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Sakshi Chetna: Amrita Pritam/साक्षी चेतना : अमृता प्रीतम

इस पुस्तक में राजेश चन्द्रा ने संस्मरणों के रूप में उन यादगार पलों का जिक्र किया है, जो उन्हें अमृता प्रीतम के संग जिए हैं। ये संस्मरण एक महान लेखक के संग उनके प्रशंसक की श्रद्धांजलि है। इसमें अमृता प्रीतम के जीवन के कुछ ऐसे अनछुए प्रसंग हैं, जो केवल लेखक की कलम से ही उकेरे गए हैं एवं साहित्य की धरोहर बन गए हैं। यह पुस्तक साहित्य जगत में अपना एक विशिष्ट स्थान रखती है। कमलेश्वर ने इस पुस्तक को पढ़कर कहा था कि यह हमारी खुशनसीबी है कि मैं अमृता प्रीतम के दौर में साँस ले रहा हूँ। 

Ravan Ko Gussa Kyon Aata Hai?/रावण को गुस्सा क्यों आता है?

देश के हालात इतने बुरे हो गए हैं कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम से लेकर भगवान बुद्ध, कालिदास, शाहजहां, महात्मा गांधी, चचा गालिब और प्रेमचन्द भी हक्के-बक्के हैं। उन्हें अब कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है। अब तो रावण को भी गुस्सा आने लगा है। इस पुस्तक में राजनीति, बाज़ार, मीडिया और भूमंडलीकरण से उत्पन्न विद्रूप स्थितियों को व्यंग्य के माध्यम से कहने की कोशिश है, जो आज के दौर की उलटबांसी हो गई है। यहाँ पढ़िए, गांधी जी चैनल को क्या इंटरव्यू दे रहे हैं? गालिब इलेक्शन पर क्या बोल रहे हैं? महँगाई के बारे में कालिदास क्या कह रहे हैं? घड़ियाल भारतीय राजनीति पर क्या टिप्पणी कर रहा है? बाघ ‘लव’ में असफल होकर क्यों आत्महत्या कर रहा है? हनुमान की व्यथा क्या है और भूमंडलीकरण के दौर में कुत्ते का दर्द क्या है?  

Kranti Gitanjali/क्रांति गीतांजलि

उठो देश भक्तों की फेहरिस्त में,
बढ़ो नाम अपना लिखाते चलो।
जो रग-रग में भर देवे जोशे वतन,
वह ‘आज़ाद’ गज़लें सुनाते चलो।—भागवत झा ‘आज़ाद’
ये क्रांतिगीत हैं, जिन्हें देश के लोह-लाड़लों ने लिखा और करोड़ों देशवासियों ने गाया और उन्हें अपनी आज़ादी की लड़ाई का अर्थ समझाया। ये गीत रचे गए और रचनाकारों को न जेल के अंधेरे डरा सके, न ब्रिटिश सरकार की यातनाएँ झुका सकीं। क्रांति के ये गीत छपने के साथ ही ब्रिटिश सरकार द्वारा ज़ब्त कर लिए गए थे, पर चलता रहा यह अटूट सिलसिला, इनकी गंजुर से काँपते रहे़ शासकों के कलेजे।
यह पुस्तक अपने-आप में प्रामाणिक ऐतिहासिक दस्तावेज़ है। बिहार राज्य के अभिलेखागार के दस्तावज़ों के आधार पर इन गीतो का संकलन किया गया है। गीतो के साथ जब्ती के शासनादेश मलू-रूप में दिए गए हैं। यह संकलन काव्य-प्रेमियों, जिज्ञासुओं और शोधार्थियों के लिए अत्यधिक महत्त्वपूर्ण है। 

Abundance (Hindi) /Aatmik Samriddhi Ki Oar/आत्मिक समृद्दि की ओर

आधुनिक मेडीटेशन के मास्टर बता रहे हैं कि आप आत्मिक समृद्धि से भरा जीवन कैसे जी सकते हैं।
हममें से ज़्यादातर लोग अभावों और सीमाओं से जुड़े किसी-न-किसी विचार से जकड़े रहते हैं, और बस उन्हीं चीज़ों पर ध्यान देते हैं जो हमारे पास नहीं होतीं। अक्सर हमारी सोच और काम पर हमारे अहंकार का असर पड़ता है और हम ऐसा होने देते हैं। इसी कारण से मन की शांति, लोगों के स्वीकारे जाने और दिल से संतुष्टि जैसे सच्चे भावों से हम अछूते रह जाते हैं।
आत्मिक समृद्धि की ओर में इंटीग्रेटिव मेडिसिन (वैकल्पिक चिकित्सा) के अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मेंटॉर दीपक चोपड़ा सात सरल चरणों की एक योजना बताते हैं ताकि आप दुबारा अपना ध्यान केंद्रित कर सकें और अपनी ज़िंदगी की कमान अपने हाथ में थाम संभावनाओं से भरे जीवन की ओर बढ़ सकें। यह किताब एक मेंटॉर की तरह आपको अपनी सच्ची क्षमता, सफलता और सुखी-समृद्ध जीवन की राह दिखाती है; साथ, यह समझाती है कि अपनी बनाई सीमित मानसिकता से छुटकारा पाने और अपने ध्यान व समझ को एक जगह केंद्रित करने के लिए क्या करें और कैसे।  

Office Secrets/ऑफ़िस सीक्रेट्स

हम कॉर्पोरेट जीवन में जिस ढंग से काम करते हैं, उन्हीं में छुपे होते हैं कई राज़। इनमें जो कारगर होते हैं वह गूढ़ आँकड़ों या गोपनीय रणनीतियों से जुड़े दस्तावेज़ नहीं, बल्कि उदारता, हास-परिहास, एक अच्छी फ़िल्टर कॉफ़ी या सिर-खपाऊ मीटिंग के बाद तीस मिनट के मी टाइम जैसे सरल व मानवीय पहलू हैं।
यह पुस्तक आकर्षक और कारगर टिप्स का ऐसा संकलन है, जो आपको अपने ऑफ़िस में और अधिक सफल होने में मदद कर सकती हैं। उस पर बोनस जैसे ये टिप्स आपको थोड़ी राहत भी दे सकती हैं। इसमें, आपको मज़ेदार और प्रासंगिक विषयों की विविधता मिलेगी, जिनमें काम के दौरान अपनी मेज़ को व्यवस्थित करने, थकान भगाने के सर्वोत्तम तरीके, पावर ऑफ लिस्निंग, नेकी-उदारता क्यों की जाए और आपके सहकर्मी जिस तरीके से कुकीज़ खाते हैं, आप उनसे क्या-कुछ सीख सकते हैं, जैसे विषय शामिल हैं।
‘कॉरपोरेट गलियारों में काम करने के छोटे-छोटे लेकिन कमाल के तरीके’ –सुपर्णा मित्रा, सीईओ, वॉचेस एंड वियरेबल्स, टाइटन कंपनी लिमिटेड   

What it Takes to be Free Hindi / Kaise Bharen Azadi Ki Udaan / कैसे भरें आज़ादी की उड़ान

आप जो चाहें कर सकते हैं। अपने पसंदीदा लोगों के साथ समय बिता सकते हैं और अपने पसंदीदा काम को करियर भी बना सकते हैं। यह सब सपने जैसा तो लगता है लेकिन असंभव नहीं है।
उन्मुक्त जीवन की बहुत बड़ी कीमत होती है। यह मुश्किल तो है, लेकिन असंभव नहीं है। लेकिन यदि आप भी इसकी कीमत अदा करने के लिए तैयार हैं तो आप भी उन्मुक्त हो सकते हैं।इस पुस्तक में आपको जीवन पर नियंत्रण रखने और सही मायने में उन्मुक्त जीवन जीने के गुर बताए गए हैं। यह आसान नहीं लेकिन आप अपने परिश्रम से असंभव को संभव कर दिखा सकते हैं।
उन्मुक्तता यानी दूसरों को कोई कष्ट पहुँचाए बिना मनचाही आज़ादी का अर्थ होता है अपनी शर्तों पर ज़िंदगी जीना। इस किताब का उद्देश्य ही आपको यह अर्जित करने में मदद करना है, जैसा कि आप चाहते हैं, वैसा लक्ष्य हासिल कर सकें। 

Meditations (Hindi)/मेडिटेशन्स

मेडिटेशन्स में मार्कस ने मानव चेतना के गहराईयों को छूने की यात्रा का वर्णन किया है। यह पुस्तक ध्यान और आत्मज्ञान के महत्त्व को समझाती है, जिससे आप अपने जीवन को शांति, स्थिरता और संतुलन के साथ जी सकते हैं। इसमें विभिन्न ध्यान तकनीकों का विस्तृत वर्णन है, जो मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने में मदद कर सकते हैं। 

A Slight Angle

In the volatile India of the 1920s, with its many political and technological crosscurrents, we encounter a group of young people in Delhi, Bombay, Calcutta, Banaras, discovering new ways to live. Fiery Sheela, once a Gandhian, charts her own path; clever Kanta and orphaned Hemlata make the most of their limited resources; gentle and gifted Sharad and Abhik grapple with forbidden desire and redefine older arts; Robin the jazz musician and Rita the Jewish movie star construct urban pleasures. Hindi writers Mahadevi and Ugra make cameo appearances.

AI Snake Oil

From two of TIME’s 100 Most Influential People in AI, what you need to know about AI—and how to defend yourself against bogus AI claims and products
Confused about AI and worried about what it means for your future and the future of the world? You’re not alone. AI is everywhere—and few things are surrounded by so much hype, misinformation, and misunderstanding. In AI Snake Oil, computer scientists Arvind Narayanan and Sayash Kapoor cut through the confusion to give you an essential understanding of how AI works and why it often doesn’t, where it might be useful or harmful, and when you should suspect that companies are using AI hype to sell AI snake oil—products that don’t work, and probably never will.
While acknowledging the potential of some AI, such as ChatGPT, AI Snake Oil uncovers rampant misleading claims about the capabilities of AI and describes the serious harms AI is already causing in how it’s being built, marketed, and used in areas such as education, medicine, hiring, banking, insurance, and criminal justice. The book explains the crucial differences between types of AI, why organizations are falling for AI snake oil, why AI can’t fix social media, why AI isn’t an existential risk, and why we should be far more worried about what people will do with AI than about anything AI will do on its own. The book also warns of the dangers of a world where AI continues to be controlled by largely unaccountable big tech companies.
By revealing AI’s limits and real risks, AI Snake Oil will help you make better decisions about whether and how to use AI at work and home.

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