Western thought on leadership is trait-oriented; it emphasizes the importance of ‘being a leader’. Indian leadership offers a contrast—it focuses on the ‘exercise of leadership’. Power Within introspects on this practice as it captures the civilizational wisdom of Bharat through the lived experience of Prime Minister Narendra Modi. The book delves into the fifty years of his public life and explores how he discovered his purpose, the seeds of which were sown in his formative years. Poignant anecdotes from his colleagues shed light on how his relentless hard work and communicative approach propelled him to the prime ministerial post. They also underscore his constant quest for self-discovery in the service of others.
In a carefully crafted narrative, R. Balasubramaniam captures Modi’s leadership journey and interprets it
through Western and Indic lenses, amalgamating them to provide a road map for those who aspire to a life of public service.
आज के सर्वाधिक लोकप्रिय उपन्यासकार नरेन्द्र कोहली की लेखनी से उपजा एक प्रेम आख्यान है प्रीति-कथा। इस उपन्यास में प्रेम दर्शन की तमाम बारीकियों को रेखांकित किया गया है और ज़िंदगी की कुछ आधारभूत सच्चाइयों से रूबरू कराते हुए कथा में अनूठे रंग भरे गए हैं। यह विनीत की कहानी है, जो केतकी और मल्लिका के बिना पूरी नहीं होती। इसमें अनुराग की दो धाराएँ हैं जो प्रेम के समुंदर में पहुँचकर विलीन हो जाना चाहती हैं, पर प्रेम के प्रति सरोकार अलग किस्म के हैं।
अलका बेहद परेशान है। कहती तो कुछ नहीं, बस गुमसुम-सी अकेली बैठी रहती है। लगता है, एकांत में रोती भी रहती है।
अब रो लेना ठीक है, लेकिन अगर यहाँ ब्याह हो जाए तो जीवन-भर रोती रहेगी।
सगाई के बाद उभरकर आती लड़के वालों की कमियों एवं छिपाई गई बातों की सच्ची कहानी। कन्या-पक्ष की मानसिक ऊहापोह तथा बेचैनियों की तिलमिला देने वाली कथा। सफल उपन्यासकार दत्त भारती का एक ऐसा उपन्यास, जो आपको रुलाकर रख देगा।
‘हे बुद्ध, मैं तुमको, धम्म को और संघ को शरणागत हूँ . . . बस, यही त्रिरत्न मेरी कुल संपदा है अन्यथा और कुछ भी नहीं है मेरे पास . . .
बौद्ध धर्म के पालन के लिए किसी भी व्यक्ति को तीन बातों पर अमल करना होगा : पहली उसे सभी सिद्धांतों की जानकारी हो। दूसरी सिद्धांतों को व्यवहार में लाने के लिए रूपरेखा सामने हो। तीसरी रूपरेखा को व्यवहार में उतारने के लिए साहस, संकल्प व अनुशासन हो।
यह पुस्तक पहली दो आवश्यकताओं की पूर्ति करती है, जबकि तीसरी आवश्यकता को पूरा करना आप पर निर्भर है यह धम्म की पुकार थी कि धम्मचारी सुभूति के शृंखलाबद्ध प्रवचनों का अनुवाद करने का विचार मन में उठा। इसी का प्रतिफल यह पुस्तक है, जो हर किसी को धम्म पर चलने और बुद्धत्व प्राप्त करने का मार्ग दिखाएगी।
फ़ैज़ अहमद फै़ज़ उर्दू के बहुत ही जाने-माने कवि थे। आधुनिक उर्दू शायरी को उन्होंने एक नई ऊँचाई दी। इस पुस्तक में उनकी जीवनी एवं शायरी दी गई है। फै़ज़ अहमद फै़ज़ की उर्दू कविता दुआ का बलोची अनुवाद बलोच कवि गुल खान नासिर द्वारा किया गया। 20वीं सदी का वो महान् उर्दू शायर जिसने सरकारी तमगों और पुरस्कारों के लिए नहीं, जिसने शराब की चाशनी में डूबती-नाचती महबूबाओं के लिए नहीं, जिसने मज़ारों और बेवफ़ाईयों के लिए नहीं बल्कि अपने इंसान होने के एहसास, समाज और देश के लिए, एक सही और बराबरी की व्यवस्था वाले लोकतंत्र के लिए इंकलाब को अपने कलम की स्याही बनाया और ज़ुल्म-ओ-सितम में जी रहे लोगों को वो दिया जो बंदूकों और तोपखानों से बढ़कर था। फ़ैज़ की कविताओं में जितना ज़िंदा वो सच है जिसमें हम जी रहे हैं, उतना ही ज़िंदा वो हौसला है जिसकी बदौलत आदम-ओ-हव्वा की औलादें अपने वर्तमान को बदल सकती हैं।
इस पुस्तक में राजेश चन्द्रा ने संस्मरणों के रूप में उन यादगार पलों का जिक्र किया है, जो उन्हें अमृता प्रीतम के संग जिए हैं। ये संस्मरण एक महान लेखक के संग उनके प्रशंसक की श्रद्धांजलि है। इसमें अमृता प्रीतम के जीवन के कुछ ऐसे अनछुए प्रसंग हैं, जो केवल लेखक की कलम से ही उकेरे गए हैं एवं साहित्य की धरोहर बन गए हैं। यह पुस्तक साहित्य जगत में अपना एक विशिष्ट स्थान रखती है। कमलेश्वर ने इस पुस्तक को पढ़कर कहा था कि यह हमारी खुशनसीबी है कि मैं अमृता प्रीतम के दौर में साँस ले रहा हूँ।
देश के हालात इतने बुरे हो गए हैं कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम से लेकर भगवान बुद्ध, कालिदास, शाहजहां, महात्मा गांधी, चचा गालिब और प्रेमचन्द भी हक्के-बक्के हैं। उन्हें अब कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है। अब तो रावण को भी गुस्सा आने लगा है। इस पुस्तक में राजनीति, बाज़ार, मीडिया और भूमंडलीकरण से उत्पन्न विद्रूप स्थितियों को व्यंग्य के माध्यम से कहने की कोशिश है, जो आज के दौर की उलटबांसी हो गई है। यहाँ पढ़िए, गांधी जी चैनल को क्या इंटरव्यू दे रहे हैं? गालिब इलेक्शन पर क्या बोल रहे हैं? महँगाई के बारे में कालिदास क्या कह रहे हैं? घड़ियाल भारतीय राजनीति पर क्या टिप्पणी कर रहा है? बाघ ‘लव’ में असफल होकर क्यों आत्महत्या कर रहा है? हनुमान की व्यथा क्या है और भूमंडलीकरण के दौर में कुत्ते का दर्द क्या है?
उठो देश भक्तों की फेहरिस्त में,
बढ़ो नाम अपना लिखाते चलो।
जो रग-रग में भर देवे जोशे वतन,
वह ‘आज़ाद’ गज़लें सुनाते चलो।—भागवत झा ‘आज़ाद’
ये क्रांतिगीत हैं, जिन्हें देश के लोह-लाड़लों ने लिखा और करोड़ों देशवासियों ने गाया और उन्हें अपनी आज़ादी की लड़ाई का अर्थ समझाया। ये गीत रचे गए और रचनाकारों को न जेल के अंधेरे डरा सके, न ब्रिटिश सरकार की यातनाएँ झुका सकीं। क्रांति के ये गीत छपने के साथ ही ब्रिटिश सरकार द्वारा ज़ब्त कर लिए गए थे, पर चलता रहा यह अटूट सिलसिला, इनकी गंजुर से काँपते रहे़ शासकों के कलेजे।
यह पुस्तक अपने-आप में प्रामाणिक ऐतिहासिक दस्तावेज़ है। बिहार राज्य के अभिलेखागार के दस्तावज़ों के आधार पर इन गीतो का संकलन किया गया है। गीतो के साथ जब्ती के शासनादेश मलू-रूप में दिए गए हैं। यह संकलन काव्य-प्रेमियों, जिज्ञासुओं और शोधार्थियों के लिए अत्यधिक महत्त्वपूर्ण है।
आधुनिक मेडीटेशन के मास्टर बता रहे हैं कि आप आत्मिक समृद्धि से भरा जीवन कैसे जी सकते हैं।
हममें से ज़्यादातर लोग अभावों और सीमाओं से जुड़े किसी-न-किसी विचार से जकड़े रहते हैं, और बस उन्हीं चीज़ों पर ध्यान देते हैं जो हमारे पास नहीं होतीं। अक्सर हमारी सोच और काम पर हमारे अहंकार का असर पड़ता है और हम ऐसा होने देते हैं। इसी कारण से मन की शांति, लोगों के स्वीकारे जाने और दिल से संतुष्टि जैसे सच्चे भावों से हम अछूते रह जाते हैं।
आत्मिक समृद्धि की ओर में इंटीग्रेटिव मेडिसिन (वैकल्पिक चिकित्सा) के अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मेंटॉर दीपक चोपड़ा सात सरल चरणों की एक योजना बताते हैं ताकि आप दुबारा अपना ध्यान केंद्रित कर सकें और अपनी ज़िंदगी की कमान अपने हाथ में थाम संभावनाओं से भरे जीवन की ओर बढ़ सकें। यह किताब एक मेंटॉर की तरह आपको अपनी सच्ची क्षमता, सफलता और सुखी-समृद्ध जीवन की राह दिखाती है; साथ, यह समझाती है कि अपनी बनाई सीमित मानसिकता से छुटकारा पाने और अपने ध्यान व समझ को एक जगह केंद्रित करने के लिए क्या करें और कैसे।