
सावरकर ने मार्सेलिस में जहाज से भागने की अपनी बहुप्रचारित कोशिश के दौरान क्या तूफानी सागर का सामना किया था? क्या वे और गांधीजी ‘मित्र के रूप में’ लंदन में रहे, जैसाकि सावरकर ने गांधी-हत्या के मुकदमे के दौरान अदालत में दावा किया? क्या वे मुसलमानों के विरोधी इसलिए हुए, क्योंकि अंडमान में जेलरों ने क्रूरता की थी? अंग्रेज सरकार से की गई उनकी ‘दया याचिकाओं’ से क्या निष्कर्ष निकाला जाए? क्या उन्होंने अंग्रेजों को वचन दिया था कि मुझे रिहा कर देंगे, तो मैं आपके लिए ‘राजनीतिक रूप से उपयोगी’ साबित होऊँगा, जबकि अंगरेजों ने उनसे ऐसी कोई माँग की ही नहीं थी? भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान, सावरकर ने क्या अंग्रेजों को ‘दिलो-जान से’ सहयोग करने का वादा किया था? वे अंगरेजों से चाहते क्या थे? क्या सावरकर ने ही, वह रास्ता दिखाया था, जिसपर नेताजी सुभाष बोस गए?
नया मसीहा में अरुण शौरी ने सावरकर की किताबों, निबंधों, भाषणों और वक्तव्यों के गहराई से अध्ययन के आधार पर उपरोक्त तथा अन्य सवालों के जवाब खोजे हैं। उन्होंने ब्रिटिश सरकार के अभिलेखागार में उपलब्ध दस्तावेज़ों को खँगाला। इस तरह वे हमें समकालीन सामग्री से भी परिचित कराते चलते हैं, और उन तथ्यों को रोशनी में लाते हैं, जो आपको हैरत में डाल देंगे।
Imprint: Penguin Swadesh
Published: Oct/2026
ISBN: 9789377305628 (Paperback)
Length : 576 Pages
MRP : ₹750.00
The one certainty in life, the one appointment which each of us will just have to face, is the one for which we do the least to prepare-death. Preparing for Death explores the questions that have puzzled humanity from the very beginning as evinced by the rituals, texts and philosophies that surround death. From the […]