‘मेरी सारी हिम्मत समाप्त हो गई। मेरी सामर्थ्य अब इतनी भी नहीं रही कि मैं यान को अपने नियंत्रण में रख सकूं उस क्षण, मेरी प्यारी लिज़ा, बस तुम्हारी स्मृति मेरे मस्तिष्क में थी, मैंने पृथ्वी को और जीवन को नमस्कार किया। मेरी चेतना धीरे-धीरे लुप्त हो गई और मैंने जाना कि मेरी मृत्यु हो गई।’
लिज़ा ने कांपते हाथों सेज़ोरोवस्की का हाथ पकड़ लिया और एक सिसकारी उसके कण्ठ से निकल पड़ी। फिर वह ज़ोरोवस्की की गोद में गिरकर फफक-फफक कर रो पड़ी।
बहुमुखी प्रतिभा के धनी आचार्य चतुरसेन का एक वैज्ञानिक उपन्यास, जिसमें उन्होंने परमाणु शक्ति की कल्पनातीत क्षमताएँ अंतरिक्ष में मानव की उड़ान तथा दुरूह ध्रुवीय प्रदेश की साहसिक यात्रा का बड़ा ही रोमांचक चित्र प्रस्तुत किया है। इसे पढ़ते-पढ़ते, निश्चय ही आप एक विचित्र लोक में भ्रमण करने लगेंगे।
Catagory: Non Fiction
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Bahate Aansu/बहते आँसू
टूटती रात मे उन्हें कुछ झपकी आई थी, कि एक हृदय वेधी चित्कार से उनकी नींद टूट गई। चौपाल पर जो दो चार व्यक्ति सो रहे थे, वे उठकर बैठ गए। एक ने कहा- मालूम होता है उसका लड़का चल बसा। गज़ब हो गया, पहाड़ टूट पड़ा। आसार तो कल ही से अच्छे न थे, अब न जिएगा। बहते आँसू नारी के दिल की चीत्कार की एक ऐसी कहानी है, जो आपके मन और आत्मा तक को झकझोर कर रख देगी।
Chingariyan/चिंगारियाँ
प्रथम स्वाधीनता संग्राम में, अंग्रेज़ों की सत्ता उलटने के लिए, पूरे देश में जागृति की एक प्रबल लहर दौड़ गई। शत्रुओं को भारतीय शूरों की वीरता व देशभक्ति का लोहा मानना पड़ा — वे उनके नाम से कांपत थे, पर फिर क्या कारण थे कि राष्ट्रीय शक्तियों को अंग्रेजों के सामने पराजय का मुँह देखना पड़ा? इस उपन्यास में मुख्यतया दिल्ली, झांसी और कानपुर के आजादी पाने के संघर्षों का मर्मस्पर्शी चित्रण है।
Dada/दादा
समाज में ‘दादा’ कहलाने वाले व्यक्तियों से प्रायः लोग भयभीत रहते हैं। परन्तु लोकप्रिय उपन्यासकार आचार्य चतुरसेन के इस उपन्यास का ‘दादा’ एक ऐसा चरित्र है, जो अपने कारनामों से लोगों को आतंकित तो करता है, परन्तु मौका पड़ने पर किसी की सहायता के लिए जान पर भी खेल जाता है। कोई व्यक्ति प्रेम के लिए क्या कुछ कर सकता है, ‘दादा’ इसका अन्यतम उदाहरण है। इसके अतिरिक्त इस पुस्तक में आचार्यजी की कुछ ऐसी चुनी हुई कहानियां भी हैं, जिनका कथानक आपको मंत्रमुग्ध कर देगा।
Duniya Rang Rangili/दुनिया रंग-रंगीली
यह एक दार्शनिक का यात्रा-वर्णन है, जो विचारों एवं भावनाओं को उद्वेलित करता है। इसमें अमेरिका का सूक्ष्म एवं तलस्पर्शी निरीक्षण तो है ही, लेकिन भारतीय जीवन में जो कुछ शाश्वत एवं उदात्त है, उसका भी प्रभावोत्पादक निरूपण है। इस पुस्तक की भाषा अत्यंत सरल एवं रोचक है। एक बार पढ़ेंगे तो बार-बार पढ़ने का मन करेगा।
Hriday Ki Parakh/हृदय की परख
हृदय की परख आचार्य चतुरसेन का एक उत्कृष्ट सामाजिक उपन्यास है, इसमें एक रहस्यमयी नवयुवती की मार्मिक जीवन-गाथा है, जो समाज के लिए दर्पण है। किसी मनुष्य के हृदय में जब प्यास-सी उठती है, तो अजीब तरह की बेचैनी और छटपटाहट होने लगती है। मन चंचल होने लगता है और इसी के साथ शुरू होता है।
बहकना-भटकना। आचार्य चतुरसेन ने इसी मनोवैज्ञानिक सत्य को रोचक ढंग से हृदय की प्यास की कथा में मोती की तरह पिरोया है। यह कृति युवा मन को समझने का भी प्रयास करती है।
Bose (Hindi)/Subhash Babu/सुभाष बाबू
आम लोग सुभाष चंद्र बोस के गांधी से मतभेद और जर्मनी व जापान की मदद से द्वितीय विश्वयुद्ध में भारत को आज़ाद करवाने के प्रयासों के बारे में जानते हैं। लेकिन अब जो सूचनाएँ सामने आ रही हैं, वो बताती हैं कि उनके देश भर के क्रांतिकारियों से कैसे संबंध थे और अध्यात्म और खुफिया मिशनों से उनको कितना लगाव था। साथ ही, उन्होंने ब्रिटिश भारतीय सेना में विद्रोह पैदा करवाने के क्या-क्या प्रयास किए थे।
प्रश्न यह है कि क्या बोस वाकई नाजियों से सहानुभूति रखते थे? उन्होंने अपनी राजनीतिक छवि दांव पर क्यों लगाई? ऐसे ही कई सवालों के जवाब सुभाष बाबू नाम की यह पुस्तक देती है।
Flowers on The Path (Hindi)/Rah Ke Phool/राह के फूल
प्रस्तुत पुस्तक पाठकों के लिए एक गुलदस्ता है; यह द टाइम्स ऑफ इंडिया के स्तंभ ‘द स्पीकिंग ट्री’ धारावाहिक रुप में प्रकाशित सद्गुरु के आलेखों का संग्रह है। इन रचनाओं ने एकरसता और अशांति से घिरे लोगों के जीवन में नित्य प्रति सौंदर्य, हास्य, स्पष्टता और विवेक की शालीनता प्रवाहित की है।
सद्गुरु के मौलिक विचारों, स्पष्ट टिप्पणियों और समसामयिक मसलों पर दिए गए बयानों ने कभी-कभी विवाद पैदा किए हैं, पर उनसे राष्ट्रीय बहस में एक अलग रंगर और जीवंतता का संचार हुआ है। रुढ़ियों और परम्परागत विचारों से अलग नए दृष्टिकोण जगाकर पाठकों को चौंका देने वाली ये रचनाएँ, अपनी सौम्य सुगंध से भोर को भिगोते फूलों की तरह उत्साह और प्रेरणा प्रदान करती है।हमारी नजरों के सामने खिले फूलों की तरह इनमें आग्रहपूर्ण आमंत्रण है। सुवास आ आमंत्रण-सुवास जो मदहोश कर देती है, जो हमें याद दिलाती है कि जीवन कोई उलझी हुई पहेली नहीं है, बल्कि एक राज है जिसे अनुभव किया जा सकता है।
Hriday Ki Pyas/हृदय की प्यास
हृदय की प्यास आचार्य चतुरसेन का अत्यंत महत्त्वपूर्ण उपन्यास है। इसमें उन्होंने ऐसे युवक-युवतियों की सरस कथा कही है, जो वासनाओं की ओर झुकते हैं और फिर भावना तथा कर्तव्य की पहेली को सुलझाने के प्रयास में लग जाते हैं। प्रारंभ से अन्त तक पठनीय एक अत्यंत रोचक उपन्यास।
Patthar Yug Ke Do But/पत्थर युग के दो बुत
भारतीय साहित्य में अधिकतर प्यार करने वाले युवा-युवतियों की कहानियाँ पढ़ने को मिली हैं। विवाह के बाद घटने वाली घटनाओं पर बहुत कम साहित्य लिखा गया है। इस कमी को यह उपन्यास पूरा करता है। आचार्य चतुरसेन के इस उपन्यास में सभी पात्र अपने पति या पत्नियों के अतिरिक्त अन्य व्यक्तियों के प्रति आकृष्ट हैं। वे साँपों की इस घाटी में आँख मूंदकर बढ़ते चले जाते हैं और तब तक नहीं रुकते जब तक विनाश सामने नहीं आ जाता। समाज में आज भी स्त्री-पुरुष के विवाहेतर संबंध अनुचित माने जाते हैं लेकिन ये सम्बन्ध अस्वाभाविक नहीं हैं। इसी विषय-वस्तु को आधार बनाकर एक मनोरंजक वर्णन आचार्य चतुरसेन ने किया है साथ ही इसकी कथा का गठन भी ऐसा है कि पाठक के मर्म को छुए बिना न रहे।
