
रसीदी टिकट भारतीय साहित्य की सबसे चर्चित आत्मकथाओं में से एक है। अमृता प्रीतम की यह आत्मकथा केवल एक लेखिका की जीवन-कथा नहीं, बल्कि एक संवेदनशील स्त्री की आत्मा का दस्तावेज़ है। अमृता ने इसमें अपने जीवन के उन अनुभवों को शब्द दिए हैं, जिन्हें अकसर लोग छिपा लेते हैं। साहिर लुधियानवी के प्रति उनके मौन और अधूरे प्रेम तथा इमरोज़ के साथ उनके आत्मीय, सहज और गहरे संबंधों की अनकही परतें पाठकों को प्रेम के विविध रूपों से परिचित कराती हैं। इन रिश्तों का चित्रण न तो आत्मप्रशंसा है और न ही आत्मदया, बल्कि जीवन को उसकी समूची जटिलता और संवेदनशीलता के साथ स्वीकार करने का साहस है। अमृता अपने संघर्षों, प्रेम, पीड़ा, रचनात्मक यात्राओं और सामाजिक रूढ़ियों से टकराने के अनुभवों को अद्भुत साहस और ईमानदारी के साथ रखती हैं। साहिर लुधियानवी और इमरोज़ के साथ उनके रिश्तों की अनकही परतें इस आत्मकथा को और अधिक आत्मीय और मानवीय बना देती हैं। यह पुस्तक अमृता के व्यक्तित्व और उनके समय को समझने की एक दुर्लभ कुंजी है।
Imprint: Penguin Swadesh
Published: Oct/2026
ISBN: 9789377303372 (Paperback)
Length : 178 Pages
MRP : ₹250.00