
स्वास्थ्य रक्षा का अर्थ है शरीर की रोग, विकार, आलस्य आदि से रक्षा करना। शास्त्रों के अनुसार आध्यात्मिक (मन से उत्पन्न दु:ख), आधिभौतिक (शारीरिक दु:ख) तथा आधिदैविक (प्रकृत दु:ख) रूपों से भावना की रक्षा, स्वास्थ्य रक्षा है। आचार्य चतुरसेन ने आयुर्वेद के तरीके से स्वस्थ रहने के मूलमंत्र को इस पुस्तक में दिया है। स्वास्थ्य रक्षा के अनेक मूलमंत्र हैं जैसे पौष्टिक और स्वास्थ्यकर भोजन खाना। भोजन नियत समय पर और भूख लगने पर करना चाहिए। सादा, सुपाच्य, सन्तुलित और पौष्टिक भोजन अधिक लाभदायक है। घी, तेल, फल, सब्जी के प्रयोग से भोजन में पौष्टिकता आती है। सड़े-गले बासी, अपाच्य भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। यह पुस्तक अपने आप में एक कंपलीट हैल्थ गाइड है, जो हर किसी के लिए उपयोगी है।
Imprint: Hind Pocket Books
Published: Jun/2023
ISBN: 9780143462026
Length : 160 Pages
MRP : ₹250.00