इतिहास इतिहास के पृष्ठों पर लिखा जाने से बहुत देर पहले कुछ लोगों की देह पर लिखा जाता है। ऐसा मानना है दलीप कौर टिवाणा जी का। इसलिए उन्होंने अपनी यह आत्मकथा उन्हीं लोगों को समर्पित की है जो अपनी देह पर इतिहास का लिखा जाना झेलते हैं। इस पुस्तक में लेखिका ने अपने जीवन की तमाम अनछुई बातों का बेबाकी से चित्रण किया है। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज एवं साहित्य को समर्पित कर दिया, जिसके लिए उन्हें जीवन संघर्ष की राह पर अनेक कष्ट भोगने पड़े, जिन सबका चित्रण इस पुस्तक में दिया गया है।
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Patakshep/पटाक्षेप
हिंदी पाठकों की सुपरिचित लेखिका मालती जोशी मध्यवर्गीय परिवार से हैं। अपने घर-आंगन से, पास-पड़ोस से कथाबीज उठाकर वे कल्पना का रंग देती हैं। इसीलिए उनकी रचनाएँ परिवार के इर्द-गिर्द घूमती हैं। उनकी रचनाओं को पढ़कर हरेक घटना अपने आसपास ही घटी हुई प्रतीत होती है।
पटाक्षेप चिंताओं और जीवन की सचाइयों से संबंधित सशक्त साहित्यिक कृति तो है ही, साथ ही अत्यंत रोचक भी है। यह रचना समाज की सच्चाई को एक दर्पण की तरह दिखाने में पूरी तरह सक्षम है।
Pighalte Patthar/पिघलते पत्थर
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता अर्थात जिस कुल में स्त्रियों का आदर है वहाँ देवता प्रसन्न रहते हैं। इस प्रकार शास्त्रों में नारी की महिमा बताई गई है। भारतीय समाज में नारी का एक विशिष्ट व गौरवपूर्ण स्थान है। लेकिन आजकल के समाज में ऐसा नहीं है। आजकल कहीं वीरान स्थल पर नारी मिल जाए तो किसी रक्षक को भी भक्षक बनने में देर नहीं लगती। लेकिन चरित्र और मर्यादा के बल पर नारी निसंदेह नारायणी का रूप भी धारण करके भक्षक को रक्षक बनाने में सक्षम हो सकती है।
तीन-तीन नारी-विरोधी पुरुषों को अलग-अलग ढंग से वश में करके सही मार्ग पर लाने वाली एक युवती के साहसपूर्ण कृत्यों की सरस कहानी, जिसे प्रस्तुत किया है लोकप्रिय उपन्यासकार धर्मवीर कपूर ने।
Planetary Meditation/प्लैनेटरी मेडिटेशन
इस पुस्तक में ज्योतिष विज्ञान और ब्रह्मांड की रचना के परस्पर संबंधों का बहुत ही ख़ूबसूरती से उद्घाटन किया गया है। इसमें अत्यंत गहन रूप में देश-काल में व्याप्त चेतना के प्रवाह का वर्णन किया गया है। इससे स्पष्ट होता है लेखक को विषय की कितनी गहरी समझ है– डॉ. मुरली मनोहर जोशी, संसद सदस्य और पूर्व केंद्रीय मंत्री
प्लैनेटरी मैडिटेशन में बहुत ही सरल ढंग से समझाया गया है कि ग्रहों की स्थितियाँ किस तरह से हमारे जीवन को स्वरूप प्रदान करती हैं और हमें ज्ञान, शांति और विवेक से समृद्ध करती हैं। इसमें नक्षत्र-मैडिटेशन की एक ऐसी ध्यान-विधि को उद्घाटित किया गया है, जिसकी पहले कल्पना भी नहीं की गई थी। इससे स्पष्ट होता है कि जिस नक्षत्र में व्यक्ति का जन्म होता है, उसके देवता से जुड़कर ही वह सत्, चित् और आनंद की अवस्था को प्राप्त कर सकता है।
Pragati Ke Path Par/प्रगति के पथ पर
प्रगति के पथ पर गुरुदत्त का एक लोकप्रिय सामाजिक उपन्यास है, जिसमें सामाजिक बुराइयों पर कड़ा प्रहार करते हुए देश की एकता का संदेश दिया गया है। ग्रामीण भारत में सदियों से चली आ रही सामाजिक बुराइयों को केंद्र में रखते हुए इस उपन्यास का ताना बाना इस प्रकार बुना गया है कि पाठकों को लगता है कि देश को तोड़ने की नहीं जोड़ने की जरूरत है, इसलिए अंतर्जातीय विवाह को प्रोत्साहन देकर जाति प्रथा का समूल विनाश कर देना चाहिए।
समाज में राजनीतिक से लेकर आर्थिक तक के कई मुद्दों को पड़ताल करने वाला यह एक काल्पनिक उपन्यास है। लिंग, जाति, या वर्ग पूर्वाग्रह जैसी सामाजिक समस्याओं को पात्रों पर पड़ने वाले प्रभाव के ज़रिए इसमें इस प्रकार रेखांकित किया गया है पाठक एक बार पढ़ना शुरू करे तो वह इसे पूरा पढ़कर ही दम लेगा।
Prakritik Chikitsa/प्राकृतिक चिकित्सा
पूर्ण रूप से स्वस्थ रहने और रोगों को जड़ से नष्ट करने का एकमात्र उपाय है—प्राकृतिक चिकित्सा। इस पद्धति को आज हमारे देश में ही नहीं विदेशों में भी व्यापक मान्यता मिली है। लोगों में प्राकृतिक संसाधनों द्वारा स्वस्थ रहने केप्रति गहरी रुचि है।
प्रस्तुत पुस्तक के लेखक धर्मचन्द सरावगी ने अपने जीवन का अधिकांश समय प्राकृतिक चिकित्सा के अध्ययन और अनुसंधान में लगाया। उनके लंबे अनुभव का सार है—प्राकृतिक चिकित्सा। जिसके पास भी यह पुस्तक रहेगी और वह इसका अनुसरण करता रहेगा, उसे डॉक्टर की कभी आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
Prema/प्रेमा
• विश्व के महान कथा-शिल्पी प्रेमचंद का प्रारंभिक उपन्यास है—प्रेमा। विधवा जीवन की ज्वलंत समस्या को सशक्त ढंग से उठाने में सक्षम यह कथा विधवा विवाह की पक्षधर है।
• इसमें नायक सहसा ही समाज सुधार का बीड़ा उठाकर प्रेमा के साथ विवाह करने का वचन भंग कर देता है, जिससे विरोध की विचित्र स्थितियाँ उत्पन्न हो जाती हैं।
• यहाँ भी प्रेमचंद का तीखा विरोध उन शक्तियों के प्रति है, जो धर्म के नाम पर पाखंडों में डूबी हैं।
• इसी के साथ प्रेमा का पूर्व उर्दू-रूप ‘हमखुर्मा व हमसवाब’ भी दिया गया है। यहाँ इसे प्रस्तुत करने का वास्तविक कारण यह है कि प्रेमचंद साहित्य के अध्येता दोनों रूपों का अध्ययन कर प्रेमचंद की कथाधर्मिता को समझ-परख सकें।
• उपन्यास सम्राट के गौरव से विभूषित संसार के अग्रणी कथाकारों में प्रतिष्ठित प्रेमचंद की ये कृतियां सम्पूर्ण रूप में प्रामाणिक मूल पाठ हैं।
Pushpgandha/पुष्पगंधा
मन और देह-दोनों अलग-अलग कैसे बातें कर पाते हैं . . .’ क्या आपने सोचा है कभी? एक यह शोभना है, प्यासी अतृप्त और सपनीली।. . . और एक है यह उदयन, एक है उमाकान्त; एक है श्रीमोहन और एक है कामेश्वर राय। लेकिन नहीं, यह प्यासी शोभना तो एक तट चाहती थी—तट पर खड़ी पुष्प बिखराते-बिखराते स्वयं बिखर जाने वाली पुष्पगंधा तो वह नहीं थी. . .
एक ऐसे अद्भुत नारी-मन की अन्तरंग कथा है पुष्पगंधा, जिसकी सुगन्ध आपको मोह लेगी . . .सुप्रसिद्ध उपन्यासकार भगवतीप्रसाद वाजपेयी का यह एक सशक्त उपन्यास है!
Rajyabhishek/राज्याभिषेक
प्रभो! राक्षसकुल-निधि रावण आपसे यह भिक्षा माँगता है कि आप सात दिन तक वैरभाव त्यागकर सैन्य सहित विश्राम करें। राजा अपने पुत्र की यथाविधि क्रिया करना चाहता है। वीर विपक्षी वीर का सदा सत्कार करते हैं। हे, बली। आपके बाहुबल मे वीरयोनि स्वर्णलंका अब वीर शून्य हो गई है। विधाता आपके अनुकूल है और राक्षसकुल विपत्तिग्रस्त है, इसलिए आप रावण का मनोरथ पूर्ण करें।’
• महाबली रावण दीन-हीन सा हो उठा था पुत्र मेघनाद के मरने के बाद। वह राक्षसराज, जिसकी हुंकार से दिशाएँ थर्राती थीं रामभद्र के पास किसी याचक की तरह यह प्रार्थना भिजवाई थी ।
• आचार्य जी का यह प्रसिद्ध उपन्यास राम द्वारा लंका पर चढ़ाई से प्रारंभ होता है और सीता के भू प्रवेश तक चलता है। इसकी एक-एक पंक्ति, एक-एक दृश्य ऐसा जीवंत है कि पाठक को बरबस लगता है कि वह स्वयं उसी युग में जी रहा है।
The Jannayak Karpoori Thakur (Hindi)/ Karpuri Thakur/कर्पुरी ठाकुर
जननायक कर्पूरी ठाकुर पुस्तक बिहार के महान नेता कर्पूरी ठाकुर के जीवन और विचारधारा पर आधारित है। यह उनके संघर्ष, सादगी और समाज के प्रति उनकी निस्वार्थ सेवा को दर्शाती है। पुस्तक उनके समाजवादी दृष्टिकोण, शिक्षा, समानता और न्याय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को उजागर करती है, जो हर पाठक को प्रेरणा देती है।
