इस पुस्तक के बारे में स्वयं लेखक लिखते हैं कि सोचा तो यही था कि आत्मकथा लिखने में क्या है। जो घटित हुआ, वही तो लिखना है; किंतु लिखते हुए ज्ञात हुआ कि आत्मकथा में समस्या लेखन की नहीं, चयन की है। क्या लिखना है और क्या नहीं लिखना है। अपना सत्य लिखना है, किंतु दूसरों के कपट का उद्घाटन नहीं करना है; क्योंकि उसमें स्वयं को महान् बनाने की चेष्टा देखी जा सकती है वे घटनाएँ जो अपने लोगों को आहत करती हैं और वे घटनाएँ, जो लेखक की आत्म-भर्त्सना के रूप में उसे गौरवान्वित करती हैं। लेखक उन गुणों से भी स्वयं को अलंकृत कर सकता है, जो उसमें हैं ही नहीं और वह अपने दोषों को इस प्रकार भी प्रस्तुत कर सकता है कि वे गुण लगें। नंगा सत्य बोलना बहुत कठिन होता है; उसकी लपेट में लेखक स्वयं तो आता ही है, वे लोग भी आ जाते हैं, जिनके विषय में सत्य बोलने का अधिकार लेखक को नहीं है। इसलिए मैंने सपाट सत्य भी लिखा है और जहाँ आवश्यकता पड़ी है, वहाँ सृजनात्मकता का झीना पर्दा भी डाल दिया है। प्रयत्न यही है कि मेरा सत्य तो पाठकों के सामने आए, किंतु उसकी लपेट में अन्य लोग न आएँ।
Catagory: Non Fiction
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Meera/मीरा
लोक कहे मीरा भई बावरी, भ्रम दूनी ने खाग्यो। कोई कहैं रंग लाग्यो। (लोग कहते हैं कि मीरा पागल हो गई है। यही भ्रम दुनिया को खा गया है। कोई कहता है, यह तो प्रेम लग गया है अर्थात मीरा का भक्ति-भाव कृष्ण में आत्मसात हो गया है।) सचमुच मीरा कृष्ण के प्रेम में दीवानी हो गई थी। मीरा ने स्वयं को कृष्ण की दासी के रूप में साकार कर लिया। प्रभु-चरणों के निकट वह भाव-विभोर होकर नाचती थी। माया-मोह, नाते-रिश्तों से दूर वह कृष्णमय हो गई थी। उसके तो सिर्फ गिरधर गोपाल थे, दूसरा कोई नहीं था। अपार सौंदर्य की धनी, सुख-वैभव में रही, पर उसने सर्वस्व त्याग दिया। न जाने कितने कष्ट और अत्याचार सहे, फिर भी गोविंद के गुण गाती रही। भक्ति-काल की अद्भुत कवियित्री थी मीरा और सरस-मधुर कंठी की धनी भी, जिसके पद आज भी जन-जन में प्रिय हैं। मीरा की पदावली को लोग बड़े भक्ति-भाव से गाते हैं। साथ ही पढ़िए मीरा की मार्मिक जीवनी भी।
Kabir/कबीर
संत-भक्त कवियों में सबसे अलग और विशिष्ट स्थान है कबीर का।
सधुक्कड़ी भाषा में फक्कड़पन से जो कुछ कह गए दास कबीर, वैसा तीखा और विद्रोही स्वर किसी का न रहा। भारतीय जन-मानस पर कबीर की अमिट छाप है, जिन्होंने धर्म, जाति, आडंबरों और अंधविश्वासों पर तीखा प्रहार किया। कबीर के भजन, उनके दोहे और कुंडलियाँ जो कि उन्होंने रचीं, एक-एक रचना में वह अपने ठेठ ढंग से जीवन को सही तरह से जीने की प्रेरणा देते हैं तथा मानव-मात्र की एकता पर बल देते हैं। पढ़िए संत कवि की रोचक जीवनी और रचनाएँ।
Premchad Ki Mashhoor Kahaniyan/प्रेमचंद की मशहूर कहानियाँ
इस संकलन में केवल उन्हीं कहानियों को चुना गया है, जो इतनी अधिक मशहूर हो गई है कि जिनका नाम लेने से सहसा प्रेमचंद का नाम होंठों पर आ जाता है। ये वे कहानियाँ हैं, जिन पर फिल्में बनीं, जिनके नाट्य−रूपांतरों का प्रदर्शन हुआ, देश−भर के स्कूल−कॉलेजों में पढ़ाई जाती हैं या तो बार−बार विभिन्न भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनुदित हो चुकी हैं। इस संकलन की सभी कहानियाँ अपने आप में बेहद अद्भुत एवं कालजयी हैं।
Rabinranath Tagore Ki Lokpriya Kahaniyan/रवीन्द्रनाथ टैगोर की लोकप्रिय कहानियाँ
बंगला-साहित्य में छोटी कहानियों का सूत्रपात करने वाले रवीन्द्रनाथ टैगोर ही हैं। एक समालोचक ने इनकी कहानियों के संबंध में लिखा है कि रवीन्द्रनाथ का काव्य चाहे चिरजीवी हो या न हो, पर ये कहानियाँ उन्हें निश्चित रूप से अमर कीर्ति देंगी। रवीन्द्र बाबू की ऐसी ही लोकप्रिय कहानियों का यह संग्रह अपने में विविधता और उत्कृष्टता लिए हुए है। बेहद मार्मिक ये कहानियाँ पाठक को बाँध लेती हैं।
विश्व के महान साहित्यकार >b>रवीन्द्रनाथ टैगोर ऐसे अग्रणी लेखक थे, जिन्हें नोबल पुरस्कार जैसे विश्वस्तरीय सम्मान से विभूषित किया गया। उनकी अनेक कृतियाँ प्रमुख भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनूदित होकर चर्चित हुई हैं।
“Amar Shaheed Swami Shraddhanand Mere Pita/अमर शहीद स्वामी श्रद्धानंद मेरे पिता “
अमर महात्मा स्वामी श्रद्धानन्द का नाम नवीन भारत के निर्माताओं में बहुत ऊँचा है। पंजाब के एक छोटे-से प्रदेश तलवन में जन्म लेकर आप महर्षि दयानंद की जगाई ज्योति को लेकर आगे बढ़े और पहले हिमालय की उपत्यका में गुरुकुल कांगड़ी की स्थापना करके, संन्यास लेने के बाद, महात्मा गाँधी के साथ स्वाधीनता-युद्ध के प्रमुख सेनानी बने। स्वामीजी का जीवन किसी भी महाकाव्य के नायक से कम रोमांचपूर्ण नहीं है। पत्नी के स्वर्गवास के बाद आपका हिमालय के घने जंगलों में गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की स्थापना करना, भारत की अध्यात्म ज्योति को पुनर्जीवित करने के लिए अनेक सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध अकेले युद्ध करते हुए प्राण-त्याग करने की कहानी किसी भी उपन्यास से अधिक रोचक और प्रेरणाप्रद है।
Swipe Right to Kill
From a perfect match to a perfect murder!
In May 2018, an abandoned suitcase was discovered on the Delhi-Jaipur Highway. Inside was the dismembered body of Dushyant Sharma, a 28-year-old businessman. from Delhi. Within 48 hours of the discovery, the Rajasthan Police managed to solve the case. But the revelations were both chilling and unnerving. It introduced the world to the evil machinations of Priya Seth—a woman who self-confessed to conning a thousand men and her two accomplices, Dikshant Kamra and Lakshya Walia.
With detailed inputs from the cop who solved the case, SHO Gur Bhoopendra Singh, bestselling author, the creator-producer of Savdhaan India and the producer of Crime Patrol, Anirban Bhattacharyya, puts together a sensational and blood-curdling account of people whose greed, ambition and lust led them to commit one of the most heinous crimes in recent history, a case that has now earned the moniker of the infamous Jaipur Tinder Murder Case.
The Art of Resilience (Hindi)/Mansik Shakti Kaise Badhaayen/मानसिक शक्ति कैसे बढ़ाएँ
क्या आप हर बात में बहुत अधिक सोचते हैं? आप किसी बात पर जल्दी कोई फैसला नहीं ले पाते और उसी के बारे में सोच सोचकर रातों की नींद ख़राब करते हैं? नकारात्मक जीवन, काम और संबंधों के बारे में किसी उद्देश्यपूर्ण चीज़ की तलाश में हैं? एक बार अल्बर्ट आइंस्टाइन ने कहा था, ‘अक़्ल स्कूल में पढ़ाई करने से नहीं आती बल्कि उसको हासिल करने के जीवनपर्यंत प्रयास से आती है।’
इस पुस्तक में मन को उन्नत और हृदय को रूपांतरित करने वाली 40 कहानियों के साथ गौरांग दास आपको अंतर्मन की खोज यात्रा पर ले जाते हैं। आशाओं की ऊँचाइयों से परे, असहमतियों की घाटियों से होते हुए, आत्मवंचना के तलों से होकर। इस तरह वे आपको अपने हृदह के गृह के पास ले आते हैं, आपको समर्थ बनाते हैं कि आप द्वार खोलकर अपना परिचय प्राप्त करें, और अंततः अपने वास्तविक रूप से आपका परिचय हो सके।
Meghdoot/मेघदूत
मेघदूत एक विख्यात गीतिकाव्य है, जिसमें यक्ष द्वारा मेघ से संदेश ले जाने की प्रार्थना और उसे दूत बनाकर अपनी प्रिय के पास भेजने का वर्णन है।
मेघदूत काव्य दो खंडों में विभक्त है। पूर्वमेघ में यक्ष बादल को रामगिरि से अलकापुरी तक के रास्ते का विवरण देता है और उत्तरमेघ में यक्ष का यह प्रसिद्ध विरहदग्ध संदेश है जिसमें कालिदास ने प्रेमी-हृदय की भावना को उड़ेल दिया है।
इस संस्करण का उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधार्थियों और प्रतियोगियों के लिए एक ही स्थान पर सारगर्भित सामग्री को पाठ्यक्रम के अनुसार एवं महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी सहित उपलब्ध कराना है।
मेघदूत के इस संस्करण का हिंदी अनुवाद महान शिक्षाशास्त्री डॉ. भगवतशरण उपाध्याय ने किया है एवं इसकी भूमिका हिंदी साहित्य के द्विवेदी युग के प्रणेता महावीर प्रसार द्विवेदी ने लिखी है।
The Last Heroes (Hindi)/द लास्ट हीरोज़
द लास्ट हीरोज़ किताब में, भारतीय स्वतंत्रता के ये पैदल सैनिक हमें अपनी कहानियाँ बताते हैं। वे अलग-अलग क्षेत्रों से आते हैं, उनमें नास्तिक और आस्तिक, वामपंथी, गांधीवादी और अंबेडकरवादी शामिल हैं।
पुस्तक की तस्वीरों में दिए गए लोगों ने दिलचस्प सवाल उठाया : स्वतंत्रता क्या है? उनमें से लगभग सभी ने वर्ष 1947 के बाद भी लंबे समय तक आज़ादी के लिए अपनी लड़ाई जारी रखी। 1947 के बाद की पीढ़ियों को भारतीय स्वतंत्रता के पैदल सैनिकों की कहानियों की ज़रूरत है। यह जानने के लिए कि आज़ादी और स्वतंत्रता एक चीज़ नहीं हैं।
