राजनैतिक पैंतरेबाजियों के बीच प्यार के लुभावने सपने युद्ध की लपटों में किस तरह बिखर गए, इसी की रोचक कहानी है — निमन्त्रण, जिसे इस सदी के महान उपन्यासकार आचार्य चतुरसेन ने अत्यंत कलात्मक ढंग से लिखा है।
Catagory: Non Fiction
non fiction main category
Swasthya Raksha/स्वास्थ्य रक्षा
स्वास्थ्य रक्षा का अर्थ है शरीर की रोग, विकार, आलस्य आदि से रक्षा करना। शास्त्रों के अनुसार आध्यात्मिक (मन से उत्पन्न दु:ख), आधिभौतिक (शारीरिक दु:ख) तथा आधिदैविक (प्रकृत दु:ख) रूपों से भावना की रक्षा, स्वास्थ्य रक्षा है। आचार्य चतुरसेन ने आयुर्वेद के तरीके से स्वस्थ रहने के मूलमंत्र को इस पुस्तक में दिया है। स्वास्थ्य रक्षा के अनेक मूलमंत्र हैं जैसे पौष्टिक और स्वास्थ्यकर भोजन खाना। भोजन नियत समय पर और भूख लगने पर करना चाहिए। सादा, सुपाच्य, सन्तुलित और पौष्टिक भोजन अधिक लाभदायक है। घी, तेल, फल, सब्जी के प्रयोग से भोजन में पौष्टिकता आती है। सड़े-गले बासी, अपाच्य भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। यह पुस्तक अपने आप में एक कंपलीट हैल्थ गाइड है, जो हर किसी के लिए उपयोगी है।
Vinamra Vidrohi/विनम्र विद्रोही
यह पुस्तक भारत में जन्मे विलक्षण प्रतिभाशाली गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जीवनी है जिसमें उनकी एक सामान्य परिवार में जन्म से लेकर कैंब्रिज में जाकर पढ़ने और गणित के अकाट्य सूत्रों को प्रस्तुत करने की कहानी है जिस पर अभी तक दुनिया मंथन कर रही है। इस पुस्तक में तत्कालीन समाज, अंग्रेज़ी राज, यूरोप की स्थिति और अकादमिक जगत की हलचलों का भी पता चलता है। इस पुस्तक की भाषा प्रांजल है और इसे युवा वैज्ञानिक डॉ मेहर वान और पत्रकार भारती राठौड़ ने काफी सरल भाषा और बातचीत की शैली में लिखा है जो पाठकों को बांधकर रखती है। विज्ञान, इतिहास, शोध और अकादमिक क्षेत्रों में दिलचस्पी रखने वालों के लिए यह एक ज़रूरी पुस्तक है।
Moti/मोती
मोती—एक अनोखा इन्सान, क्रांतिकारी आंदोलन में भाग लेने के कारण उसे सज़ा हो गई, लेकिन वह जेल से छूट कर आया तो देखा—उसके सपनों की रानी नीलम पुष्प-हार लिए उसके स्वागत को तैयार खड़ी है और विवाह की तैयारियाँ हो रही हैं।
प्रसिद्ध लेखक आचार्य चतुरसेन की इस अंतिम कृति के पीछे लेखक के पूरे जीवन का अनुभव है और इसमें उनकी कला पूरे विकास पर है।
Icons of Grace (Hindi)/Kripa Sindhu/कृपा सिन्धु
आध्यात्मिक विचारधारा भ्रमित भी कर सकती है। वर्तमान युग की उन्मत्त गति ने उन बन्धनों को ढील दी जो हमारे पूर्वजों को प्रार्थना और विश्वास से जोड़े हुए थे। लेकिन रोल मॉडल हमें अपनी राह फिर खोजने में मदद कर सकते हैं। कृपा सिन्धु में प्रसिद्ध इस्कॉन साधू नित्यानन्द चरण दास पाठकों को उन इक्कीस असाधारण प्रतीकों के जीवन से परिचित करा रहे हैं जो अपनी शिक्षाओं और जीवन के माध्यम से आध्यात्मिक मार्गदर्शक बने।
मीराबाई और रामानुजाचार्य से लेकर सन्त तुकाराम और आदि शंकराचार्य तक–महान आत्माओं का जीवन एक स्तर पर सबसे आवश्यक आध्यात्मिक सिद्धान्तों का व्यावहारिक प्रदर्शन ही है। हालांकि, नित्यानन्द चरण दास का उद्देश्य न केवल उनकी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की समृद्धि का उल्लेख करना है, बल्कि पाठकों को यह बताना भी है कि नित्य के कार्यों और विकल्पों से ही सीखा जा सकता है। कृपा सिन्धु प्रेरणादायक होने के साथ आशा भी प्रदान करती है : हमारी यात्रा कितनी भी दोषपूर्ण क्यों न रही हो, आध्यात्मिक मुक्ति सबके लिए सुलभ और सहज है।
Bargad par chad
Discover a playful and lively world of stories made entirely of four-letter words without matras! With simple language and colorful illustrations, this book helps young children build confidence, improve comprehension, and develop a love for reading—all through fun, engaging activities.
What’s Inside:
- Playful and lively stories designed for early readers.
- Bright, engaging pictures that make reading fun and visually appealing.
- Includes simple exercises to help children identify letters and understand words.
- Boosts early reading skills and curiosity.
Yash Gaj Par
Discover a playful and lively world of stories made entirely of two-letter words without matras! With simple language and colorful illustrations, this book helps young children build confidence, improve comprehension, and develop a love for reading—all through fun, engaging activities.
What’s Inside:
- Playful and lively stories designed for early readers.
- Bright, engaging pictures that make reading fun and visually appealing.
- Includes simple exercises to help children identify letters and understand words.
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Narmedh/नरमेध
“. . . अपने पति की शरण में लौट जाने की मेरी कितनी अभिलाषा थी, परन्तु मेरा यह पातक शरीर बाधक था। इसे लेकर मैं उनके पास नहीं लौट सकती थी। परन्तु वह भी देहबद्ध थे, अतः मैं देह त्यागकर भी उन्हें कैसे पाती, इसी से मर भी न सकी।”
आत्मग्लानि और प्रतिशोध से भरी-बिफरी एक असामान्य नारी की रुला देने वाली अनोखी कहानी।
अमर उपन्यासकार आचार्य चतुरसेन का अत्यन्त मार्मिक लघु उपन्यास, जिस पर इसी नाम से फिल्म का निर्माण भी हुआ है।
Teesra Patthar/तीसरा पत्थर
रामकुमार भ्रमर के इसी नाम से प्रकाशित चर्चित उपन्यास पर बनी बासु भट्टाचार्य की सफल फिल्म तीसरा पत्थर की यह स्क्रिप्ट पढ़ते हुए ऐसा अहसास दिलाती है कि जैसे फिल्म देखने का ही आनंद ले रहे हों।
इस पटकथा की कहानी बड़ी सरल एवं प्रभावी है।
Aapatkal Mein Gupt Kranti/आपातकाल में गुप्त क्रांति
जब देश में संपूर्ण क्रांति का बिगुल बजने ही वाला था, तो इन्दिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा कर देश-भर में पुलिस राज स्थापित कर दिया और सेंसर की कैंची ने अखबार-तो-अखबार लोगों की ज़बानें तक काट डाली थी। ऐसे में भी क्रांति हुई तो कैसे? भूमिगत होकर जो नेता तानाशाही से जूझे, जेल और पुलिस-यातना का जोखिम उठाकर भी जन-जन में क्रांतिचेतना को उभारते रहे, उन्हीं को मुख्य श्रेय है इस रक्तहीन क्रांति का। कैसे जूझे वे? कौन-कौन थे वे?
किस प्रकार क्रांति का कार्य-संचालन करते रहे? इस सबका अत्यन्त प्रामाणिक तथा रोचक वृत्तान्त प्रस्तुत किया है इस पुस्तक में दीनानाथ मिश्र ने, जो स्वयं उन दिनों भूमिगत होकर कार्य कर रहे थे। इस महत्त्वपूर्ण पुस्तक की भूमिका लिखी है लोकप्रिय नेता तथा पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने।
