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East and West: Stories of India

Pippa Rann Books commissioned this book for the 75th anniversary of India’s independence.

East and West is a captivating collection, exploring contrasting and complementary aspects of India through stories of seekers, and stories of ordinary Indians; stories of heroes, frauds, and victims; stories set in America, and stories set in India.

“I found myself in each story living the situation and the outcome”
MEENA KAUSHIK PhD., CEO OF QUANTUM CONSUMER SOLUTIONS, BANGALORE

“Unique, wonderfully written, and enchanting. Not only worth reading, but reading again, and reading aloud to others”
– RAVI RAVINDRA, PhD, AUTHOR OF THE BHAGAVAD GITA: A GUIDE TO NAVIGATING THE BATTLE OF LIFE

“The Catherine Ann Jones dharma is storytelling”
– R. E. MARK LEE, AUTHOR OF WORLD TEACHER: THE LIFE AND TEACHINGS OF J. KRISHNAMURTI

“Catherine Ann Jones knows India and loves its people with the deepest understanding. She writes with the clarity and delicacy of butterfly wings” – ROSHAN SETH, ACTOR

Don Quijote de la Mancha

“Celebrar una nueva edición de Don Quijote de la Mancha supone presentar lo mejor de la historia española y uno de los grandes episodios de la cultura occidental, una cultura abierta, sólo válida cuando sabe dialogar con las otras culturas. Los clásicos se mantienen vivos porque nos ayudan a comprender el pasado, pero también porque saben relacionarse con el presente y seguir conversando con el mundo.

Las aventuras de este libro y los diálogos entre don Quijote y Sancho nos invitan a seguir hablando sobre los destinos del ser humano, los retos que hay en cada conflicto y en cada decisión, las bondades y los peligros de la convivencia, la manera que tiene el amor de iluminar el mundo o de inducir a engaños, la responsabilidad que late en cada uno de nuestros actos. Porque, al final, es la ética humana y el compromiso con la justicia lo que nos conmueve en cada episodio, ya sea fruto de un error o de la lucidez, de una ilusión certera o de un equívoco. Las lejanas llanuras de la Mancha aspiran a convertirse en un lugar habitable para cualquier lector, más allá de los kilómetros y los siglos”. – Luis García Montero

Dukhwa Main Ka Se Kahoon/दुखवा मैं कासे कहूँ

हिन्द पॉकेट बुक्स ने हमारे युग के इस सर्वश्रेष्ठ गल्पकार आचार्य चतुरसेन की सम्पूर्ण कहानियों को सिलसिलेवार एक साथ प्रकाशित करने की योजना के अन्तर्गत 5 भागों में संकलित किया है। इन कहानियों की यह विशेषता है कि ये सर्वथा प्रामाणिक मूल पाठ हैं, जो सभी पाठकों के साथ-साथ हिन्दी कहानियों के अध्येताओं और शोधार्थियों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। ‘दुखवा मैं कासे कहूँ’ उनकी सम्पूर्ण कहानियों की दूसरी कड़ी है। इसमें 26 कहानियाँ दी गई हैं। सम्पूर्ण कहानियों का पहला भाग ‘बाहर-भीतर’ है। 

Kahani Khatam Ho Gai/कहानी ख़त्म हो गई

आधुनिक युग के सर्वश्रेष्ठ गल्पकार आचार्य चतुरसेन की सम्पूर्ण कहानियों को सिलसिलेवार एक साथ प्रकाशित करने की योजना के अन्तर्गत 5 भागों में संकलित किया गया है। इन संकलनों की यह विशेषता है कि ये कहानियाँ सर्वथा प्रामाणिक मूल – पाठ हैं, जो सभी पाठकों के साथ-साथ हिन्दी कहानियों के अध्येताओं और शोधार्थियों के लिए भी महत्त्वपूर्ण हैं। ‘कहानी ख़त्म हो गई’ सम्पूर्ण कहानियों की श्रृंखला की पाँचवीं एवं अंतिम कड़ी है। इसमें 24 कहानियाँ दी गई हैं, जो चतुरसेन के लेखन के शिखर को रेखांकित करती हैं। 

Soya Hua Shahar/सोया हुआ शहर

आचार्य चतुरसेन की सम्पूर्ण कहानियों को पाँच भागों में प्रकाशित करने के सिलसिले की यह चौथी कड़ी है। उनकी कहानियाँ विविध विषयों में फैली हुई हैं। ‘सोया हुआ शहर’ में यह विभाजन इस प्रकार है – सोया हुआ शहर, ताज मुगलकालीन।
• दे ख़ुदा की राह पर, कमल किशोर, सुखदान सामाजिक।
• शर्मा जी, पंडित छोटेलाल, चैधरी संस्मरणात्मक।
• जापानी दासी, तिकड़म, चिट्ठी की दोस्ती कौतुक प्रधान।
• राजा साहब के प्राइवेट सेक्रेटरी, राजा साहब की कुतिया, राजा साहब की पतलून सामंतकालीन।
• चैथी भांवर, घोड़ी का मोल – तोल, राज्यों की चैसर वीरता प्रधान।
• हैदरअली, विश्वासघात, दिल्ली दरबार में शिवाजी राजे ऐतिहासिक।
• कैदी, दियासलाई की डिबिया, अब्बाजान, मनुष्य का मोल भावप्रधान।
• जीजाजी, प्लेंचेट, दण्ड, सविता, रोगी – परीक्षा समस्याप्रधान।
• बहन तुम कहाँ, मैं तुम्हारी आँखों को नहीं, तुम्हें चाहता हूँ पारिवारिक।  

Adbhut Manav/अद्भुत मानव

‘मेरी सारी हिम्मत समाप्त हो गई। मेरी सामर्थ्य अब इतनी भी नहीं रही कि मैं यान को अपने नियंत्रण में रख सकूं उस क्षण, मेरी प्यारी लिज़ा, बस तुम्हारी स्मृति मेरे मस्तिष्क में थी, मैंने पृथ्वी को और जीवन को नमस्कार किया। मेरी चेतना धीरे-धीरे लुप्त हो गई और मैंने जाना कि मेरी मृत्यु हो गई।’
लिज़ा ने कांपते हाथों सेज़ोरोवस्की का हाथ पकड़ लिया और एक सिसकारी उसके कण्ठ से निकल पड़ी। फिर वह ज़ोरोवस्की की गोद में गिरकर फफक-फफक कर रो पड़ी।
बहुमुखी प्रतिभा के धनी आचार्य चतुरसेन का एक वैज्ञानिक उपन्यास, जिसमें उन्होंने परमाणु शक्ति की कल्पनातीत क्षमताएँ अंतरिक्ष में मानव की उड़ान तथा दुरूह ध्रुवीय प्रदेश की साहसिक यात्रा का बड़ा ही रोमांचक चित्र प्रस्तुत किया है। इसे पढ़ते-पढ़ते, निश्चय ही आप एक विचित्र लोक में भ्रमण करने लगेंगे। 

Bahate Aansu/बहते आँसू

टूटती रात मे उन्हें कुछ झपकी आई थी, कि एक हृदय वेधी चित्कार से उनकी नींद टूट गई। चौपाल पर जो दो चार व्यक्ति सो रहे थे, वे उठकर बैठ गए। एक ने कहा- मालूम होता है उसका लड़का चल बसा। गज़ब हो गया, पहाड़ टूट पड़ा। आसार तो कल ही से अच्छे न थे, अब न जिएगा। बहते आँसू नारी के दिल की चीत्कार की एक ऐसी कहानी है, जो आपके मन और आत्मा तक को झकझोर कर रख देगी। 

Chingariyan/चिंगारियाँ

प्रथम स्वाधीनता संग्राम में, अंग्रेज़ों की सत्ता उलटने के लिए, पूरे देश में जागृति की एक प्रबल लहर दौड़ गई। शत्रुओं को भारतीय शूरों की वीरता व देशभक्ति का लोहा मानना पड़ा — वे उनके नाम से कांपत थे, पर फिर क्या कारण थे कि राष्ट्रीय शक्तियों को अंग्रेजों के सामने पराजय का मुँह देखना पड़ा? इस उपन्यास में मुख्यतया दिल्ली, झांसी और कानपुर के आजादी पाने के संघर्षों का मर्मस्पर्शी चित्रण है। 

Dada/दादा

समाज में ‘दादा’ कहलाने वाले व्यक्तियों से प्रायः लोग भयभीत रहते हैं। परन्तु लोकप्रिय उपन्यासकार आचार्य चतुरसेन के इस उपन्यास का ‘दादा’ एक ऐसा चरित्र है, जो अपने कारनामों से लोगों को आतंकित तो करता है, परन्तु मौका पड़ने पर किसी की सहायता के लिए जान पर भी खेल जाता है। कोई व्यक्ति प्रेम के लिए क्या कुछ कर सकता है, ‘दादा’ इसका अन्यतम उदाहरण है। इसके अतिरिक्त इस पुस्तक में आचार्यजी की कुछ ऐसी चुनी हुई कहानियां भी हैं, जिनका कथानक आपको मंत्रमुग्ध कर देगा। 

Duniya Rang Rangili/दुनिया रंग-रंगीली

यह एक दार्शनिक का यात्रा-वर्णन है, जो विचारों एवं भावनाओं को उद्वेलित करता है। इसमें अमेरिका का सूक्ष्म एवं तलस्पर्शी निरीक्षण तो है ही, लेकिन भारतीय जीवन में जो कुछ शाश्वत एवं उदात्त है, उसका भी प्रभावोत्पादक निरूपण है। इस पुस्तक की भाषा अत्यंत सरल एवं रोचक है। एक बार पढ़ेंगे तो बार-बार पढ़ने का मन करेगा। 

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