The Fearless Four—Riz, Anvita, Tiana, and Palash—are ready for a well-deserved break after their previous terrifying case involving demonic toys. Their destination? Funmania, the grand amusement park on Bongo Island, which is home to the world’s biggest rollercoaster: Big Loopy.
But from the moment they arrive, the island seems . . . odd. The Wailing Witch’s eerie cries echo through the night while the island’s inhabitants watch them from the shadows, guarding secrets darker than the four friends can imagine. And then, the unthinkable happens.
Their friend, Cyrus, vanishes. One moment, he’s strapped into Big Loopy. The next, his seat is empty. No trace. No explanation.
With time running out, the Fearless Four must unravel the island’s blood-curdling mysteries before Cyrus is lost forever . . . or before they become the next ones to disappear.
21 Big Ideas That Will Change Your Life: Timeless Wisdom from the Greatest Minds in History
We are taught to chase success, set goals, and strive for achievement—but how often do we stop to ask how we want our life to feel?
Throughout history, the world’s greatest thinkers have wrestled with the same challenges we face today: finding meaning in work, maintaining healthy relationships, managing financial stress, and mastering our emotions. Yet, we often act as if we’re the first to encounter these struggles, overlooking the wisdom left behind by those who came before us.
This book distills 21 transformative ideas from legendary minds and presents them in a modern, practical context. Each idea offers a fresh perspective on how to navigate life’s complexities, cut through distractions, and focus on what truly matters.
- Offers 21 actionable essays inspired by legendary thinkers like Seneca, Nietzsche, and Freud
- Distills timeless wisdom into practical lessons for modern life
- Helps readers navigate life’s complexities with clarity and purpose
- Ideal for fans of self-help, philosophy, and personal development
- Empowers readers to make better decisions and live with intention
If you’re looking for actionable insights to help you think clearly, make better decisions, and live with purpose, this book is your guide. Start applying these timeless lessons today—and change the way you live, work, and grow.
Perfect for readers of self-help, philosophy, and personal development books.
ख़ुद से झूठ तो मत बोलो एक प्रेरणादायक किताब है, जो आत्म-साक्षात्कार और आत्म-विकास पर केंद्रित है। यह किताब हमें यह समझने में मदद करती है कि हम अक्सर अपने जीवन में ख़ुद से झूठ बोलते हैं—जैसे कि हम ख़ुश हैं, हम मज़बूत हैं या हमें किसी बदलाव की ज़रूरत नहीं है। लेखक हमें यह सिखाते हैं कि अपने अंदर की सच्चाई को स्वीकार करना ही असली शक्ति है।
इस किताब में बताया गया है कि कैसे हम सामाजिक अपेक्षाओं, डर और असुरक्षा के चलते एक नकली जीवन जीने लगते हैं। लेखक ईमानदारी, आत्म-जागरूकता और बदलाव के महत्त्व पर ज़ोर देते हैं। वे सरल उदाहरणों और व्यावहारिक सलाह के ज़रिए पाठकों को ख़ुद के प्रति सच्चे रहने की प्रेरणा देते हैं।
ख़ुद से झूठ तो मत बोलो एक ऐसा मार्गदर्शक है, जो आपको अंदर से मज़बूत बनाता है और आत्म-विश्वास से भरा जीवन जीने की दिशा में ले जाता है। यह किताब पढ़कर पाठक ख़ुद को एक नए नज़रिए से देखना शुरू करते हैं।
महान अभिनेता बलराज साहनी का एकमात्र यात्रा वृत्तांत है — पाकिस्तान का सफ़र।
इस यात्रा वृत्तांत में साहनी ने पाकिस्तान की अपनी रोमांचक यात्रा के बारे में लिखा है।
साहनी जब सारी दुनिया में प्रसिद्ध हो चुके थे, तो उन्हें तब अपना वह घर बहुत याद आने लगा, जिसके आंगन में उनका बचपन बीता था, लेकिन अब वह घर पाकिस्तान में था और साहनी हिंदुस्तानी नागरिक थे। अब वह पाकिस्तानी घर उनका नहीं था, न ही उस घर में उनके कोई संबंधी रहते थे, अब तो वह घर किन्हीं अनजान लोगों का था, उसके मालिक कोई और थे, इसलिए साहनी को उस घर में जाने में संकोच हो रहा था। लेकिन सिकंदर ने साहनी को समझाया कि वह बेकार-से तकल्लुफ़ात का शिकार हो रहा है और नि:संकोच अपने पुराने घर को देखने के लिए उसे पाकिस्तान अवश्य जाना चाहिए।
अपने पुराने घर और बचपन के दोस्तों की गलियों को निहारते हुए साहनी ने जब उस दरवाज़े पर दस्तक दी, जिसके आंगन में उनका बचपन बीता था, तो घर के मालिक ने उन्हें गले से लगा लिया और एक मालिक की तरह उनका स्वागत किया।
सुनती हूँ, तुमने ब्याह न करने की प्रतिज्ञा कर रखी है।’ नंदा के इस वाक्य पर हरि ने अपनी आँखें नीची करके कहा, ‘असल में बात कुछ और ही है।’
नंदा बोली, ‘वही तो मैं जानना चाहती हूँ।’
इस पर हरि ने उसकी ओर दृष्टिक्षेप किया, उससे दोनों के नयन लालसा के आलिंगन में चंचल हो उठे और और हरि ने उसे बाहों में भर लिया।
मनोवैज्ञानिक विश्लेषण के कुशल हिंदी उपन्यासकार भगवतीप्रसाद वाजपेयी ने इस उपन्यास में एक बाल विधवा के दारुण जीवन का ऐसा मार्मिक चित्र अंकित किया है कि पाठक के सामने उस समय के पूरे भारतीय समाज का चित्र उभर आता है।
पाँच हज़ार रुपए मिल सकते हैं! और घर में एक रुपया आटा लाने को भी नहीं है।’ सविता ने कहा।
‘लेकिन सविता, ईमान इस तरह नहीं बिकता। यही तो हमारे ईमान की परीक्षा की घड़ी है। ऐसी ही घड़ीयों में तो ज़रूरत है चट्टान की तरह मज़बूत खड़े रहने की।’
एक ईममानदार और अहंवादी गरीब लेखक और उसकी सहनशील पत्नी की रूला देने वाली दर्दभरी कहानी है यह।
प्रियतम तुम जिओगी और जीती रहेगी, मेरा क्या है, मैं तो जीवन में तुम्हारी परछाई बनकर सदैव इस दुनिया में रहूँगा, भले ही मेरा नश्वर शरीर क्यों न उठ जाए, तब भी मेरे होने का अहसास तुम्हें हमेशा रहेगा।’
संसार में ऐसे बहुत से प्रसिद्ध व्यक्ति हुए, जिन्हें प्रेम हो गया और उस प्रेम की छाया में प्रेमी-प्रेमिका ने परस्पर भाव भीने, रसभीगे और बेहद अंतरंग पत्र लिखे हैं। ये पत्र उनके रिश्तों, उनके विचारों, उनकी संवेदनाओं और उनके जीवन की छोटी-बड़ी घटनाओं के दस्तावेज़ बने गए हैं। इस संग्रह में ऐसे ही अनेक प्रसिद्ध एवं चर्चित लोगों के पत्र दिए गए हैं।
पिता और पुत्री के बीच कितने भी वैचारिक मतभेद हों, लेकिन रक्त संबंध एवं पूर्व जन्म का ऋणानुबंध होने के कारण वे हमेशा एक-दूसरे से निकट ही रहते हैं. . .अपने तो अपने ही होते हैं का अमर संदेश देने वाला नि:संदेह यह एक कालजयी उपन्यास है’— रांगेय राघव
भैरव बाबू बोले, ‘अरे मैंने देखा कि उस आदमी को छुरा मार दिया! ख़ून से सना छुरा लेकर लड़का उस गली की तरफ भाग गया।’
‘ज़रूरत क्या है आपको इन सब बातों में उलझने की? बूढ़े आदमी हैं आप। यदि पुलिस आकर हमें परेशान करेगी तब क्या होगा?’
विमल मित्र का यह रोचक एवं प्रेरक उपन्यास है, इसमें नई और पुरानी पीढ़ी के टकराव को जीवंत ढंग से उकेरा गया है।
सुंदरता चेहरे पर लगी दो आँखों से नहीं परखी जाती, वरन सुंदरता तो आत्मा की गहराई से अनुभव की जाती है— यह तथ्य इस उपन्यास को पढ़कर भलीभाँति समझ में आता है’ — टैगोर
बंकिमचन्द्र चटर्जी की पुस्तकें आज भी बड़े चाव से पढ़ी जाती हैं, यही कारण है कि उनके अनुवाद दुनिया की अनेक भाषाओं में हुए हैं।
रजनी बंकिमचन्द्र चटर्जी का एक अत्यंत लोकप्रिय उपन्यास है, इसमें बंकिम ने एक अंधी रमणी की दर्शन करने की व्याकुलता को जैसी सरस साकारता प्रदान की है, वह अन्यत्र दुर्लभ है। इसकी कथा मानव-हृदय की करुणा से इस प्रकार ओत-प्रोत है कि मन मसोस उठता है. . . इसके अनुवादक और संक्षेपकार हैं श्रीरामनाथ ‘सुमन’।
नरेन्द्र कोहली एक सिद्धहस्त कथाकार थे। उनकी कलम के सरोकार तत्कालीन समाज में जी रहे लोगों की पड़ताल करना था। लोगों के जीवन को समझने और कथात्मक विश्लेषण से तमाम परिस्थितियाँ सामने आती हैं। नरेन्द्र कोहली अपनी कहानियों में समाज में फैली असंगतियों और दारुण व्यथा का सजीव चित्रण करते हैं। ज़रूरत पड़ने पर वे आवश्यक व्यंग्य का सहारा लेने से भी नहीं चूकते और कथा-बिंबों से अपनी सृजनात्मक क्षमा का परिचय भी देते हैं।
नरेन्द्र कोहली जैसे सशक्त उपन्यासकार की श्रेष्ठ कहानियों का यह संकलन सभी पाठकों और शोधकर्ताओं और अध्येताओं के लिए उपयोगी है।