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Sadgati Tatha Anya Kahaniya/सद्गति तथा अन्य कहानियाँ

सद्गति कहानी सवर्ण द्वारा अछूत पर किए गए अत्याचार का मार्मिक चित्र प्रस्तुत करती है। दुक्खी अपने पुत्र के विवाह के लिए शुभ लग्न निकलवाने पंडित जी के घर जाता है। पंडित उसे लकड़ी फाड़ने के काम पर लगा देता है। भूख और प्यास से छटपटाता हुआ दुक्खी वहीं ढेर हो जाता है और पंडित जी भोर में उसके पाँव में रस्सी बाँधकर गाँव के बाहर फेंक देते हैं और लौटकर अपने शुद्धिकरण में लग जाते हैं।
इसी के साथ इस संग्रह में प्रेमचंद की अन्य श्रेष्ठ कहानियाँ भी दी गई हैं, जो प्रेरक भी हैं और बेहद रोचक भी। सभी कहानियाँ सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ सशक्त आवाज़ उठाने की शक्ति रखती हैं।

Sangram Tatha Prem ki Vedi/संग्राम तथा प्रेम की वेदी

विश्व के महान कथा-शिल्पी प्रेमचंद ने अपने नाटक संग्राम में जमींदार और किसान की शाश्वत समस्या को उजागर किया है। सबलसिंह एक जमींदार है, जो अपने छल-बल से गरीब किसान हलधर को जेल भिजवाकर उसकी नवेली सुंदर पत्नी राजेश्वरी को अपना बनाना चाहता है।
राजेश्वरी यह सब जानती है और अपमान का बदला लेने खुद ही जमींदार के पास पहुँचती है। सबल सिंह जब अपना वासनायुक्त प्रेम प्रकट करता है, तब वह सबकुछ बता देती है। जीत नारी की होती है और जमींदार का घर बर्बाद हो जाता है।
इसी संग्रह की एक अन्य कृति प्रेम की वेदी भी एक सशक्त रचना है, जिसमें प्रेम के शाश्वत सत्य को उद्घाटित किया गया है।
कथा-सम्राट के गौरव से विभूषित संसार के अग्रणी कथाकारों में प्रतिष्ठित प्रेमचंद की ये कृतियाँ संपूर्ण रूप से प्रामाणिक मूल पाठ हैं।

Tapti Dupahri/तपती दोपहरी

तपती दोपहरी अभिमन्यु अनत का एक अतयंत हृयस्पर्शी उपन्यास है, जिसमें मारिशस के एक निर्धन हिंदू-परिवार की रुला देने वाली कहानी दी गई है, इसमें इस द्वीप के शोषितों की दर्द भरी ज़िंदगियों की जीती-जागती तस्वीर पेश की गई है। अनुभूति की तीव्रता और रोचकता की दृष्टि से यह उपन्यास बेजोड़ है। इसमें अपने आस-पास के माहौल से लाचार व्यक्ति के भीतर उठती आँधी का मनोवैज्ञानिक चित्रण बड़े ही सधे ढंग से किया गया है। अध्यापन, संपादन और लेखन से एक साथ जुडे अभिमन्यु अनत रंगमंच से भी संबद्ध रहे हैं और अवकाश के क्षणों में पेंटिंग्स बनाने का भी शौक रखते हैं। इसीलिए उनकी इस कृति में जीवन के तमाम रंगों की झलक एक साथ दिखाई पड़ती है।

Thank You Mr. Glad!/थैंक यू मिस्टर ग्लाड!

मराठी के इसी नाम से प्रकाशित बेस्टसेलर एवं अत्यंत चर्चित नाटक का यह हिंदी अनुवाद है। यह नाटक दो चरित्रों के संघर्ष का नाटक है। एक हैं—एंग्लो इंडियन जेलर मिस्टर ग्लाड, जिनके नाम से ही कैदियों और जेल-कर्मचारियों की रूहें काँपती हैं, जिनके कदमों की आहट पाकर पेड़ों पर बैठे परिंदे भी सहमकर चहचहाना बंद कर देते हैं, लेकिन वे ख़ुद अंतर्द्वंद्व का शिकार हैं। दूसरी ओर है वीरभूषण पटनायक एक नक्सलवादी—जिसे फाँसी की सज़ा देकर जेल भेजा जाता है। इन दोनों का आमना-सामना होते ही दो व्यक्तियों का टकराव शुरू हो जाता है। अंत तक टकराव चलता रहता है और प्रेक्षक निर्णय नहीं कर पाता कि आख़िर जीत किसकी हुई।
यह नाटक प्रकाशन के पूर्व ही कई जगह मंचित हो चुका है। गुजराती में इसका मंचन हो रहा है और इसी नाटक पर इसी नाम से एक हिंदी फिल्म भी बन चुकी है।

Vaishravani/वैश्रवणी

वैश्रवणी रावण की बहन एवं विद्युतजिह्वा की धर्मपत्नी थी। शादी के कुछ ही दिन बाद यह विधवा हो गई थी। यह राम से पुनर्विवाह करना चाहती थी, लेकिन राम और लक्ष्मण दोनों ने ही इससे विवाह करने से इनकार कर दिया। वैश्रवणी ने सोचा कि यह सब सीता के कारण हुआ तो, जब इन्होंने सीता पर हमला किया तो लक्ष्मण ने इनके नाक-कान काटकर इन्हें कुरूप बना दिया।
यह उपन्यास इन्हीं वैश्रवणी के जीवन पर आधारित है। मूलतः यह उपन्यास उड़िया भाषा में लिखा गया और बेस्टसेलर रहा। 2010 में साहित्य अकादमी पुरस्कार के अलावा इस कृति को कई अन्य पुरस्कार मिल चुके हैं।

Zindagi/ज़िंदगी

ज़िंदगी सामाजिक मनोभूमि पर लिखा गया एक पारिवारिक उपन्यास है। इसके केंद्रीय पात्र हैं—गोपीशाह। वे एक बड़े परिवार के मुखिया हैं। परिवार के अधिकांश सदस्य भौतिक दृष्टिवादी हैं। परिणामतः उनका जीवन या तो अति सुख में बीतता है या अति दुःख में। गोपीशाह का कहना है कि वास्तविक जीवन सुख-दुःख से ऊपर की वस्तु है और ऐसा जीवन तभी जिया जा सकता है, जब वह योजनाबद्ध हो। साथ ही उसमें दुःखी के दुःख निवारण की भावना स्वार्थरहित हो। ज़िंदगी का यही निचोड़ प्रस्तुत उपन्यास का कथ्य है।
उपन्यास में चरित्र और घटनाओं का ऐसा अपूर्व समन्वय हुआ है कि दोनों ही प्रधान हो उठे हैं और दोनों की प्रधानता में ही एक अनूठे-जीवन रस का संचार हो रहा है। हमारा विश्वास है, ज़िंदगी का यह जीवन-रस वर्तमान तथा भावी पीढ़ी के लिए प्रेरक सिद्ध होगा।

Shakuntala/शकुन्तला

शकुन्तला एक विश्वप्रसिद्ध नाटक है। मूलत: यह संस्कृत में लिखा गया है, लेकिन इसका अनुवाद संसार की सभी प्रमुख भाषाओं में हुआ है। यह एक बहुत ही रोचक कहानी है। राजा दुष्यन्त और शकुन्तला की प्रेम कहानी. . . राजा दुष्यन्त अपनी प्रेमिका शकुन्तला से गांधर्व विवाह करता है, लेकिन बाद में वह एक ऋषि के शाप के कारण अपनी ही प्रेमिका को भूल जाता है। उसकी प्रेमिका शकुन्तला गर्भवती होती है और पतिता होने के कारण जंगल में चली जाती है, जहाँ वह एक बालक को जन्म देती है, जिसका नाम भरत रखा जाता है। बाद में राजा को अपनी प्रेमिका की याद आ जाती है और वह शकुन्तला और उसके बेटे को अपना लेता है। शकुन्तला क बेटा भरत चक्रवर्ती सम्राट बनता है और उसी के नाम पर इस देश का नाम भारतवर्ष हुआ।

Ponniyin Selvan 5

In this gripping penultimate volume of the Ponniyin Selvan series, Kalki masterfully draws the threads of intrigue, love, and vengeance towards a breathtaking crescendo.
The Chozha empire reels from the shock of an assassination and finds itself on the brink of chaos. Even as rumours swirl, and conspirators move in the shadows, the question of rightful succession grows ever more urgent.
Fearless and quick-witted, Vandiyatevan navigates treacherous waters as he uncovers secrets that could shatter the royal line. Arulmozhi Varman—torn between personal convictions and imperial duty—must confront the weight of destiny as he stands poised to shape the future of the kingdom.
Meanwhile, Nandini’s tragic past and her thirst for revenge arrive at a critical juncture, pushing key players into making impossible choices.
As destinies converge and sacrifices are made, the stage is set for a climactic resolution that will determine the future of the Chozha dynasty.

Ponniyin Selvan 6

In the concluding part of Ponniyin Selvan, the fates of beloved characters and the Chozha empire reach their dramatic fulfilment. Secrets long buried come to light, revealing the true motivations behind Aditya Karikalan’s death and the tragic complexities of Nandini’s life. As Arulmozhi Varman prepares to embrace his destiny, the intricate political and emotional tapestry woven throughout the saga finds powerful resolution.
Vandiyatevan’s courage, Kundavai’s unwavering wisdom, and sacrifices by unsung heroes, converge in a stirring finale marked by love, loss, and redemption. With justice, duty, and fate in tense balance, Kalki delivers an unforgettable climax to a historic epic, an epic mirroring the values, aspirations and achievements he visualised as a writer and liberal humanist, for the future of his own country, and for the world.

The Book of Killings

Arjuna versus Karna

Duryodhan versus Bheem

Shikandin versus Bheeshma

Dhritarashtra versus himself

The war between the two sets of cousins is ready to blow up. Krishna has just finished singing the Gita to Arjuna. The war is about to start….and this is a war like no other with boons, curses, tricks, strategies and games deployed to maximise each side’s chances of victory.

The Book of Killings is the eagerly awaited third instalment of the Mahabharata trilogy, which began explosively with The Book of Vows and was then followed by The Book of Discoveries. Imagined afresh and composed in a style that captures the power, charm and ambiguity of Vyasa’s Mahabharata, this book dramatizes the 18-day epic war and its aftermath in the Mahabharata.

Grounding his telling in the original Sanskrit version, Majmudar has recreated the ancient epic for a contemporary audience. His finest work yet, this is one of the most accessible, magical and unputdownable retellings of the Mahabharata.

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