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Rishta/रिश्ता

अलका बेहद परेशान है। कहती तो कुछ नहीं, बस गुमसुम-सी अकेली बैठी रहती है। लगता है, एकांत में रोती भी रहती है।
अब रो लेना ठीक है, लेकिन अगर यहाँ ब्याह हो जाए तो जीवन-भर रोती रहेगी।
सगाई के बाद उभरकर आती लड़के वालों की कमियों एवं छिपाई गई बातों की सच्ची कहानी। कन्या-पक्ष की मानसिक ऊहापोह तथा बेचैनियों की तिलमिला देने वाली कथा। सफल उपन्यासकार दत्त भारती का एक ऐसा उपन्यास, जो आपको रुलाकर रख देगा। 

Bauddh Jeevan Kaise Jiyen/बौद्ध जीवन कैसे जीएँ

‘हे बुद्ध, मैं तुमको, धम्म को और संघ को शरणागत हूँ . . . बस, यही त्रिरत्न मेरी कुल संपदा है अन्यथा और कुछ भी नहीं है मेरे पास . . .
बौद्ध धर्म के पालन के लिए किसी भी व्यक्ति को तीन बातों पर अमल करना होगा : पहली उसे सभी सिद्धांतों की जानकारी हो। दूसरी सिद्धांतों को व्यवहार में लाने के लिए रूपरेखा सामने हो। तीसरी रूपरेखा को व्यवहार में उतारने के लिए साहस, संकल्प व अनुशासन हो।
यह पुस्तक पहली दो आवश्यकताओं की पूर्ति करती है, जबकि तीसरी आवश्यकता को पूरा करना आप पर निर्भर है यह धम्म की पुकार थी कि धम्मचारी सुभूति के शृंखलाबद्ध प्रवचनों का अनुवाद करने का विचार मन में उठा। इसी का प्रतिफल यह पुस्तक है, जो हर किसी को धम्म पर चलने और बुद्धत्व प्राप्त करने का मार्ग दिखाएगी।

Urdu Ke Prasiddh Shayar Faiz Ahmed Faiz/उर्दू के प्रसिद्ध शायर फैज़ अहमद फैज़

फ़ैज़ अहमद फै़ज़ उर्दू के बहुत ही जाने-माने कवि थे। आधुनिक उर्दू शायरी को उन्होंने एक नई ऊँचाई दी। इस पुस्तक में उनकी जीवनी एवं शायरी दी गई है। फै़ज़ अहमद फै़ज़ की उर्दू कविता दुआ का बलोची अनुवाद बलोच कवि गुल खान नासिर द्वारा किया गया। 20वीं सदी का वो महान् उर्दू शायर जिसने सरकारी तमगों और पुरस्कारों के लिए नहीं, जिसने शराब की चाशनी में डूबती-नाचती महबूबाओं के लिए नहीं, जिसने मज़ारों और बेवफ़ाईयों के लिए नहीं बल्कि अपने इंसान होने के एहसास, समाज और देश के लिए, एक सही और बराबरी की व्यवस्था वाले लोकतंत्र के लिए इंकलाब को अपने कलम की स्याही बनाया और ज़ुल्म-ओ-सितम में जी रहे लोगों को वो दिया जो बंदूकों और तोपखानों से बढ़कर था। फ़ैज़ की कविताओं में जितना ज़िंदा वो सच है जिसमें हम जी रहे हैं, उतना ही ज़िंदा वो हौसला है जिसकी बदौलत आदम-ओ-हव्वा की औलादें अपने वर्तमान को बदल सकती हैं।  

Sakshi Chetna: Amrita Pritam/साक्षी चेतना : अमृता प्रीतम

इस पुस्तक में राजेश चन्द्रा ने संस्मरणों के रूप में उन यादगार पलों का जिक्र किया है, जो उन्हें अमृता प्रीतम के संग जिए हैं। ये संस्मरण एक महान लेखक के संग उनके प्रशंसक की श्रद्धांजलि है। इसमें अमृता प्रीतम के जीवन के कुछ ऐसे अनछुए प्रसंग हैं, जो केवल लेखक की कलम से ही उकेरे गए हैं एवं साहित्य की धरोहर बन गए हैं। यह पुस्तक साहित्य जगत में अपना एक विशिष्ट स्थान रखती है। कमलेश्वर ने इस पुस्तक को पढ़कर कहा था कि यह हमारी खुशनसीबी है कि मैं अमृता प्रीतम के दौर में साँस ले रहा हूँ। 

Ravan Ko Gussa Kyon Aata Hai?/रावण को गुस्सा क्यों आता है?

देश के हालात इतने बुरे हो गए हैं कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम से लेकर भगवान बुद्ध, कालिदास, शाहजहां, महात्मा गांधी, चचा गालिब और प्रेमचन्द भी हक्के-बक्के हैं। उन्हें अब कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है। अब तो रावण को भी गुस्सा आने लगा है। इस पुस्तक में राजनीति, बाज़ार, मीडिया और भूमंडलीकरण से उत्पन्न विद्रूप स्थितियों को व्यंग्य के माध्यम से कहने की कोशिश है, जो आज के दौर की उलटबांसी हो गई है। यहाँ पढ़िए, गांधी जी चैनल को क्या इंटरव्यू दे रहे हैं? गालिब इलेक्शन पर क्या बोल रहे हैं? महँगाई के बारे में कालिदास क्या कह रहे हैं? घड़ियाल भारतीय राजनीति पर क्या टिप्पणी कर रहा है? बाघ ‘लव’ में असफल होकर क्यों आत्महत्या कर रहा है? हनुमान की व्यथा क्या है और भूमंडलीकरण के दौर में कुत्ते का दर्द क्या है?  

Kranti Gitanjali/क्रांति गीतांजलि

उठो देश भक्तों की फेहरिस्त में,
बढ़ो नाम अपना लिखाते चलो।
जो रग-रग में भर देवे जोशे वतन,
वह ‘आज़ाद’ गज़लें सुनाते चलो।—भागवत झा ‘आज़ाद’
ये क्रांतिगीत हैं, जिन्हें देश के लोह-लाड़लों ने लिखा और करोड़ों देशवासियों ने गाया और उन्हें अपनी आज़ादी की लड़ाई का अर्थ समझाया। ये गीत रचे गए और रचनाकारों को न जेल के अंधेरे डरा सके, न ब्रिटिश सरकार की यातनाएँ झुका सकीं। क्रांति के ये गीत छपने के साथ ही ब्रिटिश सरकार द्वारा ज़ब्त कर लिए गए थे, पर चलता रहा यह अटूट सिलसिला, इनकी गंजुर से काँपते रहे़ शासकों के कलेजे।
यह पुस्तक अपने-आप में प्रामाणिक ऐतिहासिक दस्तावेज़ है। बिहार राज्य के अभिलेखागार के दस्तावज़ों के आधार पर इन गीतो का संकलन किया गया है। गीतो के साथ जब्ती के शासनादेश मलू-रूप में दिए गए हैं। यह संकलन काव्य-प्रेमियों, जिज्ञासुओं और शोधार्थियों के लिए अत्यधिक महत्त्वपूर्ण है। 

Abundance (Hindi) /Aatmik Samriddhi Ki Oar/आत्मिक समृद्दि की ओर

आधुनिक मेडीटेशन के मास्टर बता रहे हैं कि आप आत्मिक समृद्धि से भरा जीवन कैसे जी सकते हैं।
हममें से ज़्यादातर लोग अभावों और सीमाओं से जुड़े किसी-न-किसी विचार से जकड़े रहते हैं, और बस उन्हीं चीज़ों पर ध्यान देते हैं जो हमारे पास नहीं होतीं। अक्सर हमारी सोच और काम पर हमारे अहंकार का असर पड़ता है और हम ऐसा होने देते हैं। इसी कारण से मन की शांति, लोगों के स्वीकारे जाने और दिल से संतुष्टि जैसे सच्चे भावों से हम अछूते रह जाते हैं।
आत्मिक समृद्धि की ओर में इंटीग्रेटिव मेडिसिन (वैकल्पिक चिकित्सा) के अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मेंटॉर दीपक चोपड़ा सात सरल चरणों की एक योजना बताते हैं ताकि आप दुबारा अपना ध्यान केंद्रित कर सकें और अपनी ज़िंदगी की कमान अपने हाथ में थाम संभावनाओं से भरे जीवन की ओर बढ़ सकें। यह किताब एक मेंटॉर की तरह आपको अपनी सच्ची क्षमता, सफलता और सुखी-समृद्ध जीवन की राह दिखाती है; साथ, यह समझाती है कि अपनी बनाई सीमित मानसिकता से छुटकारा पाने और अपने ध्यान व समझ को एक जगह केंद्रित करने के लिए क्या करें और कैसे।  

Office Secrets/ऑफ़िस सीक्रेट्स

हम कॉर्पोरेट जीवन में जिस ढंग से काम करते हैं, उन्हीं में छुपे होते हैं कई राज़। इनमें जो कारगर होते हैं वह गूढ़ आँकड़ों या गोपनीय रणनीतियों से जुड़े दस्तावेज़ नहीं, बल्कि उदारता, हास-परिहास, एक अच्छी फ़िल्टर कॉफ़ी या सिर-खपाऊ मीटिंग के बाद तीस मिनट के मी टाइम जैसे सरल व मानवीय पहलू हैं।
यह पुस्तक आकर्षक और कारगर टिप्स का ऐसा संकलन है, जो आपको अपने ऑफ़िस में और अधिक सफल होने में मदद कर सकती हैं। उस पर बोनस जैसे ये टिप्स आपको थोड़ी राहत भी दे सकती हैं। इसमें, आपको मज़ेदार और प्रासंगिक विषयों की विविधता मिलेगी, जिनमें काम के दौरान अपनी मेज़ को व्यवस्थित करने, थकान भगाने के सर्वोत्तम तरीके, पावर ऑफ लिस्निंग, नेकी-उदारता क्यों की जाए और आपके सहकर्मी जिस तरीके से कुकीज़ खाते हैं, आप उनसे क्या-कुछ सीख सकते हैं, जैसे विषय शामिल हैं।
‘कॉरपोरेट गलियारों में काम करने के छोटे-छोटे लेकिन कमाल के तरीके’ –सुपर्णा मित्रा, सीईओ, वॉचेस एंड वियरेबल्स, टाइटन कंपनी लिमिटेड   

What it Takes to be Free Hindi / Kaise Bharen Azadi Ki Udaan / कैसे भरें आज़ादी की उड़ान

आप जो चाहें कर सकते हैं। अपने पसंदीदा लोगों के साथ समय बिता सकते हैं और अपने पसंदीदा काम को करियर भी बना सकते हैं। यह सब सपने जैसा तो लगता है लेकिन असंभव नहीं है।
उन्मुक्त जीवन की बहुत बड़ी कीमत होती है। यह मुश्किल तो है, लेकिन असंभव नहीं है। लेकिन यदि आप भी इसकी कीमत अदा करने के लिए तैयार हैं तो आप भी उन्मुक्त हो सकते हैं।इस पुस्तक में आपको जीवन पर नियंत्रण रखने और सही मायने में उन्मुक्त जीवन जीने के गुर बताए गए हैं। यह आसान नहीं लेकिन आप अपने परिश्रम से असंभव को संभव कर दिखा सकते हैं।
उन्मुक्तता यानी दूसरों को कोई कष्ट पहुँचाए बिना मनचाही आज़ादी का अर्थ होता है अपनी शर्तों पर ज़िंदगी जीना। इस किताब का उद्देश्य ही आपको यह अर्जित करने में मदद करना है, जैसा कि आप चाहते हैं, वैसा लक्ष्य हासिल कर सकें। 

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