टूटती रात मे उन्हें कुछ झपकी आई थी, कि एक हृदय वेधी चित्कार से उनकी नींद टूट गई। चौपाल पर जो दो चार व्यक्ति सो रहे थे, वे उठकर बैठ गए। एक ने कहा- मालूम होता है उसका लड़का चल बसा। गज़ब हो गया, पहाड़ टूट पड़ा। आसार तो कल ही से अच्छे न थे, अब न जिएगा। बहते आँसू नारी के दिल की चीत्कार की एक ऐसी कहानी है, जो आपके मन और आत्मा तक को झकझोर कर रख देगी।
Catagory: Fiction
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Chingariyan/चिंगारियाँ
प्रथम स्वाधीनता संग्राम में, अंग्रेज़ों की सत्ता उलटने के लिए, पूरे देश में जागृति की एक प्रबल लहर दौड़ गई। शत्रुओं को भारतीय शूरों की वीरता व देशभक्ति का लोहा मानना पड़ा — वे उनके नाम से कांपत थे, पर फिर क्या कारण थे कि राष्ट्रीय शक्तियों को अंग्रेजों के सामने पराजय का मुँह देखना पड़ा? इस उपन्यास में मुख्यतया दिल्ली, झांसी और कानपुर के आजादी पाने के संघर्षों का मर्मस्पर्शी चित्रण है।
Dada/दादा
समाज में ‘दादा’ कहलाने वाले व्यक्तियों से प्रायः लोग भयभीत रहते हैं। परन्तु लोकप्रिय उपन्यासकार आचार्य चतुरसेन के इस उपन्यास का ‘दादा’ एक ऐसा चरित्र है, जो अपने कारनामों से लोगों को आतंकित तो करता है, परन्तु मौका पड़ने पर किसी की सहायता के लिए जान पर भी खेल जाता है। कोई व्यक्ति प्रेम के लिए क्या कुछ कर सकता है, ‘दादा’ इसका अन्यतम उदाहरण है। इसके अतिरिक्त इस पुस्तक में आचार्यजी की कुछ ऐसी चुनी हुई कहानियां भी हैं, जिनका कथानक आपको मंत्रमुग्ध कर देगा।
Duniya Rang Rangili/दुनिया रंग-रंगीली
यह एक दार्शनिक का यात्रा-वर्णन है, जो विचारों एवं भावनाओं को उद्वेलित करता है। इसमें अमेरिका का सूक्ष्म एवं तलस्पर्शी निरीक्षण तो है ही, लेकिन भारतीय जीवन में जो कुछ शाश्वत एवं उदात्त है, उसका भी प्रभावोत्पादक निरूपण है। इस पुस्तक की भाषा अत्यंत सरल एवं रोचक है। एक बार पढ़ेंगे तो बार-बार पढ़ने का मन करेगा।
Hriday Ki Parakh/हृदय की परख
हृदय की परख आचार्य चतुरसेन का एक उत्कृष्ट सामाजिक उपन्यास है, इसमें एक रहस्यमयी नवयुवती की मार्मिक जीवन-गाथा है, जो समाज के लिए दर्पण है। किसी मनुष्य के हृदय में जब प्यास-सी उठती है, तो अजीब तरह की बेचैनी और छटपटाहट होने लगती है। मन चंचल होने लगता है और इसी के साथ शुरू होता है।
बहकना-भटकना। आचार्य चतुरसेन ने इसी मनोवैज्ञानिक सत्य को रोचक ढंग से हृदय की प्यास की कथा में मोती की तरह पिरोया है। यह कृति युवा मन को समझने का भी प्रयास करती है।
Bose (Hindi)/Subhash Babu/सुभाष बाबू
आम लोग सुभाष चंद्र बोस के गांधी से मतभेद और जर्मनी व जापान की मदद से द्वितीय विश्वयुद्ध में भारत को आज़ाद करवाने के प्रयासों के बारे में जानते हैं। लेकिन अब जो सूचनाएँ सामने आ रही हैं, वो बताती हैं कि उनके देश भर के क्रांतिकारियों से कैसे संबंध थे और अध्यात्म और खुफिया मिशनों से उनको कितना लगाव था। साथ ही, उन्होंने ब्रिटिश भारतीय सेना में विद्रोह पैदा करवाने के क्या-क्या प्रयास किए थे।
प्रश्न यह है कि क्या बोस वाकई नाजियों से सहानुभूति रखते थे? उन्होंने अपनी राजनीतिक छवि दांव पर क्यों लगाई? ऐसे ही कई सवालों के जवाब सुभाष बाबू नाम की यह पुस्तक देती है।
All Your Stranger (Hindi)/Saath Rehna, Ajnabi/साथ रहना, अजनबी
हिया चौधुरी के स्क्रैपबुक के डीटेल जानने के बाद रिवाना के पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक जाती है। हिया की मौत और रिवाना के बुरे सपनों के बीच की समानताएँ उसकी रातों की नींद उड़ा देती हैं। रिवाना तुरंत कोलकाता के लिए टिकट बुक करा लेती है। उसे हिया के घर जाकर उसकी मौत का सच पता करना ही होगा। हिया चैधुरी के बहाने आख़िर अजनबी उसे क्या बताना चाहता है? आख़िर वो उससे चाहता क्या है? रिवाना अब इन सवालों के जवाबों का इंतज़ार नहीं करती, लेकिन उसकी ये खोज क्या उसे अजनबी के बनाए हुए किसी नए चक्रव्यूह में ले जाएगी? इस रास्ते पर चलते हुए रिवाना को अपने ही बारे में और कौन से गहरे राज़ पता चलेंगे. . . क्या इससे उसे बाहर निकलने का रास्ता मिलेगा या वो हमेशा के लिए बर्बाद हो जाएगी।
Hriday Ki Pyas/हृदय की प्यास
हृदय की प्यास आचार्य चतुरसेन का अत्यंत महत्त्वपूर्ण उपन्यास है। इसमें उन्होंने ऐसे युवक-युवतियों की सरस कथा कही है, जो वासनाओं की ओर झुकते हैं और फिर भावना तथा कर्तव्य की पहेली को सुलझाने के प्रयास में लग जाते हैं। प्रारंभ से अन्त तक पठनीय एक अत्यंत रोचक उपन्यास।
Patthar Yug Ke Do But/पत्थर युग के दो बुत
भारतीय साहित्य में अधिकतर प्यार करने वाले युवा-युवतियों की कहानियाँ पढ़ने को मिली हैं। विवाह के बाद घटने वाली घटनाओं पर बहुत कम साहित्य लिखा गया है। इस कमी को यह उपन्यास पूरा करता है। आचार्य चतुरसेन के इस उपन्यास में सभी पात्र अपने पति या पत्नियों के अतिरिक्त अन्य व्यक्तियों के प्रति आकृष्ट हैं। वे साँपों की इस घाटी में आँख मूंदकर बढ़ते चले जाते हैं और तब तक नहीं रुकते जब तक विनाश सामने नहीं आ जाता। समाज में आज भी स्त्री-पुरुष के विवाहेतर संबंध अनुचित माने जाते हैं लेकिन ये सम्बन्ध अस्वाभाविक नहीं हैं। इसी विषय-वस्तु को आधार बनाकर एक मनोरंजक वर्णन आचार्य चतुरसेन ने किया है साथ ही इसकी कथा का गठन भी ऐसा है कि पाठक के मर्म को छुए बिना न रहे।
Rashtrapati Radhakrishnan/राष्ट्र्पति राधाकृष्णन
राष्ट्रपति राधाकृष्णन् इस युग के एक महान दार्शनिक और तत्त्व-चिन्तक के रूप में विश्व-विख्यात हैं। सारे संसार के विद्वान उन्हें प्रखर विद्वान की दृष्टि से देखते हैं। राजनीति से दूर रहते हुए भी उन्होंने भारतीय स्वाधीनता-आंदोलन में और स्वतंत्र भारत के निर्माण में भारी योगदान दिया है। विख्यात पत्रकार अवनीन्द्रकुमार विद्यालंकार ने अपनी इस पुस्तक में डा० राधाकृष्णन के प्रेरणाप्रद जीवन और उनके युगान्तरकारी विचारों का पूर्ण प्रामाणिक परिचय प्रस्तुत किया है।
