित्र और मर्यादा के बल पर नारी निसंदेह नारायणी का रूप भी धारण करके भक्षक को रक्षक बनाने में सक्षम हो सकती है।
तीन-तीन नारी-विरोधी पुरुषों को अलग-अलग ढंग से वश में करके सही मार्ग पर लाने वाली एक युवती के साहसपूर्ण कृत्यों की सरस कहानी, जिसे प्रस्तुत किया है लोकप्रिय उपन्यासकार धर्मवीर कपूर ने।
Planetary Meditation/प्लैनेटरी मेडिटेशन
इस पुस्तक में ज्योतिष विज्ञान और ब्रह्मांड की रचना के परस्पर संबंधों का बहुत ही ख़ूबसूरती से उद्घाटन किया गया है। इसमें अत्यंत गहन रूप में देश-काल में व्याप्त चेतना के प्रवाह का वर्णन किया गया है। इससे स्पष्ट होता है लेखक को विषय की कितनी गहरी समझ है– डॉ. मुरली मनोहर जोशी, संसद सदस्य और पूर्व केंद्रीय मंत्री
प्लैनेटरी मैडिटेशन में बहुत ही सरल ढंग से समझाया गया है कि ग्रहों की स्थितियाँ किस तरह से हमारे जीवन को स्वरूप प्रदान करती हैं और हमें ज्ञान, शांति और विवेक से समृद्ध करती हैं। इसमें नक्षत्र-मैडिटेशन की एक ऐसी ध्यान-विधि को उद्घाटित किया गया है, जिसकी पहले कल्पना भी नहीं की गई थी। इससे स्पष्ट होता है कि जिस नक्षत्र में व्यक्ति का जन्म होता है, उसके देवता से जुड़कर ही वह सत्, चित् और आनंद की अवस्था को प्राप्त कर सकता है।
Pragati Ke Path Par/प्रगति के पथ पर
प्रगति के पथ पर गुरुदत्त का एक लोकप्रिय सामाजिक उपन्यास है, जिसमें सामाजिक बुराइयों पर कड़ा प्रहार करते हुए देश की एकता का संदेश दिया गया है। ग्रामीण भारत में सदियों से चली आ रही सामाजिक बुराइयों को केंद्र में रखते हुए इस उपन्यास का ताना बाना इस प्रकार बुना गया है कि पाठकों को लगता है कि देश को तोड़ने की नहीं जोड़ने की जरूरत है, इसलिए अंतर्जातीय विवाह को प्रोत्साहन देकर जाति प्रथा का समूल विनाश कर देना चाहिए।
समाज में राजनीतिक से लेकर आर्थिक तक के कई मुद्दों को पड़ताल करने वाला यह एक काल्पनिक उपन्यास है। लिंग, जाति, या वर्ग पूर्वाग्रह जैसी सामाजिक समस्याओं को पात्रों पर पड़ने वाले प्रभाव के ज़रिए इसमें इस प्रकार रेखांकित किया गया है पाठक एक बार पढ़ना शुरू करे तो वह इसे पूरा पढ़कर ही दम लेगा।
Prakritik Chikitsa/प्राकृतिक चिकित्सा
पूर्ण रूप से स्वस्थ रहने और रोगों को जड़ से नष्ट करने का एकमात्र उपाय है—प्राकृतिक चिकित्सा। इस पद्धति को आज हमारे देश में ही नहीं विदेशों में भी व्यापक मान्यता मिली है। लोगों में प्राकृतिक संसाधनों द्वारा स्वस्थ रहने केप्रति गहरी रुचि है।
प्रस्तुत पुस्तक के लेखक धर्मचन्द सरावगी ने अपने जीवन का अधिकांश समय प्राकृतिक चिकित्सा के अध्ययन और अनुसंधान में लगाया। उनके लंबे अनुभव का सार है—प्राकृतिक चिकित्सा। जिसके पास भी यह पुस्तक रहेगी और वह इसका अनुसरण करता रहेगा, उसे डॉक्टर की कभी आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
Prema/प्रेमा
• विश्व के महान कथा-शिल्पी प्रेमचंद का प्रारंभिक उपन्यास है—प्रेमा। विधवा जीवन की ज्वलंत समस्या को सशक्त ढंग से उठाने में सक्षम यह कथा विधवा विवाह की पक्षधर है।
• इसमें नायक सहसा ही समाज सुधार का बीड़ा उठाकर प्रेमा के साथ विवाह करने का वचन भंग कर देता है, जिससे विरोध की विचित्र स्थितियाँ उत्पन्न हो जाती हैं।
• यहाँ भी प्रेमचंद का तीखा विरोध उन शक्तियों के प्रति है, जो धर्म के नाम पर पाखंडों में डूबी हैं।
• इसी के साथ प्रेमा का पूर्व उर्दू-रूप ‘हमखुर्मा व हमसवाब’ भी दिया गया है। यहाँ इसे प्रस्तुत करने का वास्तविक कारण यह है कि प्रेमचंद साहित्य के अध्येता दोनों रूपों का अध्ययन कर प्रेमचंद की कथाधर्मिता को समझ-परख सकें।
• उपन्यास सम्राट के गौरव से विभूषित संसार के अग्रणी कथाकारों में प्रतिष्ठित प्रेमचंद की ये कृतियां सम्पूर्ण रूप में प्रामाणिक मूल पाठ हैं।
