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Tipu Sultan Hindi / टीपू सुल्तान

Tipu Sultan Hindi / टीपू सुल्तान

Mysore Ke Satta-Angtral Ki Gatha (1760-1799) / मैसूर के सत्ता अंतराल की गाथा (1760-1799)

Vikram Sampat / विक्रम सम्पत
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Paperback / Hardback

टीपू सुल्तान की विवादित विरासत आज भी भारत और उसकी समकालीन राजनीति को उलझाती रहती है। भारतीय सैन्य इतिहास का यह रहस्यमय पात्र आधुनिक इतिहासकारों के लिए अब भी एक बड़ी पहेली है। वह अलग-अलग लोगों के लिए अलग अर्थ रखता है। टीपू का सत्ता में आना संयोगवश हुआ। उसके पिता हैदर अली मैसूर के महाराजा की कृपा से आगे बढ़े थे। लेकिन चतुर और अवसरवादी हैदर ने अपने ही संरक्षक को अपदस्थ कर 1761 में वोडेयार वंश से मैसूर का सिंहासन छीन लिया। टीपू को सत्ता सहज रूप से मिल गई थी, इसी सफलता के अहंकार और युद्धोन्माद में टीपू ने मालाबार, मंगलौर, त्रावणकोर और कूर्ग पर घातक आक्रमण किए। टीपू एक साहसी सैनिक और कुशल प्रशासक था। लेकिन धार्मिक मामलों में उसकी अदूरदर्शिता ने वह संतुलन तोड़ दिया, जिसे हैदर हिंदू बहुसंख्यकों के साथ बनाए रखना चाहता था।

Imprint: Penguin Swadesh

Published: May/2026

ISBN: 9780143479918 (Paperback)

Length : 772 Pages

MRP : ₹999.00

Tipu Sultan Hindi / टीपू सुल्तान

Mysore Ke Satta-Angtral Ki Gatha (1760-1799) / मैसूर के सत्ता अंतराल की गाथा (1760-1799)

Vikram Sampat / विक्रम सम्पत

टीपू सुल्तान की विवादित विरासत आज भी भारत और उसकी समकालीन राजनीति को उलझाती रहती है। भारतीय सैन्य इतिहास का यह रहस्यमय पात्र आधुनिक इतिहासकारों के लिए अब भी एक बड़ी पहेली है। वह अलग-अलग लोगों के लिए अलग अर्थ रखता है। टीपू का सत्ता में आना संयोगवश हुआ। उसके पिता हैदर अली मैसूर के महाराजा की कृपा से आगे बढ़े थे। लेकिन चतुर और अवसरवादी हैदर ने अपने ही संरक्षक को अपदस्थ कर 1761 में वोडेयार वंश से मैसूर का सिंहासन छीन लिया। टीपू को सत्ता सहज रूप से मिल गई थी, इसी सफलता के अहंकार और युद्धोन्माद में टीपू ने मालाबार, मंगलौर, त्रावणकोर और कूर्ग पर घातक आक्रमण किए। टीपू एक साहसी सैनिक और कुशल प्रशासक था। लेकिन धार्मिक मामलों में उसकी अदूरदर्शिता ने वह संतुलन तोड़ दिया, जिसे हैदर हिंदू बहुसंख्यकों के साथ बनाए रखना चाहता था।

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