
इतिहास की बातें भारत के अतीत को तीक्ष्ण और अत्यंत प्रासंगिक दृष्टि से सामने लाती है। इन व्यापक संवादों में प्रतिष्ठित इतिहासकार रोमिला थापर और सूक्ष्म दृष्टि वाले लेखक तथा सामाजिक आलोचक नमित अरोड़ा इस बात की पड़ताल करते हैं कि इतिहास कैसे लिखा जाता है, कैसे याद रखा जाता है, और किस प्रकार उस पर संघर्ष होता है। दोनों मिलकर इतिहासकार के कार्य-क्षेत्र के पर्दे के पीछे झाँकते हैं—साक्ष्यों का मूल्यांकन कैसे किया जाता है, व्याख्याएँ कैसे निर्मित होती हैं, और क्यों अतीत राजनीति तथा पहचान की लड़ाई का मैदान बन गया है। जाति और लिंग से लेकर धर्म, मिथक और राष्ट्रवाद तक, वे कई विवादित विषयों पर फिर से विचार करते हैं और प्रश्न उठाते हैं—हम वास्तव में अपने अतीत के बारे में क्या जान सकते हैं, और आज यह इतना महत्त्वपूर्ण क्यों है? परिणामस्वरूप यह पुस्तक एक साथ विद्वत्तापूर्ण और सहज रूप से पठनीय बनती है—ऐसी पुस्तक जो विकृतियों और मिथक-निर्माण को चुनौती देती है, साथ ही इतिहास को जिज्ञासा, तर्क-वितर्क और आलोचनात्मक चिंतन की प्रक्रिया के रूप में उत्सवपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करती है। ऐसे समय में जब यह विधा अनेक चुनौतियों से घिरी है, यह पुस्तक कठोर और प्रमाण-आधारित शोध का सशक्त समर्थन करती है और साथ ही यह याद दिलाती है कि इतिहास की समस्त जटिलताओं के साथ जुड़ना एक गहन यात्रा पर निकलने जैसा है—ऐसी खोज, जो केवल अतीत ही नहीं, बल्कि स्वयं हमारे भीतर भी झाँकती है।
Imprint: Penguin Swadesh
Published: Sep/2026
ISBN: 9789377305345 (Paperback)
Length : 280 Pages
MRP : ₹499.00