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Out of the Nest

High up in the trees, far above the jungle floor, there is one wide branch. And on that branch sit two nests. They share the same sky, the same tree, the same wind. But inside, they feel worlds apart.

In one nest, love looks like rules, protection, and getting things right. In the other, love feels like trust, freedom, and steady hands nearby. Both sets of parents care deeply. Both are trying. Both believe they are doing what love requires.

At first, it may seem easy to decide which nest is better.

But look closer.

This is not a story about perfect parents and imperfect ones. It is a story of a nest that grows. Where parents grow. Where children grow. Where love grows wiser.

With warmth and honesty, Ambika Agarwal invites parents to step out of comparison and into awareness. We are shaped by what shaped us. And every day, we can choose to love better.

We are human. We are evolving. And that is enough.

The Yellow Emperor’s Cure

Lisbon, 1898: philandering surgeon Antonio Maria discovers his beloved father is dying of syphilis, scourge of both rich and poor. Determined to find a cure, Antonio sets sail for Peking to study under the renowned Dr. Xu, in the hope that traditional Chinese medicine has the answer that eludes the West. But Xu is evasive, and when Antonio encounters the alluringly independent Fumi, he finds the first love he cannot leave behind.

As he wrestles with his disbelief over “irrational” Chinese views about illness, and helplessly falls into an erotic obsession with Fumi, violence threatens to break out across China. The infamous Boxer rebellion separates the lovers during a siege at the Summer Palace, and Antonio must decide whether to flee-or to stay in China to solve the deep mystery of Fumi’s haunted past and discover for himself the Yellow Emperor’s cure.

Ek Myan Do Talwaren/एक म्यान दो तलवारें

इस उपन्यास में 1914-15 के दौरान अंग्रेजों के खिलाफ उपजे क्रांतिकारी आंदोलन की झलकी दी गई है। बीरी और उसका भाई अपने देश को स्वतंत्र कराना चाहते हैं, लेकिन उनकी राह में सबसे बड़ी रूकावट उनका अपना पिता ही बन जाता है, जो अंग्रेजों का वफादार चमचा था। देश के लिए मर मिटने वालों की यह कहानी आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर पुन: प्रकाशित की गई है। 

Nayika/नायिका

क्या किसी पागलखाने में छिपा हो सकता है, हत्याओं का राज़! आखिर वो कौन है, जो कर रहा है लाशों पर अट्टहास? मौत के तांडव की एक ऐसी सनसनीख़ेज़ कहानी, जिसे पढ़कर हत्यारे से नफ़रत नहीं होती, क्यों? शहर में क़त्ल पर क़त्ल हुए जाते हैं और पुलिस क़ातिल को पकड़ नहीं पाती। सारी घटनाओं में एक बात ख़ास है, हर मरने वाला आरोपी है, बलात्कारी है। आखिर वो कौन है, जो इन वारदातों को अंजाम दे रहा है और फिर इन हत्याओं का तरीका क्या है? इस राज़ का खुलासा भी होता है मगर एक रेडियो शो में और लोग उसकी वजह सुनकर भौंचक्के रह जाते हैं। सस्पेंस और रोमांस से भरपूर अमित खान का यह थ्रिलर आपको आखिर तक बांधकर रखेगा और आप दिल थामे यह उपन्यास पढ़ने पर मजबूर हो जाएँगे। 

Nimantran/निमन्त्रण

राजनैतिक पैंतरेबाजियों के बीच प्यार के लुभावने सपने युद्ध की लपटों में किस तरह बिखर गए, इसी की रोचक कहानी है — निमन्त्रण, जिसे इस सदी के महान उपन्यासकार आचार्य चतुरसेन ने अत्यंत कलात्मक ढंग से लिखा है। 

Swasthya Raksha/स्वास्थ्य रक्षा

स्वास्थ्य रक्षा का अर्थ है शरीर की रोग, विकार, आलस्य आदि से रक्षा करना। शास्त्रों के अनुसार आध्यात्मिक (मन से उत्पन्न दु:ख), आधिभौतिक (शारीरिक दु:ख) तथा आधिदैविक (प्रकृत दु:ख) रूपों से भावना की रक्षा, स्वास्थ्य रक्षा है। आचार्य चतुरसेन ने आयुर्वेद के तरीके से स्वस्थ रहने के मूलमंत्र को इस पुस्तक में दिया है। स्वास्थ्य रक्षा के अनेक मूलमंत्र हैं जैसे पौष्टिक और स्वास्थ्यकर भोजन खाना। भोजन नियत समय पर और भूख लगने पर करना चाहिए। सादा, सुपाच्य, सन्तुलित और पौष्टिक भोजन अधिक लाभदायक है। घी, तेल, फल, सब्जी के प्रयोग से भोजन में पौष्टिकता आती है। सड़े-गले बासी, अपाच्य भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। यह पुस्तक अपने आप में एक कंपलीट हैल्थ गाइड है, जो हर किसी के लिए उपयोगी है। 

Moti/मोती

मोती—एक अनोखा इन्सान, क्रांतिकारी आंदोलन में भाग लेने के कारण उसे सज़ा हो गई, लेकिन वह जेल से छूट कर आया तो देखा—उसके सपनों की रानी नीलम पुष्प-हार लिए उसके स्वागत को तैयार खड़ी है और विवाह की तैयारियाँ हो रही हैं।
प्रसिद्ध लेखक आचार्य चतुरसेन की इस अंतिम कृति के पीछे लेखक के पूरे जीवन का अनुभव है और इसमें उनकी कला पूरे विकास पर है। 

Narmedh/नरमेध

“. . . अपने पति की शरण में लौट जाने की मेरी कितनी अभिलाषा थी, परन्तु मेरा यह पातक शरीर बाधक था। इसे लेकर मैं उनके पास नहीं लौट सकती थी। परन्तु वह भी देहबद्ध थे, अतः मैं देह त्यागकर भी उन्हें कैसे पाती, इसी से मर भी न सकी।”
आत्मग्लानि और प्रतिशोध से भरी-बिफरी एक असामान्य नारी की रुला देने वाली अनोखी कहानी।
अमर उपन्यासकार आचार्य चतुरसेन का अत्यन्त मार्मिक लघु उपन्यास, जिस पर इसी नाम से फिल्म का निर्माण भी हुआ है। 

Teesra Patthar/तीसरा पत्थर

रामकुमार भ्रमर के इसी नाम से प्रकाशित चर्चित उपन्यास पर बनी बासु भट्टाचार्य की सफल फिल्म तीसरा पत्थर की यह स्क्रिप्ट पढ़ते हुए ऐसा अहसास दिलाती है कि जैसे फिल्म देखने का ही आनंद ले रहे हों।
इस पटकथा की कहानी बड़ी सरल एवं प्रभावी है। 

Aapatkal Mein Gupt Kranti/आपातकाल में गुप्त क्रांति

जब देश में संपूर्ण क्रांति का बिगुल बजने ही वाला था, तो इन्दिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा कर देश-भर में पुलिस राज स्थापित कर दिया और सेंसर की कैंची ने अखबार-तो-अखबार लोगों की ज़बानें तक काट डाली थी। ऐसे में भी क्रांति हुई तो कैसे? भूमिगत होकर जो नेता तानाशाही से जूझे, जेल और पुलिस-यातना का जोखिम उठाकर भी जन-जन में क्रांतिचेतना को उभारते रहे, उन्हीं को मुख्य श्रेय है इस रक्तहीन क्रांति का। कैसे जूझे वे? कौन-कौन थे वे?
किस प्रकार क्रांति का कार्य-संचालन करते रहे? इस सबका अत्यन्त प्रामाणिक तथा रोचक वृत्तान्त प्रस्तुत किया है इस पुस्तक में दीनानाथ मिश्र ने, जो स्वयं उन दिनों भूमिगत होकर कार्य कर रहे थे। इस महत्त्वपूर्ण पुस्तक की भूमिका लिखी है लोकप्रिय नेता तथा पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने। 

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