Publish with Us

Follow Penguin

Follow Penguinsters

Follow Penguin Swadesh

Paro/पारो

Paro/पारो

Nagarjun/नागार्जुन
Select Preferred Format
Buying Options
Paperback / Hardback

पारो मूलतः मैथिली उपन्यास है, जिसका पारो नाम से ही हिन्दी में यह रूपांतरण हुआ है। उद्देश्य प्रधान इस उपन्यास में अनमेल विवाह के परिणाम और बिहार के मैथिल जनपद में विवाह की गलत परम्पराओं की आलोचना की गई है।
मैथिल जनपद जहाँ विवाह करने की विचित्र प्रथा है, विवाह के लिए यहाँ ‘सोरठ’ का मेला लगता है, जिसमें कन्याओं के अभिभावकों द्वारा वर का चयन किया जाता है। इस उपन्यास की नायिका पार्वती भी इसी समस्या की शिकार है। उसका विवाह पैंतालीस वर्षीय चुल्हाई चौधरी से कर दिया जाता है। प्रौढ़ता के अंतिम कगार पर खड़ा यह पथिक उसको न तो मानवीय रूप से संतुष्ट कर पाता है, न शारीरिक रूप से ही। 

Imprint: Hind Pocket books

Published: Feb/2023

ISBN: 9780143460954

Length : 108 Pages

MRP : ₹250.00

Paro/पारो

Nagarjun/नागार्जुन

पारो मूलतः मैथिली उपन्यास है, जिसका पारो नाम से ही हिन्दी में यह रूपांतरण हुआ है। उद्देश्य प्रधान इस उपन्यास में अनमेल विवाह के परिणाम और बिहार के मैथिल जनपद में विवाह की गलत परम्पराओं की आलोचना की गई है।
मैथिल जनपद जहाँ विवाह करने की विचित्र प्रथा है, विवाह के लिए यहाँ ‘सोरठ’ का मेला लगता है, जिसमें कन्याओं के अभिभावकों द्वारा वर का चयन किया जाता है। इस उपन्यास की नायिका पार्वती भी इसी समस्या की शिकार है। उसका विवाह पैंतालीस वर्षीय चुल्हाई चौधरी से कर दिया जाता है। प्रौढ़ता के अंतिम कगार पर खड़ा यह पथिक उसको न तो मानवीय रूप से संतुष्ट कर पाता है, न शारीरिक रूप से ही। 

Buying Options
Paperback / Hardback

Nagarjun/नागार्जुन

error: Content is protected !!